By Nalini Tewari
आईटीबीपी डीजी शत्रुजीत कपूर के अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ तनाव के खुलासे पर विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया की सीमा पर शांति बनी रहनी चाहिए. प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जब चीनी सेनाएं पहले से तय गश्त के तौर-तरीकों से हटती हैं, तो भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति बिगड़ जाती है.
एमईए ने ये भी जानकारी दी कि भारत और चीन दोनों ही देश इस तरह की तनावपूर्ण स्थिति को लेकर कूटनीतिक बातचीत जारी रखे हुए हैं. और आपसी समझ के साथ बेहतर तरीके से बातचीत करने पर तैयार हैं.
आपको बता दें कि आईटीबीपी के महानिदेशक ने एक कार्यक्रम के दौरान इस बात की पुष्टि की थी कि अरुणाचल प्रदेश में एलएसी पर कई जगहों पर चीन के साथ तनावपूर्ण स्थिति बनी थी और अब भी जारी है, लेकिन आईटीबीपी के स्पेशल कमांडोज़ इस स्थिति को सफलतापूर्वक संभाले हुए हैं.
विदेश मंत्रालय ने भारत-चीन के तनाव पर क्या बयान दिया
आईटीबीपी के डीजी के बयान के बाद विदेश मंत्रालय ने चीन के साथ तनाव के बारे में बात की है. प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत-चीन बॉर्डर इलाकों में स्थिति तब बिगड़ जाती है, जब चीन की सेनाएं अपनी तय गश्त की प्रक्रिया से हट जाती हैं. दोनों पक्ष एलएसी पर लंबित मुद्दों को सुलझाने और किसी भी तरह की गलतफहमी या गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा राजनयिक और मिलिट्री सिस्टम का उपयोग करना जारी रखे हुए हैं.”
रणधीर जायसवाल ने कहा, “दोनों पक्ष सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए कुछ विशिष्ठ इलाकों में एलएसी को लेकर आपसी समझ को बेहतर तरीकों पर चर्चा करने के लिए सहमत हुए हैं. मैं इस बात पर भी जोर देना चाहूंगा कि द्विपक्षीय रिश्तों के लिए बॉर्डर इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना आवश्यक है. “
अरुणाचल प्रदेश में कई जगह फेस-ऑफ जारी: आईटीबीपी डीजी
आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने 22 अक्टूबर को राजस्थान के अलवर में आईटीबीपी कर्मियों के सम्मान समारोह के दौरान चीन के साथ तनावपूर्ण स्थिति पर बड़ा बयान दिया था. डीजी ने आईटीबीपी के शौर्य बटालियन की भूमिका की तारीफ करते हुए कहा, कि “पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने आए हैं. ऐसी स्थिति अब भी जारी है.”
डीजी ने कहा, “आईटीबीपी के शौर्य कमांडो ने मौजूदा टकराव के दौरान प्रभावी भूमिका निभाई और स्थिति को संभाला. आईटीबीपी की ताकत ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काम करने का अनुभव है और इस क्षमता को आगे बढ़ाने की जरूरत है.”
डीजी के मुताबिक “अरुणाचल के असफिला जैसे क्षेत्रों में चीनी सैनिकों ने एलएसी से महज छह-सात किलोमीटर दूर तंबू लगा रखे हैं. शौर्य कमांडो प्लाटून ने पीएलए के साथ आमने-सामने की स्थितियों में प्रभावी जवाब दिया. शौर्य कमांडो अब हर बॉर्डर बटालियन में होंगे और आईटीबीपी को एक अलग पहचान देंगे.”
बता दें कि भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) दोनों देशों के बीच वह सीमा रेखा है, जो उन क्षेत्रों को अलग करती है जहां तक भारत और चीन का वास्तविक नियंत्रण है. भारत के मुताबिक करीब 3,488 किलोमीटर है. लेकिन कई क्षेत्रों पर चीन अपना दावा करता रहता है और आए दिन अपने मैप में अरुणाचल प्रदेश का नाम बदल देता है. लेकिन भारत, चीन के दावों को खारिज करता रहा है.
साल 2020 में गलवान में हुई झड़प के बाद भारत-चीन के रिश्ते बेहद तल्ख हो गए थे, लेकिन पिछले 02 वर्षों से भारत-चीन के रिश्तों में थोड़ा सुधार तब आया जब पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कई बार मुलाकात और द्विपक्षीय वार्ता हो चुकी है. जिसके बाद दोनों देशों ने संवाद के माध्यम से रिश्ते सुधारने पर जोर दिया. लेकिन अरुणाचल प्रदेश में ताजा तनाव की पुष्टि के बाद साफ है कि दोनों देशों में संवाद से विवाद सुलझा नहीं है.

