कनाडा से भारत बुलाए गए उच्चायुक्त संजय वर्मा के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने भी कनाडा समेत पश्चिमी देशों को खरी-खरी सुनाई है. एस जयशंकर ने बेबाकी से पश्चिमी देशों के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए कहा है कि नए भारत को पश्चिमी देश पचा नहीं पा रहे हैं.
पीएम मोदी के नेतृत्व में मजबूत भारत को कई देश स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. पर ये हकीकत है कि पूरी दुनिया में बहुत कम ऐसे नेता हैं जो रूस के बाद यूक्रेन का दौरा कर सकें और पुतिन हों चाहे जेलेंस्की हों अपनी बातें खुलकर सामने रख सकें.
सोमवार को जयशंकर राजधानी दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे.
दुनिया में नए पावर बैलेंस को नहीं पचा पा रहे पश्चिमी देश: एस जयशंकर
पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल के दौरान एस जयशंकर ने विदेश मंत्रालय की कमान संभाली थी. सुषमा स्वराज की विरासत को संभालते हुए एस जयशंकर की कूटनीति के आगे बड़े-बड़े देश झुक गए. ऐसे में खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या में कनाडा के झूठे आरोपों के बाद ट्रूडो का क्या हाल हुआ ये सबके सामने है.
कनाडा पर एस जयशंकर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है, “कनाडा का मुद्दा एक सामान्य पश्चिमी मुद्दा है. उसका दोहरा चरित्र है. दुनिया के समीकरण बदल रहे हैं. दुनिया में नया पावर बैलेंस हो रहा है. ऐसे में पश्चिम के देश इसे पचा नहीं पा रहे. कनाडा उसमें शामिल है. हालांकि, सभी पश्चिमी देश एक जैसे नहीं हैं.”
नए भारत से तालमेल नहीं बिठा पा रहा कनाडा: एस जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “मैं US या यूरोप जाता हूं, तो वहां के देश भारत के साथ काम करने को अहमियत देते हैं. ये बातें कनाडा में सुनने को नहीं मिलती. 1945 के बाद वर्ल्ड का सिस्टम बहुत पश्चिमी था. 1990 के दशक के बाद यह बहुत पश्चिम था. लेकिन पिछले 20 सालों में चीजें बदली हैं. वर्ल्ड का बैलेंस बदला है. कई गैर-पश्चिमी देश बहुत प्रभावशाली रहे हैं. गैर-पश्चिम और पश्चिम के बीच समीकरण बदल रहा है. लिहाजा इसे पचाना और समायोजित करना आसान नहीं है. कनाडा के साथ यही दिक्कत है.”
कनाडा मे धमकी को कहते हैं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: एस जयशंकर
विदेश मंत्री ने कनाडा पर वार करते हुए कहा, “देखिए भारत में क्या होता है. कनाडा के राजनयिकों को हमारी सेना, पुलिस, लोगों की प्रोफाइलिंग, कनाडा में रोके जाने वाले लोगों को टारगेट करने के बारे में जानकारी इकट्ठा करने में कोई समस्या नहीं है. इसलिए जाहिर है, वे खुद को जो लाइसेंस देते हैं, वह कनाडा में राजनयिकों पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों से बिल्कुल अलग है. जब हम उन्हें बताते हैं कि आपके पास भारत के नेताओं, भारत के राजनयिकों को खुलेआम धमकी देने वाले लोग हैं. उनका जवाब होता है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता.”