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होर्मुज का हल निकालेगा फ्रांस, यूरोपीय देश आए साथ

मिडिल ईस्ट के युद्ध का असर पूरी दुनिया में दिखने लगा है. लगातार हो रहे हमलों के बाद यूरोप गैस-तेल की किल्लत से जूझने लगा है, क्योंकि होर्मुज की खाड़ी में सैकड़ों जहाज फंसे हुए हैं. ईरान ने होर्मुज को पूरी तरह से बाधित कर दिया है तो अमेरिका-इजरायल के चक्कर में यूरोप के जहाज भी हमले की मार झेल रहे हैं. ऐसे में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने सहयोगी देशों ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड से बात की है और फौरन होर्मुज का हल निकालने पर चर्चा की है.

अपने संयुक्त बयान में यूरोप के प्रमुख देशों और जापान ने होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित मार्ग निकालने के लिए उचित प्रयासों में शामिल होने पर सहमति जताई है. इन यूरोपीय देशों ने कहा कि वे ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के लिए कदम उठाएंगे.

इस संयुक्त बयान से पहले ही फ्रेंच प्रेसिडेंट मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बात की थी. और अस्थिरता को संवाद के माध्यम से सुलझाने पर जोर दिया था.

होर्मुज स्ट्रेट को रोकने की कोशिश न करे ईरान, देशों को संयुक्त बयान

ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और जापान ने संयुक्त बयान जारी किया है. सभी ने ईरान की तरफ से किए गए हमलों की निंदा की. इन देशों ने ईरान को तुरंत हमलों को रोकने को कहा है. ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के कार्यालय की तरफ से जारी किए गए एक संयुक्त बयान में नेताओं ने कहा. कि “हम ईरान से आह्वान करते हैं कि वह अपनी धमकियों, बारूदी सुरंगें बिछाने, ड्रोन और मिसाइल हमलों तथा कॉमर्शियल जहाज के लिए स्ट्रेट को रोकने के दूसरे कोशिशों को न करें.”

देशों ने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग में इस तरह का दखल और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है. ईरान के साथ होने वाले इस युद्ध को लगभग तीन हफ्ते होने वाले हैं. यह स्ट्रेट असल में बंद ही है. इस युद्ध की वजह से तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी हमले किए हैं, जिसमें 23 कमर्शियल जहाजों पर हमले की खबरें आई हैं. इनमें 10 टैंकर भी शामिल हैं. नेविगेशन की स्वतंत्रता अंतरराष्ट्रीय कानून का एक बुनियादी सिद्धांत है. ईरान की कार्रवाइयों का असर दुनिया के सभी हिस्सों के लोगों पर पड़ेगा, खासकर उन लोगों पर जो सबसे ज्यादा कमजोर हैं.”

पूरी तरह से खोला जाए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज: मैक्रों

हाल ही में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से बात की थी. ईरान से अपील करते हुए मैक्रों ने कहा, “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री आवागमन की स्वतंत्रता को तुरंत बहाल किया जाना चाहिए. यह स्ट्रेट वैश्विक तेल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है, और यहां किसी भी बाधा से दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है. फ्रांस क्षेत्रीय स्थिरता चाहता है.”

मैक्रों ने ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान को सलाह दी है कि “नए राजनीतिक ढांचे को ये ध्यान देना होगा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न करे, साथ ही उसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों से पैदा हुए खतरों का समाधान भी करना होगा.”

मिडिल ईस्ट में हालात बेहद खराब, गैस-तेल रिफाइनरियां जल रहीं

मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर हैं. रिहायशी इलाकों के अलावा अब ईरान को आर्थिक तौर पर चोट पहुंचाने के लिए गैस और तेल रिफाइनरियों को टारगेट किया जा रहा है. वहीं बदला लेने के लिए ईरान भी अपने पड़ोसी देश कतर के तेल स्त्रोतों पर मिसाइल अटैक कर रहा है. इसका नुकसान दुनिया को झेलना पड़ रहा है. वहीं होर्मुज की खाड़ी में दुनियाभर के जहाज फंसे हुए हैं. इस युद्ध की आंच यूरोप तक पहुंच चुकी है. इराक के इरबिल में फ्रांस के सैन्य बेस पर अटैक किया जा चुका है, जिसके बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईरानी राष्ट्रपति से युद्ध को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की मांग की थी.

ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए नाटो से मांगी है मदद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए नाटो देशों से मदद मांगी है. ट्रंप चाहते हैं कि फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी जैसे देश अमेरिका का साथ देते हुए होर्मुज में सैन्य कार्रवाई के लिए आगे आएं. लेकिन यूरोपीय देशों ने बातचीत के माध्यम सैन्य संघर्ष रोकना चाहते हैं. नाटो देशों ने ट्रंप की अपील को ठुकराते हुए कहा था कि वो संवाद के माध्यम से होर्मुज स्ट्रेट खोलना चाहते हैं.

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