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सेना की छवि खराब करने की साजिश ?

चुनाव से जुड़ा सेना का एक पुराना वीडियो फिर से वायरल होने से हड़कंप मच गया है. वर्ष 2019 के वीडियो को हाल की वोटिंग से जोड़कर सेना को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. सेना ने एक बार फिर से सफाई पेश कर वीडियो को नजरअंदाज करने की सलाह दी है. 

चुनावी मौसम में सेना की छवि को खराब करने के इरादे से कुछ सोशल मीडिया हैंडल से एक वीडियो साझा किया गया. दो मिनट और 14 सेकेंड के इस वीडियो में सेना के दो ट्रक और कुछ सैनिक दिखाई पड़ रहे हैं. वीडियो में दो-तीन सिविलियन वर्दी-धारी सैनिक पर पोलिंग-बूथ पर जाकर फर्जी वोट डलवाने का आरोप लगा रहे हैं. आरोपों के बावजूद सैनिक कोई जवाब नहीं देता है और वहां से चला जाता है. वीडियो में आरोप लगाया गया है कि सैनिक एक विशेष राजनीतिक पार्टी के लिए वोट डलवा रहे थे. साथ ही यहां तक आरोप लगाया गया कि सेना के ट्रक में वोटरों को लेकर पोलिंग कराई जा रही है. 

इस वीडियो के बारे में भारतीय सेना ने मई 2019 में ही अपनी जांच की थी. जांच में पाया गया था कि खुद चुनाव आयोग ने जबलपुर (मध्य प्रदेश) स्थित ग्रेनेडियर्स रेजिमेंटल सेंटर में तैनात जवान और उनके परिवार के सदस्यों (कुल 1386 वोटर्स) के लिए वोट डलवाने का प्रबंध किया था. सेना के ट्रकों में सभी जवान और उनके परिवारवालों को ले जाया गया था. उसी दौरान कुछ राजनीतिक पार्टियों के एजेंट ने सैनिकों का वीडियो बनाना शुरु कर दिया और अनाप-शनाप आरोप लगाने लगे. 

साफ है कि ये वीडियो वर्ष 2019 का है. उस वक्त भी कुछ लोगों ने प्रोपेगेंडा कर भारतीय सेना की छवि पर दाग लगाने की कोशिश की थी. एक बार फिर दुर्भावनापूर्ण इरादे से वीडियो को सर्कुलेट किया जा रहा है ताकि भारतीय सेना की छवि को खराब किया जाए (https://x.com/neeraj_rajput/status/1123583168563433478).

भारतीय सेना के सूत्रों ने आग्रह किया है कि इस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर ना किया जाए. क्योंकि इसमें सेना की गलत छवि पेश की जा रही है. 

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