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चीन संबंधों में बॉर्डर बेहद अहम, अरुणाचल प्रदेश में टकराव की रिपोर्ट्स के बीच भारत की दो टूक

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के जल्द भारत दौरे और अरुणाचल प्रदेश से सटी एलएसी से भारत और चीन के सैनिकों के बीच टकराव की रिपोर्ट्स के बीच, भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ तौर से कहा कि बॉर्डर की स्थिति, दोनों देशों के बीच संबंधों में बेहद अहम है. ऐसे में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएएसी) पर ‘शांति’ बनाए रखना बेहद जरूरी है. 

मंगलवार को विदेश मंत्रालय की आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक सवाल के जवाब में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ये जवाब दिया. मीडिया ने अरुणाचल प्रदेश से सटी एलएसी पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच फेस-ऑफ की घटनाओं पर सवाल पूछा था. लेकिन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया लेकिन गलवान घाटी की झड़प के बाद से भारत के पक्ष को एक बार फिर दोहराया.

माना जा रहा है कि जुलाई के आखिरी सप्ताह में अरुणाचल प्रदेश के अपर-सुबानसुरी जिले से सटी एलएसी पर दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ गए थे. फेस-ऑफ के दौरान, दोनों देशों के सैनिकों ने बैनर-ड्रिल भी की थी. हालांकि, कुछ दिनों बाद, टकराव की स्थिति खत्म हो गई थी. 

गलवान घाटी की झड़प के बाद पहली बार भारत-चीन सैनिकों में टकराव की स्थिति

अगर अरुणाचल प्रदेश में वाकई कोई फेस-ऑफ हुआ है तो, गलवान घाटी (जून 2020) के बाद, दोनों देशों की सेनाओं के बीच में टकराव की पहली घटना मानी जाएगी. गलवान घाटी की झड़प के बाद से चीनी सेना की तरफ से पूरी 3488 किलोमीटर लंबी एलएसी पर किसी भी तरह की घुसपैठ या फिर टकराव की घटना सामने नहीं आई थी. ऐसे में हाल में, भारत और चीन की सीमा पर तीनों (03) ट्रेड-पोस्ट को द्विपक्षीय व्यापार के लिए खोल दी गई थी.

अगले महीने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत दौरा

अगले महीने यानी 12-13 सितंबर को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए भारत का दौरा होने जा रहा है. ऐसे में एलएसी पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच टकराव की स्थिति, द्विपक्षीय संबंधों पर असर डाल सकती है. हालांकि, इस महीने के आखिर में मध्य एशियाई देश किर्गिस्तान में होने जा रही एससीओ समिट में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात संभव है.

सोशल मीडिया पर आई तस्वीरों और वीडियो को सरकार ने दिया फर्जी करार

हाल में सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जिनमें अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों की घुसपैठ के आरोप लगाए गए थे. लेकिन सोमवार को पीआईबी-फैक्ट चेक ने ऐसी सभी तस्वीरों और वीडियो को फर्जी करार दिया. फैक्ट-चेक ने लिखा कि “जनसामान्य को भ्रमित करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर मणिपुर, थाईलैंड और भारत-बांग्लादेश के पुरानी वीडियो क्लिप्स को भारत-चीन सीमा क्षेत्र का वीडियो बताकर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है. ऐसे में कृपया सतर्क रहिए. सनसनी फैलाने वाले ऐसे कंटेंट के झांसे में न आएं.”

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा की पोस्ट पर लगी रोक

सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा की एक पोस्ट को भारत में दिखने पर रोक लगा दी थी. इस पोस्ट के साथ पवन खेड़ा ने अरुणाचल प्रदेश के एक युवक का वीडियो साझा किया था, जिसने आरोप लगाया था कि चीनी सेना कई जगह भारत की सीमा में घुस गई है और वो दिन दूर नहीं जब पूरा अरुणाचल प्रदेश, चीन के कब्जे में होगा. 

फैक्ट चेक के मुताबिक, “प्रामाणिक जानकारी हेतु केंद्र सरकार के आधिकारिक स्रोतों पर ही विश्वास कीजिए.  किसी भी संदिग्ध तस्वीर, वीडियो अथवा संदेश को पीआईबी-फैक्टचेक को भेजिए. वास्तविक जानकारी हम आपको उपलब्ध कराएंगे.”

विदेश मंत्रालय ने चीनी नक्शे पर जताया ऐतराज. कहा, अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग

मंगलवार को विदेश मंत्रालय ने हालांकि, अरुणाचल प्रदेश के स्थानों का चीनी नाम वाला कैलेंडर जारी करने पर कड़ा ऐतराज जताया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ तौर से कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का “अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है  .”

रणधीर जायसवाल ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है. उन्होंने कहा कि “इस फैक्ट को किसी प्रूफ की जरूरत नहीं है और कोई भी कदम इसे बदल नहीं सकता. भारत-चीन बॉर्डर पर पीस और स्टेबिलिटी बनाए रखना भारत की प्रायोरिटी है.”

दरअसल, हाल में चीन ने अरुणाचल प्रदेश का एक नया नक्शा जारी किया था, जिसमें राज्य की कई जगहों के चीनी नाम दिए गए थे.  वर्ष 2017 से चीन, अरुणाचल प्रदेश के इस तरह के नक्शे जारी कर रहा है. 

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