23 साल बाद इराक से अमेरिकी सैनिकों की फाइनल वापसी हो रही है. अमेरिका, इराक में अपने आखिरी सैन्य ठिकानों को भी 30 सितंबर यानि बुधवार तक हटा रहा है. मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच इराक से अमेरिकी सैनिकों के बोरिया बिस्तर बांधने को तेहरान बड़ी जीत बता रहा है.
इराक से अमेरिकी सैनिकों के पैकअप की कहानी साल 2024 में ही बाइडेन सरकार के दौरान लिखी जा चुकी थी. जिसे अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूरा किया है.
इराक में तैनाती के दौरान युद्ध, सैन्य तनाव और आतंकी हमलों में 21 वर्षों में तकरीबन 4500 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है, तो अमेरिका अपने सैन्य अड्डों और सैनिकों की सुरक्षा के लिए अरबों-खरबों डॉलर्स का खर्चा कर चुका है.
अमेरिकी सैनिक बगदाद से विदा लेंगे, लेकिन अंदेशा इस बात का है कि अमेरिका की घरवापसी से आईएसआईएस समर्थित आतंकी गुट एक बार फिर सिर उठाएंगे. इसके अलावा अमेरिकी सैनिकों के क्षेत्र से चले जाने से ईरान को रणनीतिक तौर पर फायदा मिलना तय है.
बगदाद में अमेरिकी सैनिकों की आखिरी चहल-कदमीइराक में अमेरिका के आखिरी सैन्य ठिकानों से उसकी सेना बुधवार तक लौटने वाली है. अमेरिकी सेना ने 2003 में सुन्नी तानाशाह सद्दाम हुसैन को हटाने के लिए इराक पर हमला किया था. इसके बाद अमेरिकी सैनिकों ने इराक के कानून-व्यवस्था को संभालने के लिए डेरा जमा लिया. फिर अमेरिका की मदद से इराक में शिया नेतृत्व वाली सरकार बनाई गई.
स्थिति संभलने के बाद अमेरिकी सैनिकों की तैनाती कम की गई, लेकिन एक बार फिर अमेरिकी सैनिकों को इराक वापस लौटना पड़ा क्योंकि आतंकी संगठन आईएसआईएस अपना सिर उठा चुका था. साल 2014 से 2017 तक चली जंग में इस्लामिक स्टेट को हराने में अमेरिकी सेना ने इराकी सेना की मदद कर की. इराक में ऑपरेशन इराकी फ्रीडम के तहत आईएसआईएस से लड़ाई में हजारों अमेरिकी सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी.
साल 2024 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ये फैसला लिया था कि इराक से सभी अमेरिकी सैनिकों की वापसी की जाएगी. और 30 सितंबर 2026 वो दिन है, जब अमेरिकी सैनिक इराक में बने सैन्य अड्डे पर आखिरी चहल कदमी देखी जा रही है.
अमेरिकी सेना की वापसी से इराक-ईरान में मनेगा जश्न
ईरान समर्थित गुटों के समूह इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक के कमांडर अबू मुजतबा अल यासिरी ने अमेरिकी सेना के पैकअप को ऐतिहासिक जीत और अमेरिकी योजना की करारी हार बताया है. अबु मुजतबा ने कहा, “30 सितंबर को इराक के इतिहास का काला पन्ना पलटने का जश्न मनाया जाएगा. इराक की संप्रभुता विदेशी सेनाओं से नहीं, प्रतिरोध और जनता की इच्छा से सुरक्षित होती है. इराकी चाहते थे कि अमेरिकी सेना इराक की धरती छोड़ दे और ये होने जा रहा है.”
ईरान ने भी अमेरिकी सेना के जाने को जीत करार दिया है. ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख आमिर हयात मोकद्दम ने कहा, “इराक में स्थायी सुरक्षा शुरू होने जा रही है. मोकद्दम ने कहा, ईरान “इराक से अमेरिकी सैनिकों की वापसी का स्वागत करता है और वह बेझिझक इसका समर्थन करेगा.”
2020 में बगदाद हवाई अड्डे पर मारा गया था कासिम सुलेमानी
वैसे से तो ईरान हमेशा से अमेरिका को अपना दुश्मन मानता है, लेकिन साल 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में ऐसा कुछ किया था, जिसके बाद से ईरान के हिटलिस्ट में पहले नंबर पर ट्रंप हैं. 2020 में अमेरिका ने बगदाद हवाई अड्डे पर हमला कर ईरान के शीर्ष कमांडर कासिम सुलेमानी को मार दिया था. 62 वर्षीय सुलेमानी ईरान के विशिष्ट कुद्स सुरक्षा बल के मुखिया थे और उन्हें मध्य एशिया में ईरान के छद्म युद्धों के निर्माता के रूप में भी देखा जाता था.
उस वक्त कासिम सुलेमानी का जहाज बगदाद हवाई अड्डे पर उतरा तो वो एक सैन्य अधिकारी की गाड़ी में सवार होकर बगदाद में किसी बैठक के लिए जा रहे थे, उसी वक्त अमेरिका ने ड्रोन अटैक किया और सुलेमानी की मौके पर ही मौत हो गई थी.
तब से लेकर आजतक ईरानी सेना आईआरजीसी और उसके सहयोगी गुटों ने अमेरिकी ठिकानों पर कई बार हमला किया और कई बाद ट्रंप को भी मारने की कोशिश की गई.
फरवरी 2026 में अमेरिका-ईरान के बीच शुरु हुए युद्ध में अब तक 18 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं. इनमें से 7 अमेरिकी सैनिक इराक में तैनात थे. इराक में आखिरी अमेरिकी सैनिक की मौत जुलाई में इरबिल सैन्य अड्डे पर हुए ड्रोन हमले में हुई थी.


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