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ईरान की तरफदारी पड़ी महंगी, अमेरिकी अफसर पर देशद्रोह की जांच

अमेरिका के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट के चीफ के पद से इस्तीफा देने के बाद जोसेफ केंट एक के बाद एक कई सनसनीखेज खुलासे कर रहे हैं. बुधवार को अमेरिका के इस काबिल अफसर ने कहा कि ईरान से अमेरिका को कोई खतरा नहीं था, तो इस्तीफे के बाद एक और दावा करते हुए केंट ने कहा है कि तेहरान परमाणु हथियार बनाने के कहीं भी करीब नहीं था.

एक के बाद एक खुलासों के बाद अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अमेरिका को जबरन युद्ध में धकेलने का आरोप लगा रहा है तो जोसेफ केंट का रास्ता भी आसान नहीं दिख रहा.

ट्रंप प्रशासन ने काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट के चीफ रहे जोसेफ केंट के खिलाफ जांच बैठा दी है. जोसेफ पर खुफिया जानकारी लीक करने का आरोप है. इसे अमेरिका में देशद्रोह माना गया है. जांच के बाद जोए को गिरफ्तार भी किया जा सकता है.  केंट के खिलाफ एफबीआई की जांच शुरु कर दी गई है.

जोसेफ केंट के सनसनीखेज दावों पर व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने पलटवार किया है. लेविट ने कहा, अमेरिकी राष्ट्रपति पूरी तरह से देश के हितों को ध्यान में रखकर काम करते हैं और वो किसी दूसरे देश के नियंत्रण में नहीं हैं.

परमाणु हथियार नहीं बना रहा था ईरान, हमारे पास नहीं थी कोई खुफिया जानकारी : जोसेफ केंट

ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बीच अमेरिका के एक पावरफुल अधिकारी के इस्तीफे ने सबको हैरान कर दिया है. अब तक अमेरिका के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट को संभाल रहे जोसेफ केंट ने इस्तीफा देने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पोल खोलनी शुरु कर दी है. अपने इस्तीफे को लेकर तो केंट ने लिखा ही था कि ईरान से अमेरिका को कोई खतरा नहीं था. अब पॉडकास्टर टकर कार्लसन के साथ अपने इंटरव्यू में जोसेफ केंट ने दावा किया है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब बिलकुल नहीं था.

जबकि ट्रंप और उनके प्रशासन के कई शीर्ष अधिकारियों ने दावा किया है कि 28 फरवरी को ईरान पर हमला करना इसलिए जरूरी था क्योंकि तेहरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका के लिए खतरा था. खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने से सिर्फ 2 हफ्ते दूर था.

जोसेफ केंट ने कहा, कि साल 2004 से ही ईरान के इस्लामी शासन में एक आदेश लागू है, जो उन्हें परमाणु हथियार बनाने से रोकता है. हमारे पास ऐसी कोई खुफिया जानकारी नहीं थी जिससे यह संकेत मिलता कि उस आदेश का उल्लंघन किया जा रहा है.” 

अयातुल्ला खामेनेई को अपनी मौत को कोई डर नहीं था, अमेरिका को कोई फायदा नहीं हुआ: केंट

केंट ने यहां तक कह दिया है कि “ईरान के ताकतवर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई को मारने के बाद भी कोई लक्ष्य हासिल नहीं हुआ है. अमेरिका को इसका कोई फायदा नहीं हुआ.”

जोसेफ केंट ने बताया, “मुझे नहीं लगता कि अयातुल्ला को मरने का कोई डर था, ऐसा इसलिए नहीं कि वह कोई पागल या सनकी इंसान थे, बल्कि इसलिए कि वह जानते थे कि अगर उन्हें मार भी दिया गया, तो भी उनका शासन बचा रहेगा.” 

तय था कि इजरायल हमला शुरु करेगा, अमेरिका प्रतिक्रिया देगा: केंट

जोसेफ केंट ने कहा, “इस कार्रवाई को करने का फैसला इजरायल ने लिया था और हम जानते थे कि इससे घटनाओं की एक पूरी श्रृंखला शुरू हो जाएगी, जिसका मतलब था कि ईरानी इसका बदला लेंगे. इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को बढ़ावा मिला था कि वो जंग शुरू कर सकते हैं और अमेरिका को बस प्रतिक्रिया देनी होगी.”

केंट ने कहा, “इस युद्ध में कूदने का कोई मतलब नहीं था. इसका कोई फायदा भी नहीं. सिर्फ अस्थिरता बढ़ रही.”

जोसेफ केंट पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार, खुफिया सूचनाएं लीक करने का आरोप

ट्रंप प्रशासन की पोल खोलने वाले अफसर जोसेफ केंट के खिलाफ एफबीआई ने जांच शुरु की है. ट्रंप प्रशासन की सिफारिश पर जोसेफ (जोए) के खिलाफ जांच की जा रही है. जोए पर आरोप है कि उन्होंने जंग के बीच खुफिया जानकारी लीक कर दी,  जिसे अमेरिकी सुरक्षा के दृष्टिकोण से काफी अहम माना जा रहा था. अमेरिका में खुफिया जानकारी को लीक करना एक गंभीर अपराध माना जाता है. अगर आरोपी दोषी साबित हो जाता है तो उसे 10-20 साल की सजा या फिर गंभीर मामलों में आजीवन कारावास तक की सजा सुनाई जा सकती है.

ट्रंप दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान, किसी के दबाव में नहीं: व्हाइट हाउस

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने जोसेफ केंट के उस बयान को गलत बताया है, जिसमें केंट ने कहा था कि इजरायल के दबाव में ईरान पर कार्रवाई की गई. लेविट ने कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी दूसरे देश के इशारे पर काम नहीं करते. ट्रंप दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के नेता हैं और वे केवल अमेरिका के हित को ध्यान में रखकर ही फैसले लेते हैं.”

लेविट ने कहा कि “राष्ट्रपति ने जो केंट को देश की सेवा करने का मौका दिया था, लेकिन उन्होंने झूठ से भरे एक लेटर के साथ इस्तीफा दे दिया. ट्रंप दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के सेना के प्रमुख हैं और उन्हें कोई नहीं बताता कि क्या करना है. जो व्यक्ति ईरान को आतंकवाद का समर्थक नहीं मानता, वह आतंकवाद विरोधी विभाग का प्रमुख नहीं हो सकता.”

लेविट ने दावा किया कि “अमेरिकी खुफिया जानकारी के अनुसार, ईरान अमेरिकी सैनिकों और ठिकानों पर हमला करने की योजना बना रहा था, इसलिए ट्रंप ने अपनी सेना और संपत्ति की सुरक्षा के लिए ईरान पर हमले का फैसला लिया.”

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