इस महीने भारतीय वायुसेना अपना 94वां स्थापना दिवस मना रही है. इस मौके पर रविवार (25 अक्टूबर) को पहली बार काशी के नमो घाट और मां गंगा के आसमान में, भारतीय वायुसेना के 94 फाइटर जेट और मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट एक साथ अपनी ताकत का दमखम दिखाने जा रही है. ये महज एक एयर शो नहीं है बल्कि दुश्मन-देशों को एक कड़ा संदेश है कि हिंद की सेना से टकराने की जुर्रत मत करना. वरना अंजाम ठीक वैसा होगा, जैसा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने किया था. यानी दुश्मन देश धुआं-धुआं.
हनुमान चालीसा की धुन पर भारतवर्ष के सबसे बड़े तीर्थ स्थल में से एक, वाराणसी में मां गंगा के आसमान में मैनुवर करता दिखाई पड़ेगा भारतीय वायुसेना का सबसे घातक फाइटर जेट, सुखोई. बनारस के घाट पर अपनी कलाबाजियां दिखाने के अलावा एक साथ पांच सुखोई फाइटर जेट बेहद खास फॉर्मेशन में फ्लाई करेंगे. वही सुखोई, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर ब्रह्मोस मिसाइल दागकर ऐसी तबाही मचाई थी कि दुश्मन घुटनों पर आ गया था. ठीक वैसे , जैसे पवन-पुत्र हनुमान ने अपनी शक्तियों से रावण की लंका को आग के हवाले किया था.
ऑपरेशन सिंदूर जरूर रूक गया है लेकिन वायुसेना ने अपनी तैयारियों को धार देना जारी रखा है. क्योंकि घात लगाए बैठा दुश्मन कब कोबरा के फन की तरह अपना सर उठाए, कोई नहीं जानता. काशी में सुखोई के साथ रफाल, मिग-29 और स्वदेशी फाइटर जेट एलसीए-तेजस, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में अपने-अपने दमखम से पूरी दुनिया को एक बार फिर रूबरू कराएंगे. क्योंकि मौका होगा विंग्स ओवर गंगा का, जो रविवार यानी 25 अक्टूबर को होने जा रहा है. लेकिन इस खास आयोजन की तैयारियां शुरु हो चुकी हैं.
हनुमान, महादेव, नटराज, रुद और विश्वनाथ जैसे फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे लड़ाकू विमान
विंग्स ओवर गंगा के दौरान, भारतीय वायुसेना का रफाल लड़ाकू विमान भी अपनी गर्जना मात्र से दुश्मन के कान फोड़ने के लिए तैयार रहेगा. हो भी क्यों ना, हाल में अमेरिका के फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट एफ-35 के साथ दोस्ताना मुकाबला करने के बाद ये लड़ाकू विमान हाल में जोधपुर से लौटे हैं. काशी में अगर सुखोई फाइटर जेट हनुमान फोर्मेशन में आसमान में उड़ान भरेंगे तो रफाल और तेजस भरेंगे महादेव और नटराज की फॉर्मेशन में.
काशी नगरी में भारतीय वायुसेना के सभी लड़ाकू विमान, मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, टोही विमान और हेलीकॉप्टर, भगवान शिव के नाम वाली फॉर्मेशन में फ्लाई करेंगे. ये फॉर्मेशन हैं, महादेव, नटराज, कैलाश, विश्वनाथ, त्रिदेव, हनुमान, वरुणा, ओंकार, भागीरथी, काशी और रूद.
94वें स्थापना वर्ष में 94 एयरक्राफ्ट लेंगे वाराणसी के एयर शो में हिस्सा
विंग्स ओवर गंगा आयोजन में भारतीय वायुसेना के जो 94 एयरक्राफ्ट शामिल हो रहे हैं उनमें 52 लड़ाकू विमान, 15 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, 32 हेलीकॉप्टर और 1 हेरिटेज एयरक्राफ्ट शामिल है. इसके अलावा भारतीय नौसेना के बेहद खास टोही विमान पी8आई, तमिलनाडु के अराकोनम से सीधे काशी पहुंचेंगे. भारतीय वायुसेना यानी थलसेना के हेलीकॉप्टर भी वायुसेना की ताकत में इजाफा करने के लिए भगवान शिव की नगरी पहुंचेंगे. भारतीय वायुसेना की स्थापना के 94वें वर्ष पूरे हो चुके हैं. इन 94 वर्षों में पहली बार 2019 में भारतीय वायुसेना को अपनी ताकत से दुनिया को रूबरू कराने का मौका मिला था.
पुलवामा हमले का बदला लेने के लिए वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयर-स्ट्राइक कर अपनी ताकत का लोहा मनवाया था. उस दौरान, भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 फाइटर जेट्स ने ग्वालियर एयरबेस से उड़ान भरी थी. खास बात है कि रविवार को भी विंग्स ओवर गंगा के दौरान, वायुसेना के अधिकतर एयरक्राफ्ट, ग्वालियर से उड़ान भरकर बनारस पहुंचेंगे.
भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना दिवस के मौके पर काशी में रफाल, सुखोई और एलसीए तेजस जैसे फाइटर जेट तो दिखाएगी पड़ेंगे, साथ में एक हेरिटेज एयरक्राफ्ट भी उड़ान भरेगा. वायुसेना ने रिटायर हो चुके इस विमान को रिफर्बिश कराकर एक बार एयर शो में शामिल किया है. इसके जरिए वायुसेना अपने उस इतिहास को याद करना चाहती है, जिसके जरिए इन विमानों ने देश की हवाई सुरक्षा की थी.
बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर ने वायुसेना को पहुंचाया शीर्ष पर
1962 की जंग में चीन के खिलाफ वायुसेना का इस्तेमाल ना करना भारत के लिए हमेशा मलाल रहा है. लेकिन आज की भारतीय वायुसेना, चीन हो या पाकिस्तान कहीं भी किसी भी समय कोई भी ऑपरेशन करने के लिए तैयार है. हालांकि, पाकिस्तान के खिलाफ 1965 और कारगिल युद्ध में भी वायुसेना का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन असली ऑपरेशन किया गया 2019 में, जब भारत के मिराज-2000 फाइटर जेट ने बालाकोट में आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के ट्रेनिंग कैंप को नेस्तनाबूत किया था.
वायुसेना की असली ताकत दिखाई दी थी ऑपरेशन बालाकोट के दौरान. उसके अगले वर्ष यानी 2020 में गलवान घाटी की झड़प के दौरान, भारतीय वायुसेना ने लद्दाख में अपनी फाइटर जेट की तैनाती कर चीन की घुसपैठ को रोकने में अहम भूमिका निभाई थी. इसके बाद 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, पाकिस्तान के बहावलपुर और मुरीदके में चल रहे जैश और लश्कर के टेरर हेडक्वार्टर को तबाह किया, तो पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर एयर स्ट्राइक की.
भारतीय वायुसेना को कारगिल के ऑपरेशन सफेद सागर से लेकर बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर तक अपने गौरवशाली इतिहास पर गर्व है तो भविष्य के युद्धों से लड़ने का संकल्प भी है, जो विंग्स ओवर गंगा के जरिए भारतीय वायुसेना प्रदर्शित करने जा रही है.


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