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मोदी मिले ओली से, हिंदू राष्ट्र को लेकर नेपाल में चल रहा आंदोलन

बैंकॉक में पीएम नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश के अंतरिम मुखिया मोहम्मद यूनुस के अलावा नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता की है. ये मुलाकात ऐसे वक्त में हो रही है, जब भारत के पड़ोसी देश नेपाल में राजशाही की वापसी और हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए जबरदस्त प्रदर्शन चल रहे हैं. इन प्रदर्शनों में भारत का नाम जबरन घसीटा गया है.

ओली सरकार का आरोप है कि राजशाही की मांग करने वाले लोगों को भारत का समर्थन प्राप्त है. इसके अलावा के पी ओली को भारत से दूरी और चीन से नजदीकी रास आती है.  नेपाल ने पिछले पांच साल से उत्तराखंड से सटी सीमा पर विवाद भारत से विवाद शुरू कर दिया है. कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख पास (दर्रे) को नेपाल ने अपने नक्शे में दिखाना शुरु कर दिया है. हाल ही में टीएफए  ने अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में बताया था कि कैसे नेपाल ने अपने स्कूलों की किताबों में उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के इन विवादित इलाकों को अपना बताना शुरु कर दिया है.

बैंकॉक में नेपाली पीएम और पीएम मोदी की मुलाकात

पीएम मोदी ने थाईलैंड में के पी ओली के साथ बातचीत को सार्थक बताया है. नेपाल के प्रधानमंत्री से मुलाकात करने के बाद पीएम मोदी ने एक्स पोस्ट में लिखा,  “बैंकॉक में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के साथ एक सार्थक बैठक हुई. भारत-नेपाल के साथ संबंधों को अत्यधिक प्राथमिकता देता हेै. हमने भारत-नेपाल मैत्री के विभिन्न पहलुओं विशेष रूप से ऊर्जा, कनेक्टिविटी, संस्कृति और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों पर चर्चा की. हमने इस वर्ष के बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के कुछ प्रमुख सकारात्मक परिणामों  विशेष रूप से आपदा प्रबंधन और समुद्री परिवहन के क्षेत्रों के बारे में भी बात की.”

पीएमओ की ओर से भी लिखा गया कि “नेपाल भारत की पड़ोसी प्रथम नीति के तहत उसका एक प्राथमिकता प्राप्त साझेदार है. यह बैठक दोनों देशों के बीच नियमित उच्च स्तरीय संवाद की परंपरा को जारी रखने की प्रतीक है.”

मुलाकात के बाद, ओली ने अपने एक्स अकाउंट पर पीएम मोदी को अपना ‘प्रिय मित्र’ कहकर संबोधन किया. (https://x.com/narendramodi/status/1908106293778256335)

ओली सरकार में भारत के साथ रिश्ते डगमगा रहे

भारत भले ही पड़ोसी फर्स्ट नीति के तहत नेपाल को प्राथमिकता देता है. फरवरी में बजट के दौरान भारत के विदेश मंत्रालय ने नेपाल को  700 करोड़ की ग्रांट दी है. बावजूद इसके ओली सरकार भारत के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाती है. काठमांडू की सड़कों पर आंदोलन में भारत का नाम बिना सबूत ओली सरकार ने घसीटा है. प्रधानमंत्री ओली ने दावा किया है कि भारत ने देश में राजशाही समर्थक आंदोलन को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई है. इसके अलावा भारत के साथ नेपाल ने क्षेत्रीय विवाद भी बढ़ाया है.

भारत के लिपुलेख को अपने नक्शे में दिखा कर नेपाल ने भारत को भड़काने का काम किया है. लेकिन ओली सरकार ये नहीं समझ पा रही है कि भारत से इतने करीबी संबंध होने के बावजूद,  भारत की अनदेखी और चीन के इशारों पर नाचना ही नेपाली जनता को एक आंख नहीं सुहा रहा है. यही वजह है कि नेपाली जनता, लोकतंत्र को हटाकर फिर से राजशाही और हिंदू राष्ट्र की मांग कर रहे है.

नेपाल ने आठवीं क्लास के पाठ्यक्रम में विवादित इलाकों को दिखाया अपने नक्शे में

नेपाल की लेफ्ट सरकारें अपनी देश के बच्चों को भारत के खिलाफ उकसाने का काम कर रही है. यही वजह है कि नेपाल के स्कूलों में आठवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में सोशल स्टडीज (सामाजिक अध्ययन) की किताब में पिथौरागढ़ जिले के इन इलाकों को ही अपने नक्शे में दिखा दिया है.

अगर विवादित कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा के पूरे क्षेत्रफल को देखें तो पाएंगे कि ये पिथौरागढ़ जिले का 370 वर्ग किलोमीटर का इलाका है. लिपुलेख पास से ही भारत से तिब्बत (चीन) में दाखिल होकर हिंदुओं के पवित्र स्थल कैलाश मानसरोवर का मार्ग जाता है.

चीन की शह पर हालांकि, नेपाल ने लिपुलेख पास और कालापानी इलाके को अपना बताना शुरू कर दिया है. जबकि हकीकत ये है कि कालापानी इलाके में रहने वाले लोग भारतीय मूल के हैं और भारत के चुनाव में वोट देते हैं और टैक्स तक देते हैं.

नेपाल ने कब और क्यों उठाया लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा का विवाद

नेपाल ने पहली बार कालापानी का विवाद उठाया वर्ष 2020 में. उस वक्त, गलवान घाटी की झड़प के बाद, भारत और चीन के बीच जबरदस्त तनातनी चल रही थी. इसी दौरान, चीन ने लिपूलेख से सटे इलाकों में पीएलए-आर्मी की एक बटालियन को तैनात कर नई चौकी (पोस्ट 69310) बनाई थी. साथ ही, उत्तराखंड से सटी एयर-स्पेस का की बार उल्लंघन किया था.

लिम्पियाधुरा के दूसरी तरफ चीन ने 150 लाइट कम्बाइंड आर्म्स ब्रिगेड को तैनात किया, तो तिब्बत के नगरी प्रिफेक्चर में 361 बॉर्डर डिफेंस रेजीमेंट का नया गैरिसन खड़ा कर दिया.

चीन की हरकतों को देखते हुए बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) ने आनन-फानन में पिथौरागढ़ से तवाघाट और घाटयाबगढ़ तक 80 किलोमीटर लंबी एक सड़क बनाई थी. बेहद दुर्गम इलाकों से गुजरती हुई ये सड़क 6000 फीट से शुरू होकर 17 हजार फीट से भी ज्यादा ऊंचाई तक जाती है. किसी भी विपरीत परिस्थिति में ये इलाका, भारत के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर सकता था.

इस सड़क के बनने के बाद चीन ने नेपाल के कान भर दिए. फिर क्या था, नेपाल ने चीन से मंगाए नए करेंसी नोट पर अपने देश का नया नक्शा छाप दिया, जिसमें विवादित कालापानी इत्यादि को अपना क्षेत्र दिखा दिया.

नए करेंसी नोट पर विवादित क्षेत्रों को अपना बताकर नेपाल ने अब अपने स्कूल के पाठ्यक्रम और एजुकेटर गाइड्स तक में पिथौरागढ़ जिले के इन विवादित इलाकों को अपना बता दिया है. (https://x.com/kpsharmaoli/status/1908106398551937534)

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