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भारत के 04 जहाज पर हमला, अमेरिका पर क्यों उठी उंगलियां

ओमान की खाड़ी में भारतीय क्रू वाले जहाज पर आखिर क्यों हो रहे हैं एक के बाद एक अटैक. भारत का सामरिक पार्टनर माने जाने वाला अमेरिका आखिर क्यों कर रहा है भारतीय जहाज पर मिसाइल अटैक कि भारतीय नागरिकों की जा रही है. ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जंग में, पिछले चार दिनों में तीन भारतीय जहाजों को निशाना बनाया जाना महज इत्तेफाक है या कोई गहरी साजिश.

गुरूवार यानी 11 जून को ओमान की खाड़ी से आई एक बुरी खबर. खबर ये कि 9 जून को जिस एमटी स्टेबेलो जहाज पर अमेरिका ने मिसाइल अटैक किया था, उसके तीन क्रू मेंबर्स की मौत हो गई है. ये तीनों अमेरिकी नौसेना के हमले के बाद से लापता थे. इन हमले को लेकर भारत सरकार ने कड़ा रूख अपनाया है. भारत के विदेश मंत्रालय ने राजधानी दिल्ली स्थित यूएस एंबेसी के उच्च अधिकारियों को तलब कर घटना को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है. इस हमले में मारे जाने वाले तीन भारतीयों में से एक की पहचान हिमाचल प्रदेश के 23 साल के आदित्य शर्मा के तौर पर हुई जो एमटी स्टेबेलो जहाज में डेक-कैडेट के तौर पर कार्यरत थे. बाकी दो की पहचान इंजीनियर पी सुरेश और इंजन फिटर शिवनांद चौरसिया के तौर पर हुई.

शिपिंग एंड पोर्ट्स मंत्री सर्बानंद सोनवाल ने खुद तीनों भारतीयों के मौत की पुष्टि की और घटना पर दुख जताया. भारत ने अमेरिका से आपत्ति इसलिए दर्ज कराई है, क्योंकि यूएस सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने इस जहाज पर हमले की जिम्मेदारी लेते हुए ड्रोन फुटेज तक जारी की थी.

सोमवार यानी 8 जून को भी अमेरिका ने एक अन्य जहाज एमटी मैरीवेक्स पर हमला किया था. अमेरिका का दावा था कि पलाऊ देश के फ्लैग लगे इस जहाज पर प्रतिबंध लगा था. उसके बावजूद भी ये बिना अनुमति के ओमान के मासिरह पोर्ट पर ऑपरेशन कर रहा था. इस जहाज पर भी 24 भारतीय क्रू-मेंबर्स मौजूद थे और ओमान की कोस्टगार्ड के जरिए सभी को सुरक्षित बचाया गया था. इंडियन कोस्टगार्ड ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए ओमान की सरकार से जरूरी कॉर्डिनेशन किया था.

अभी पूरा देश एमटी स्टेबेलो की घटना से उबरा भी नहीं था कि गुरूवार को ओमान के शिनास पोर्ट के करीब एक और जहाज एमटी जलवीर पर हमले की खबर सामने आई. गुयाना के फ्लैग वाला ये जहाज महाराष्ट्र के डिगी पोर्ट से शिनास जा रहा था. इस पर भी भारतीय क्रू मौजूद था. हमले के बाद जहाज के कैप्टन ने एसओएस मैसेज जारी कर मदद की गुहार लगाई. मदद का वीडियो भी सामने आया, जिसमें जहाज के कैप्टन ने सभी क्रू मेंबर्स के सुरक्षित होने की पुष्टि की.

जानकारी के मुताबिक, हमले के बाद इस जहाज के इंजन रूम में आग लगी थी. समंदर में धुआं निकलते जहाज का वीडियो भी सामने आया. हालांकि, ये साफ नहीं है कि हमला ईरान ने किया या अमेरिका ने. क्योंकि ओमान की खाड़ी में यूएस नेवी की एक बड़ी तैनाती है और यहां से गुजरने वाले सभी जहाजों के लिए ब्लॉकेड यानी नाकेबंदी लगा रखी है.ऐसे में यहां से गुजरने वाले जहाजों को यूएस नेवी से परमिशन लेनी पड़ती है. पिछले महीने ईरान ने भी होर्मुज स्ट्रेट के साथ साथ ओमान की खाड़ी को अपना निगरानी क्षेत्र घोषित कर एक नया नक्शा जारी किया था. ईरान ने होर्मुज और और यहां से गुजरने वाले जहाज को IRGC से परमिशन लेना जरुरी बताया था.

इस बीच केरल के कोच्चि पोर्ट पर यूएई के फुजैराह बंदरगाह से एक ऐसा ऑयल टैंकर पहुंचा है, जिसमें एक मिसाइल फंसी थी. भारतीय नौसेना के मुताबिक, एमटी ओलंपिक लाइफ नाम का ये जहाज 26 मई को फुजैराह से कोच्चि के लिए निकला था. लेकिन ओमान की खाड़ी में इस पर एक मिसाइल से हमला कर दिया गया. मिसाइल फटने के बजाए जहाज के हल (बाहरी हिस्से) में जाकर फंस गई. इसी स्थिति में जहाज ने कोच्चि तक का सफर तय किया. कोच्चि पहुंचकर भारतीय नौसेना के बम डिस्पोल स्कॉवयड (बीडीएस) ने जहाज में मिसाइल के वॉरहेड (बारूद वाला हिस्सा) सुरक्षित अलग किया.

ये हमले ऐसे समय में हुए हैं, जब अगले हफ्ते यानी 16 और 17 जून को दुनिया के विकसित देशों के समूह जी-7 का शिखर सम्मेलन फ्रांस में होने जा रहा है. इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी खास गेस्ट के तौर पर हिस्सा लेने जा रहे हैं. इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शिरकत करेंगे. लेकिन दोनों की सम्मेलन से इतर मुलाकात को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. अगर मुलाकात होती है तो, ऑपरेशन सिंदूर के बाद मोदी और ट्रंप की ये पहली मुलाकात होगी. ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारत और अमेरिका के संबंधों में जबरदस्त तल्खी आ गई थी. इसी के चलते भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है. ट्रंप के दोस्त और दुनिया के सबसे अमीर बिजनेसमैन एलन मस्क के स्टारलिंक की मंजूरी भी अधर में अटकी हुई है. यहां तक की स्वदेशी लाइट कॉम्बेट हेलीकॉप्टर एलसीए तेजस के मार्क-1ए वर्जन के लिए एफ-404 एविएशन इंजन की सप्लाई भी अमेरिका से बेहद धीमे गति से हो रही है, जिसके चलते पूरा एलसीए प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है.

पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के भारत दौरे से भी दोनों देशों के संबंध पूरी तरह से पटरी पर नहीं आ पाए हैं. ऐसे में भारतीय जहाजों पर अमेरिकी अटैक ने दोनों देशों के संबंधों में आई दरार को बढ़ाने का काम किया है.

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