दुनिया की सबसे खतरनाक सड़कों में शुमार, जोजिला दर्रे को इस साल बीआरओ ने रिकॉर्ड 32 दिनों के भीतर ही खोल दिया है. मंगलवार को बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन ने कश्मीर से लद्दाख जाने वाले काफिले को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.
करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर जोजिला पास (दर्रा), जम्मू कश्मीर को लद्दाख से जोड़ने का एक मात्र मार्ग है. सर्दियों के मौसम में यहां जबरदस्त बर्फबारी होती है और कई हफ्तों तक आवाजाही बंद रहती है. आम नागरिकों के साथ-साथ सेना के लिए भी ये बेहद महत्वपूर्ण सड़क है, जो कश्मीर के सोनमर्ग को द्रास, कारगिल, सियाचिन और लेह-लद्दाख से जोड़ती है.
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस साल वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण 27 फरवरी से 16 मार्च यानी 17 दिनों तक लगातार बर्फबारी के कारण दर्रे को असामान्य रूप से बंद कर दिया गया था. यहां जमी हुई बर्फ की विशाल मात्रा एक विकट चुनौती बन गई थी, लेकिन बीआरओ ने, शून्य से नीचे के तापमान, तेज हवाओं और हिमस्खलन-बहुल इलाकों और विषम परिस्थितियों में काम करते हुए 17 मार्च से 31 मार्च के बीच रिकॉर्ड 15 दिनों में बर्फ को साफ कर दिया.
कुछ दशक पहले तक ये रास्ता छह-छह महीने तक बंद रहता था. लेकिन तकनीकी प्रगति, बेहतर बर्फ-निकासी तकनीकों और बीआरओ के अथक प्रयासों के कारण अब यह अवधि महज कुछ हफ्ते रह गई है.
अस्थायी बंद होने से न केवल सैनिकों और आवश्यक आपूर्ति की आवाजाही प्रभावित होती है, बल्कि लद्दाख में स्थानीय आबादी का दैनिक जीवन भी बाधित होता है, जो व्यापार, चिकित्सा सहायता और आर्थिक गतिविधियों के लिए इस मार्ग पर निर्भर है.
जोजिला दर्रे को फिर से खोलना बीआरओ के समर्पण का प्रमाण है, जिसके पास सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस दर्रे पर संपर्क की समय पर बहाली सुनिश्चित करने के लिए कश्मीर में प्रोजेक्ट बीकन और लद्दाख में प्रोजेक्ट विजयक है.