By Nalini Tewari
अरुणाचल प्रदेश में चीन से साथ तनाव को लेकर इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस यानि आईटीबीपी के डीजी शत्रुजीत कपूर ने एक ऐसा बयान दिया है, जिससे सनसनी फैल गई है. आईटीबीपी के शीर्ष अधिकारी ने खुलासा किया है कि अरुणाचल प्रदेश में एलएसी पर चीन के साथ कई जगहों पर तनातनी जारी है और भारत-चीन आमने-सामने हैं.
दरअसल पिछले 2-3 महीनों से अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ झड़प की अपुष्ट खबरें आती रही हैं, लेकिन आईटीबीपी के डीजी के बयान से उन अपुष्ट खबरों की पुष्टि हो चुकी है. हालांकि इस फेसऑफ को लेकर भारत और चीन के सैन्य अधिकारी बैठकर बात कर चुके हैं, लेकिन ये मामला अबतक सुलझा नहीं हैं.
चीन के साथ कई जगहों पर तनाव, स्थिति अभी भी जैसी की तैसी: डीजी शत्रुजीत कपूर
आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने 22 अक्टूबर को राजस्थान के अलवर में आईटीबीपी कर्मियों के सम्मान समारोह के दौरान चीन के साथ तनावपूर्ण स्थिति पर बड़ा बयान दिया है. डीजी ने आईटीबीपी के शौर्य बटालियन की भूमिका की तारीफ करते हुए कहा, कि “पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने आए हैं. ऐसी स्थिति अब भी जारी है.”
डीजी ने कहा, “आईटीबीपी के शौर्य कमांडो ने मौजूदा टकराव के दौरान प्रभावी भूमिका निभाई और स्थिति को संभाला. आईटीबीपी की ताकत ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काम करने का अनुभव है और इस क्षमता को आगे बढ़ाने की जरूरत है.”
पहली बार किसी अधिकारी ने मानी फेस-ऑफ की बात,
डीजी के मुताबिक अरुणाचल के असफिला जैसे क्षेत्रों में चीनी सैनिकों ने एलएसी से महज छह-सात किलोमीटर दूर तंबू लगा रखे हैं. डीजी ने कहा, शौर्य कमांडो प्लाटून ने पीएलए के साथ आमने-सामने की स्थितियों में प्रभावी जवाब दिया. शौर्य कमांडो अब हर बॉर्डर बटालियन में होंगे और आईटीबीपी को एक अलग पहचान देंगे.
पिछले 2-3 महीने से अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबानसरी इलाके में दोनों देशों की सेनाएं आमने सामने हैं और टकराव की स्थिति बनी हुई है. दोनों देशों के कोर कमांडर स्तर की बैठक से भी कोई हल नहीं निकल पाया है.
ब्रिक्स सम्मेलन के आसपास अरुणाचल में चीन संग तनाव की कई खबरें और वीडियो वायरल हुए थे. लेकिन इसके बारे में न तो भारत और न ही चीन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया दी गई थी. लेकिन आईटीबीपी महानिदेशक ने ये भी खुलासा किया है कि अरुणाचल में अब भी कई जगहों पर एलएसी पर पीएलए के साथ तनाव जारी है.
आपको बता दें कि आईटीबीपी, जो 1962 में गठित हुई थी और लगभग 3488 किलोमीटर लंबी एलएसी की सुरक्षा करती है. लेकिन साल 2020 में गलवान घाटी में भारतीय सेना के साथ हुई झड़प के बाद आईटीबीपी अपने कमांडोज़ को पारंपरिक तौर से आगे युद्धकौशल में माहिर बना रही है. शौर्य कमांडो इसका उदाहरण हैं. ये कमांडो गलवान जैसी स्थितियों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित हैं.
अपर-सुबानसरी से सटी एलएसी पर चल रही तनातनी
गौरतलब है कि अगस्त के आखिरी महीने से अरुणाचल प्रदेश से सटी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर अपर-सुबानसरी क्षेत्र में दोनों देश आमने-सामने हैं और फेस ऑफ की स्थिति बनी हुई है. सूत्रों के मुताबिक, वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के नो-मैन्स जोन में पैट्रोलिंग के दौरान, दोनों देशों के सैनिक आमने सामने आ गए थे. स्थानीय फोर्मेशन कमांडर्स के बीच हुई वार्ता से भी तनातनी खत्म नहीं हुई है. दोनों देशों के सैनिक विवादित इलाके में टेंट गाड़ कर बैठ गए हैं. ऐसे में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है.
इस स्थिति से निपटने के लिए सितंबर के महीने में दोनों देशों की सेनाओं ने कोर कमांडर स्तर की बैठक आयोजित की थी. लेकिन उस बैठक में भी कोई नतीजा नहीं निकल पाया है और डीजी के मुताबिक जस की तस स्थिति बनी हुई है.
इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोवल ने भी बीजिंग का दौरा किया था. उस दौरान, डोवल ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से बॉर्डर की स्थिति को लेकर विशेष प्रतिनिधि मीटिंग की थी.
सितंबर महीने में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अरुणाचल प्रदेश में चल रही तनातनी को लेकर सवाल के जवाब में कहा था कि “दोनों देशों के संबंधों में बॉर्डर की स्थिति बेहद अहम है.”
डीजी के बयान पर सियासत, कांग्रेस ने सरकार को घेरा
आईटीबीपी डीजी के बयान के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर वार करते हुए लिखा, “चीन के मामले में सरकार की ओर से लगातार छूट दी जा रही हैं, जबकि अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ टकराव की स्थिति बनी हुई है.”
जयराम रमेश ने कहा कि “आईटीबीपी ने सीमा पर भारतीय जवानों के प्रदर्शन की सराहना की है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी और सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.”

