भारत की मिलिट्री डिप्लोमेसी इन दिनों टॉप गियर में है. एक तरफ राजस्थान के जोधपुर में मल्टीनेशन एयर एक्सरसाइज तरंग-शक्ति (28 सितंबर-12 अक्टूबर) आखिरी चरण में है तो उधर नौसेना के जंगी जहाजों ने इंग्लैंड से लेकर रुस तक अपना डेरा डाल लिया है. रूस के व्लादिवोस्तोक में सालाना द्विपक्षीय अभ्यास इंद्रा-2026 (13-18 अक्टूबर) में हिस्सा लेने के लिए आईएनएस सह्याद्रि एक बार फिर पहुंच गया है तो इंग्लैंड के प्लायमाउथ में भारतीय युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल.
भारतीय नौसेना के मुताबिक, व्लादिवोस्तोक में इंद्रा युद्धाभ्यास के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं को पेशेवर एवं परिचालन स्तर पर विचार-विमर्श करने का अवसर मिलेगा, जिससे समुद्री सहयोग और पारस्परिक रूप से एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने की क्षमता को बढ़ावा मिलेगा.
आईएनएस सह्याद्रि की भागीदारी भारत सरकार के महासागर यानी अपने क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति के दृष्टिकोण के अनुरूप है. यह भारत व रूस के बीच लंबे समय से चली आ रही रक्षा एवं समुद्री साझेदारी को और सशक्त बनाती है. यह तैनाती 4-5 दिसंबर 2025 को आयोजित 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान बनी गति को आगे बढ़ाने का अवसर भी प्रदान करती है, जिसमें राजधानी दिल्ली में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी.
नौसेना ने बताया क्या है खास रुस के साथ इंद्रा एक्सरसाइज में खास
नौसेना के प्रवक्ता, कैप्टन विवेक मधवाल के मुताबिक, अभ्यास इंद्र-2026 के बंदरगाह चरण में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जिसके बाद तालमेल के साथ समुद्र में समन्वित परिचालन कार्यक्रम संपन्न होंगे. इस अभ्यास में विभिन्न पेशेवर चर्चाओं और समुद्री गतिविधियों को शामिल किया जाएगा. इनका उद्देश्य भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच आपसी समझ, परिचालन समन्वय और पारस्परिक परिचालन क्षमता को बेहतर बनाना है.
इंग्लैंड में रॉयल नेवी के साथ कोंकण एक्सरसाइज
उधर, भारतीय नौसेना का आधुनिक सुविधाओं से लैस मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट जहाज आईएनएस त्रिशूल ब्रिटेन के प्लायमाउथ पहुंच गया है. यह युद्धपोत रॉयल नेवी के साथ अभ्यास कोंकण-2026 (8 से 15 अक्टूबर) में भाग लेगा.
भारत और ब्रिटेन के बीच आयोजित होने वाला वार्षिक समुद्री अभ्यास ‘कोंकण-2026’ दोनों देशों की सशक्त समुद्री साझेदारी का प्रतीक है. पिछले दो दशकों में इस अभ्यास की जटिलता और इसका दायरा काफी बढ़े हैं, जिससे दोनों नौसेनाओं के बीच समुद्री अभियानों में बेहतर समन्वय व आपसी समझ विकसित हुई है. अपनी शुरुआत से ही अभ्यास कोंकण दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग का एक महत्वपूर्ण आधार रहा है और समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए दोनों नौसेनाओं की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
समुद्री चरण के दौरान दोनों देशों के जहाजों के बीच तीनों क्षेत्रों में यानी कि वायु, सतह और पानी के नीचे जटिल समुद्री परिचालन अभ्यास किए जाएंगे. कोंकण अभ्यास के इस संस्करण में एक-दूसरे के जहाजों पर विमान उतारने, फायरिंग, वायु रक्षा, जटिल नौचालन गतिविधियों एवं पनडुब्बी-रोधी अभ्यासों सहित विभिन्न हवाई परिचालन गतिविधियों को शामिल किया जाएगा, जिससे अभ्यास और अधिक चुनौतीपूर्ण बनेगा.

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