फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे से पहले रफाल लड़ाकू विमान की महाडील से पेरिस गदगद है. सिर्फ मैक्रों सरकार ही नहीं बल्कि फ्रांस के विपक्ष ने भी 114 रफाल (राफेल) विमानों की खरीद की सराहना की है.
फ्रांस की प्रमुख विपक्षी नेता और मैक्रों की कट्टर विरोधी मरीन ले पेन ने भारत के साथ हुई इस डील पर खुशी जताई है और नई दिल्ली-पेरिस के मजबूत संबंधों की तारीफ की है.
आपको बता दें कि भारत की रक्षा अधिग्रहण समिति ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 रफाल फाइटर जेट लेने की जरूरत को मंजूरी दे दी है. खास बात ये है कि अधिकतर विमानों को भारत में ही बनाया जाएगा.
मरीन ले पेन ने जताई भारत संग रफाल डील पर खुशी
ऐसा बहुत कम देखा जाता है कि जब किसी देश का मुख्य विपक्षी नेता अपनी सरकार की तारीफ करे. लेकिन फ्रांस में अक्सर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को घेरने वाली मुख्य विपक्षी नेता मरीन ले पेन ने भारत संग रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए खुशी जताई है.
मरीन ले पेन ने भारत के साथ 114 रफाल डील को हरी झंडी दिए जाने के बाद एक्स पर लिखा, “भारत सरकार ने हाल ही में 114 राफेल विमानों की खरीद को मंजूरी दी है, जिससे डसॉल्ट के सबसे अधिक बिकने वाले निर्यात उत्पाद के रूप में राफेल की स्थिति की पुष्टि होती है. यह अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में फ्रांसीसी रक्षा उद्योग की उत्कृष्टता का एक और प्रमाण है. भू-राजनीतिक स्तर पर, यह भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक द्विपक्षीय साझेदारी के महत्व को रेखांकित करने वाला एक सशक्त संकेत भी है. प्रत्येक देश की संप्रभुता और हितों का सम्मान करने वाले ये विश्वास के बंधन वैश्विक स्थिरता के लिए एक मजबूत आधार हैं हम आने वाले वर्षों में इन्हें और मजबूत करने के लिए काम करेंगे!”
मैक्रों के नई दिल्ली दौरे से पहले 114 रफाल खरीद को हरी झंडी
अगले सप्ताह 17-19 फरवरी के बीच फ्रेंच प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों का भारत दौरा है. इस दौरे से पहले रक्षा मंत्रालय ने एक बड़ी डील को मंजूरी दी है. रक्षा मंत्रालय भारतीय वायुसेना के लिए 114 मेक इन इंडिया रफाल लड़ाकू विमानों को बनाने की मंजूरी दे दी. भारत में बनने वाले फ्रांसीसी लड़ाकू विमानों के इस सौदे की कुल कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ बताई जा रही है, जो दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी डिफेंस डील में से एक हो सकती है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) की अहम बैठक में सीडीएस और वायुसेना प्रमुख सहित रक्षा सचिव भी मौजूद रहे. बैठक में डीएसी, इस डील मंजूरी दी गई.
डीएसी के बाद ये प्रोजेक्ट (प्रस्ताव) वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) के पास जाएगा. ऐसे में बहुत संभव है कि इन 114 रफाल फाइटर जेट में से 16 को सीधे फ्रांस से खरीदा जा सकता है. इन 114 रफाल फाइटर जेट से वायुसेना की 5-6 स्क्वाड्रन को खड़ा किया जा सकता है. भारतीय वायुसेना की एक स्क्वाड्रन में 18-20 लड़ाकू विमान होते हैं.
माना जा रहा है कि मैक्रों के भारत दौरे के दौरान इस सौदे को लेकर अहम घोषणा हो सकती है. पिछले दोनों रफाल फाइटर जेट सौदों की तरह ये भी जीटूजी यानी गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट डील होने जा रही है.
वर्ष 2016 में भारत ने फ्रांस से सीधे 36 रफाल लड़ाकू विमान खरीदने का फैसला किया था, उसकी कुल कीमत करीब 59 हजार करोड़ थी. पिछले वर्ष अप्रैल में भारत ने नौसेना के लिए रफाल लड़ाकू विमानों के मरीन वर्जन यानी रफाल (एम) खरीदने को लेकर करार किया था. इन रफाल (एम) लड़ाकू विमानों को स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाएगा.
जीटूजी डील के तहत बनेंगे 114 रफाल लड़ाकू विमान
भारतीय वायुसेना ने घटती स्क्वाड्रन के मद्देनजर 114 रफाल (राफेल) फाइटर जेट देश में बनाने का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को सौंपा था. पिछली रफाल डील की तरह ये सौदा भी जीटूजी यानी गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट करार करेगा. करार होने के बाद रफाल बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी दासो (दसॉल्ट), भारत में किसी स्वदेशी कंपनी के साथ देश (भारत में) ही एक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाएगी. भारत में बनने वाले स्वदेशी रफाल फाइटर जेट में करीब 60 प्रतिशत स्वदेशी हथियार और उपकरण लगे होंगे.
ऑपरेशन सिंदूर में रफाल फाइटर जेट्स ने दिखाया कमाल
पहलगाम नरसंहार का बदला लेने के लिए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान से ऑपरेट करने वाले आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद के हेडक्वार्टर को तबाह करने के लिए भारतीय वायुसेना ने रफाल फाइटर जेट का इस्तेमाल किया था.
जिन 36 रफाल फाइटर जेट को फिलहाल भारतीय वायुसेना इस्तेमाल करती है, उन्हें मिटयोर, मीका और स्कैल्प मिसाइलों से लैस किया गया है. ये सभी फ्रांसीसी मिसाइल है. लेकिन मेक इन इंडिया रफाल फाइटर जेट को भारत में बनी मिसाइलों से भी लैस किया जा सकता है.
इसी वर्ष अप्रैल के महीने में ही भारत ने नौसेना के लिए फ्रांस के साथ रफाल के 26 मरीन वर्जन का सौदा भी किया था, जिसकी कीमत करीब 63 हजार करोड़ थी. इन रफाल (एम) विमानों को नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत पर तैनात करने के लिए खरीदा जा रहा है.
डीएसी ने रफाल फाइटर जेट के लिए 400 स्कैल्प मिसाइल खरीदने को भी मंजूरी दी. इन्हीं स्कैल्प मिसाइल से भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में पल रहे आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा को ध्वस्त किया था. यूरोप की एमबीडीए कंपनी इन स्कैल्प मिसाइल का उत्पादन करती है. करीब 1300 किलो वजन की ये एक डीप स्ट्राइक (हवा से जमीन पर मार करने वाली) क्रूज मिसाइल है, जिसे रफाल से लॉन्च किया जाता है.

