By Nalini Tewari
पारंपरिक युद्ध में चीन का मुकाबला मुश्किल लेकिन यूक्रेन और ईरान की तरह ड्रोन वॉरफेयर में निपुण होना जरूरी. ये बयान है अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ तनाव का खुलासा करने वाले आईटीबीपी डीजी शत्रुजीत कपूर का. अरूणाचल प्रदेश में चल रहे फेसऑफ के बीच ड्रोन युद्ध आज के समय में कितना अहम हो चुका है, इसकी अहमियत आईटीबीपी डीजी ने बताई.
दरअसल दुनिया के अलग-अलग मोर्चों पर चल रही जंग के बीच ड्रोन वारफेयर पारंपरिक युद्ध से कहीं आगे निकल चुका है. 28 फरवरी को ईरान पर हमला करने से पहले शायद ही अमेरिका ने सोचा होगा कि ईरान अपने ड्रोन के ताकत के बल पर सुपरपावर को चुनौती दे डालेगा. इसी तरह से रूस-यूक्रेन युद्ध में भी, यूक्रेन आए दिन अपने घातक ड्रोन से रूस के रिफाइनरी और अहम इमारतों को नुकसान पहुंचा रहा है.
ऐसे में भारत भी आने वाले वक्त में ड्रोन्स और सेना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मॉर्डन हथियारों और नई तकनीकि की जरूरत जानता है,इसलिए सशस्त्र बलों को नई टेक्नोलॉजी से मजबूत करने में जुट गया है.
ईरान ने बिना आर्मी के अमेरिका को चुनौती दे डाली: शत्रुजीत कपूर
इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस के डीजी शत्रुजीत कपूर ने ईरान-अमेरिका और रूस-यूक्रेन के युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा, “हमारे लिए चीन के साथ पारंपरिक युद्ध में मुकाबला करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. लेकिन ड्रोन वॉरफेयर ऐसी रणनीति है जिसके जरिए यूक्रेन ने रूस जैसे सुपरपावर को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया है. ठीक इसी तरह ईरान ने बिना आर्मी, एयर फोर्स के इन ड्रोन के जरिए अमेरिका जैसी महाशक्ति का मुकाबला किया. इसलिए हमें भी ड्रोन और काउंटर-ड्रोन पर काम करना है. इसीलिए हमने अपने 400 करोड़ में से 70 प्रतिशत ड्रोन वॉरफेयर के लिए रखा है. इसलिए हमने हर बटालियन में एक ड्रोन प्लाटून बनाई है. ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग शुरु कर दी है.”
आईटीबीपी की ड्रोन प्लाटून तैयार
आईटीबीपी डीजी ने कहा, “चीन का फ्रंट हमारा ‘सबसे मुश्किल’ बॉर्डर है, और चीन एक ताकतवर पड़ोसी से मुकाबला करने के लिए बेहतर क्षमताओं की जरूरत है. ड्रोन एक बड़ी चुनौती और मौका भी बन गए हैं. चीन ने अपने पीएलए को मॉडर्न बनाया है और उसमें भारी इन्वेस्ट किया है, लेकिन ड्रोन ऐसे हैं कि एक छोटा देश भी बड़े देश को कड़ी टक्कर दे सकता है.
“ड्रोन आने के बाद से पारंपरिक सेनाओं की भूमिका बदल गई है, और हमें ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम को बड़े पैमाने पर अपनाना चाहिए. हर बॉर्डर गार्डिंग बटालियन के पास अब एक ड्रोन प्लाटून है. ड्रोन पायलटों को ट्रेनिंग दे रहे हैं और ड्रोन भी बना रहे हैं.”
डीजी ने कहा, “गृह मंत्रालय ने एक बड़ी मॉडर्नाइजेशन स्कीम को भी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, जिसमें से हम ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए 1,000 करोड़ रुपये रखेंगे. आईटीबीपी जवानों को ट्रेनिंग देने के लिए ‘स्ट्राइक’ नाम का एक नया कोर्स बनाया गया है, जो गलवान जैसे हालात का सामना करने की उनकी क्षमताओं को बढ़ाएगा. पूरी फोर्स 2027 के आखिर तक यह ट्रेनिंग लेगी.”

