इजरायल की मदद से तैयार की गई मध्यम दूरी की जमीन से आसमान में मार करने वाली एमआरसैम मिसाइल, भारतीय सेना में तैनात होने के लिए तैयार हो गई है. इन मिसाइलों को सबसे पहले पूर्वी कमान और दक्षिण कमान में तैनात किया जा रहा है. दो दिन तक ओडिशा के तट पर सेना और डीआरडीओ ने मिलकर एमआरसैम मिसाइल के चार सफल परीक्षण किए हैं.
दो दिन चले मिसाइल के चार परीक्षण
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ओडिशा के एपीजे अब्दुल कलाम आईलैंड पर हुए परीक्षण में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) और भारतीय सेना ने गुरूवार और शुक्रवार को मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (एमआरसैम) ने हाई स्पीड एरियल टारगेट के खिलाफ चार ऑपरेशन्ल फ्लाइट ट्रायल किए.
इन ट्रायल को लॉन्ग रेंज, शॉर्ट रेंज, हाई ऑल्टिट्यूड और लो ऑल्टिट्यूड पर टारगेट को हिट करने के लिए परखा गया. चारों ही परीक्षण में एमआरसैम मिसाइल ने एकदम सटीक निशाना लगाया.
परीक्षण के दौरान सेना और डीआरडीओ के सीनियर अधिकारियों की मौजूदगी में किया गया. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, मिसाइल के साथ-साथ पूरे वेपन सिस्टम को भी इस दौरान टेस्ट किया गया. इसके लिए फ्लाइट डाटा को रडार और ऑप्टिकल ट्रेकिंग सिस्टम जैसे सैन्य उपकरणों से इकठ्ठा किया गया.
पूर्वी और दक्षिणी कमान में खड़ी की जाएंगी दो रेजिमेंट
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इन ट्रायल्स को सेना की पूर्वी और दक्षिणी कमान ने डीआरडीओ की गाइडेंस भी सफलतापूर्वक अंजाम दिया. इन ट्रायल के साथ ही दोनों कमान की ऑपरेशन्ल क्षमता सिद्ध हुई हैं और एमआरसैम की दो रेजिमेंट खड़ी करने का रास्ता खोल दिया है.
एमआरसैम को डीआरडीओ ने इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्री (आईएआई) के साथ मिलकर सेना के लिए तैयार किया है. एमआरसैम वेपन सिस्टम में मोबाइल लॉन्चर सिस्टम, कमांड पोस्ट के साथ ही मल्टी फंक्शन रडार शामिल हैं.
जनवरी में नौसेना के लिए भी रक्षा मंत्रालय ने किया था 2960 करोड़ की एमआरसैम मिसाइल का करार
इसी साल जनवरी के महीने में नौसेना के युद्धपोत को घातक बनाने के इरादे से रक्षा मंत्रालय ने भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) से मध्यम दूरी की जमीन से आसमान में मार करने वाली एमआरसैम मिसाइल के लिए 2960 करोड़ का सौदा किया था. नौसेना में शामिल होने वाले नए जंगी जहाज को इन मिसाइलों से लैस किया जाएगा.
हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने ये जानकारी नहीं दी थी कि बीडीएल से कितनी मिसाइलों का सौदा हुआ है लेकिन उसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया था कि इस वक्त नौसेना के 61 युद्धपोतों का निर्माण देश के अलग-अलग शिपयार्ड में चल रहा है.
नौसेना की एमआरसैम मिसाइल, बीडीएल ने की आईएआई के साथ मिलकर तैयार
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, मीडियम रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल बीडीएल से जो समझौता हुआ है वो बाय (इंडियन) कैटेगरी के तहत हुआ है. यानी बीडीएल, इन मिसाइलों को किसी विदेशी ओईएम (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर) से खरीद कर भारत में असेंबल कर नौसेना को सप्लाई कर सकता है.
हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने साफ किया कि इन मिसाइलों में स्वदेशी कंटेंट ज्यादा होगा. दरअसल, बीडीएल इन एलआरसैम (बराक-8) मिसाइलों को इजरायल की आईएआई कंपनी के साथ मिलकर तैयार करता है.
पिछले साल, भारतीय नौसेना ने आईएनएस विशाखापट्टनम युद्धपोत से एमआरसैम मिसाइल का सफल परीक्षण किया था.
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