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मेलोनी पर डबल अटैक, ईरान भी पड़ा पीछे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी की तकरार का मुद्दा अभी शांत भी नहीं हुआ था कि ईरान ने इटली पर गंभीर आरोप लगा दिए हैं. ईरान का कहना है कि अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियान में इटली ने तकनीकी और लॉजिस्टिक सहायता दी है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने एक के बाद एक कई गंभीर आरोप लगाए.

वहीं ईरान के सारे आरोपों को इटली ने खारिज कर दिया है. इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की और साफ किया कि इटली ने कभी किसी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लिया है और न ही अपने बेस का इस्तेमाल करने की इजाजत दी है.

लेकिन ईरान अपने आरोपों को टिका हुआ है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि इटली ने अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन किया है.

ईरान-इटली में वार-पलटवार, युद्ध में मदद का आरोप
इटली ने दावा किया था कि उसने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका की कभी मदद नहीं की, लेकिन उसने ‘तकनीकी और लॉजिस्टिकल’ सहायता प्रदान की थी. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी एक पोस्ट में इटली पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

इस्माइल बघाई ने आरोप लगाते हुए कहा, “इटली का बयान विरोधाभासी और जिम्मेदारी से बचने की कोशिश है. हमलावर देशों को तकनीकी और लॉजिस्टिक सहायता देना एक अवैध युद्ध में सीधी भागीदारी के बराबर है. यह केवल सहयोग नहीं, बल्कि एक स्पष्ट और प्रत्यक्ष योगदान है, जिसने अमेरिका और इजरायल के युद्ध को संभव बनाया. यह अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है.”

अमेरिका-इजरायल की सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लिया: इटली  

इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की और साफ किया कि इटली ने कभी किसी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लिया है.

एक्स पर एक पोस्ट में एंटोनियो ताजानी ने कहा, “मैंने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से बात की. इटली ने कभी किसी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लिया है और न ही ईरान के खिलाफ युद्ध के लिए अपने बेस का इस्तेमाल करने की इजाज़त दी है. हमने अमेरिका के साथ हुई संधियों का पूरी तरह से पालन किया है.”

“मैंने अब्बास अराघची से होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से खोलने की अपील की, ताकि अटके हुए सभी इटैलियन कार्गो जहाज गुजर सकें. तेहरान में इटली के दूतावास का फिर से खुलना बातचीत का एक मजबूत संकेत है, साथ ही इससे आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध भी फिर से शुरू हो सकेंगे.”

इटली, स्पेन, ब्रिटेन, फ्रांस का रवैया बेहद खराब: अमेरिका

इटली और ईरान के बीच विवाद ने कूटनीतिक विवाद गहरा दिया है. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो देशों से नाराजगी जाहिर की थी. ट्रंप का आरोप है कि यूरोप ने ईरान के खिलाफ युद्ध में कोई मदद नहीं की. इटली और स्पेन का रवैया तो बेहद खराब रहा था. इसे लेकर ट्रंप और इटली की पीएम मेलोनी के बीच बहस भी हुई थी. ट्रंप का आरोप है कि इटली ने अमेरिकी सैनिकों को अपना बेस इस्तेमाल नहीं करने दिया तो वहीं मेलोनी ने कहा था कि जब तक वो पीएम हैं, इटली जबरन किसी युद्ध में नहीं कूदेगा और न ही नियमों को तोड़ेगा.

ऐसे में इटली पर दोतरफा मार पड़ी है. मदद नहीं करने पर अमेरिका सुना रहा है तो ईरान आरोप लगा रहा है कि इटली ने तकनीकी मदद पहुंचाना युद्ध में हिस्सा लेना ही है.

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