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चीन की भूटान से बढ़ी तनातनी, डोकलाम में पैट्रोलिंग पर किया ऐतराज

करीब आठ साल पहले डोकलाम में मुंह की खाने के बाद चीन ने एक बार फिर भारत और भूटान के ट्राई-जंक्शन पर विवाद खड़ा करना शुरू कर दिया है. इस बार सीधे भारत से भिड़ने के बजाए, चीन की पीएलए सेना, भूटान की रॉयल आर्मी से टकराव की स्थिति में है. टीएफए को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, डोकलाम के करीब अमो-छू नदी के किनारे भूटान के सैनिकों की पैट्रोलिंग पर चीन की पीएलए आर्मी कड़ा एतराज जता रही है.  

खास बात ये है कि चीन की पीएलए सेना के रॉयल भूटान आर्मी से विवाद की जानकारी दिल्ली तक पहुंच गई है, जिसे लेकर सुरक्षा-तंत्र बेहद सतर्क है.

अमो छू नदी के पूर्वी तट पर रॉयल भूटान आर्मी की पैट्रोलिंग पर जताई आपत्ति

जानकारी के मुताबिक, फरवरी के महीने में पश्चिमी भूटान की अमो छू (तिब्बत में छू यानी नदी) के पूर्वी किनारे पर रॉयल भूटान आर्मी (आरबीए) के सैनिक पैट्रोलिंग कर रही थी. इसे लेकर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने ऐतराज जताया. खबर है कि पीएलए आर्मी ने नदी के किनारे गश्त करने को लेकर आरबीए के स्थानीय कमांडर से फ्लैग मीटिंग की है.

मीटिंग के दौरान भूटान आर्मी के कमांडर ने चीन की पीएलए आर्मी को दो टूक कह दिया कि चीनी सैनिक अमो छू नदी को पार कर पूर्वी तट पर न आए, इसलिए पैट्रोलिंग की जा रही है.

डोकलाम से गुजरती है अमो छू नदी

चीन की चुंबी वैली से निकलने वाली तोरसा नदी ही भूटान में अमो-छू कहलाती है. डोकलाम पहुंचकर तोरसा नदी, दो हिस्सों में बंट जाती है. एक तोरसा नाले के तौर पर डोकलाम से दक्षिण की तरफ जामफेरी रिज चला जाता है, और दूसरा पूर्व में भूटान में अमो-छू के तौर पर बंट जाती है. (https://x.com/neeraj_rajput/status/1185079927923712000)

वर्ष 2017 में डोकलाम में हुआ था भारत और चीन की सेनाओं के बीच फेस-ऑफ

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 में डोकलाम विवाद के दौरान, चीन की पीएलए आर्मी, तोरसा नाले को पार कर जामफेरी रिज तक सड़क बनाने की फिराक में थी. जामफेरी रिज से भारत का सिलीगुड़ी कॉरिडोर डायरेक्ट लाइन ऑफ फायर में है. यही वजह है कि भारतीय सेना ने चीनी सेना को सड़क बनाने से रोक दिया था. इसके चलते ही दोनों देशों की सेनाओं में 72 दिनों तक फेस-ऑफ (तनातनी) रही थी.

डोकलाम विवाद में भारतीय सेना के अड़ जाने के बाद, चीन की सेना ने सड़क बनाने का काम तो रोक दिया था लेकिन उस सड़क का रुख अमो-छू यानी भूटान की तरफ कर दिया था. ऐसे में भूटान भी चीन के इरादों को भांप चुका है और अमो छू नदीं के पूर्वी तट पर तैनाती बढ़ा दी है. लेकिन चीन को इससे भी आपत्ति है.

चीन ने डोकलाम से सटे इलाकों में अपने मिलिट्री विलेज भी स्थापित किए हैं. इन गांवों को हालांकि, पूर्व-सैनिकों के पुनर्वास के लिए स्थापित किया गया है लेकिन युद्ध के समय इन गांवों को सैनिकों के बैरक में बदला जा सकता है. इन मिलिट्री विलेज को लेकर भी भारत और भूटान बेहद सतर्क हैं.

चीन और भूटान के बीच है 477 किलोमीटर लंबा बॉर्डर, दो जगह है विवाद

चीन का भारत और भूटान, दोनों से ही लंबा सीमा विवाद रहा है. चीन और भूटान के बीच करीब 500 किलोमीटर लंबा बॉर्डर है. इनमें से दो ऐसे इलाकों को लेकर चीन और भूटान के बीच विवाद है. इसे लेकर दोनों देशों ने हाल के सालों में राजनयिक स्तर पर वार्ता भी शुरू की है.

भारत से भूटान के नजदीकी संबंध, चीन को एक आंख नहीं सुहाते हैं. ऐसे में डोकलाम में भूटान पर दादागिरी जमाने की कोशिश कर रहा है चीन.

स्थानीय चरवाहों को तिब्बत के बजाए ‘चीनी’ कहकर संबोधित करने पर दिया जोर

टीएफए को ये भी जानकारी मिली है कि चीन ने भूटान द्वारा स्थानीय चरवाहों को तिब्बती कहकर बुलाने पर ऐतराज किया है. इसी महीने चीन के एक स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी ने ज़िना-त्सो इलाके में भूटान के अधिकारियों के साथ बैठक की थी. इस मीटिंग में चीन के प्रशासनिक अधिकारी ने स्थानीय चरवाहों को तिब्बती न बुलाकर चीनी चरवाहे कहकर संबोधित कहने पर जोर दिया है. जबकि हकीकत ये है कि सदियों से तिब्बत और भूटान के बीच में व्यापार रहा है.

भूटान के हा शहर में है भारतीय सेना का इमट्राट सेंटर

भूटान की रॉयल आर्मी ने चीन की आपत्तियों को लेकर भारतीय सेना से कोई जानकारी साझा की है या नहीं, इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है. लेकिन 2017 के बाद से ही भारतीय सेना की एक पूरी ब्रिगेड डोकलाम में तैनात रहती है ताकि चीन के किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके.

साथ ही भूटान के हा शहर में भारतीय सेना की एक प्रशिक्षण टुकड़ी तैनात रहती है जिसे इंडियन मिलिट्री ट्रेनिंग टीम (आईएमटीआरएटी) यानी इमट्राट के नाम से जाना जाता है. ये टुकड़ी, भूटान आर्मी को सैन्य प्रशिक्षण देती है. (https://x.com/adgpi/status/1716408224360890682)

चीन की पीएलए आर्मी, 18 लाख सैनिकों के साथ जहां दुनिया की सबसे बड़ी फौज है, रॉयल भूटान आर्मी में महज 40 हजार सैनिक हैं.

इसी महीने भूटान के पीएम ने की थी मोदी से मुलाकात

इसी महीने की 23 तारीख को भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे नई दिल्ली के दौरे पर आए थे. हालांकि, वे यहां एक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने आए थे लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात जरूर की थी. मुलाकात के बाद विदेश मंत्रालय ने दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और उत्कृष्ट मित्रता को लेकर आधिकारिक बयान जारी किया था.




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