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प्रगतिशील बांग्लादेश के साथ भारत, PM मोदी ने दी तारिक रहमान को बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की बंपर जीत के लिए चेयरमैन तारिक रहमान को बधाई दी है. तारिक रहमान पूर्व दिवंगत पीएम खालिदा जिया के बेटे हैं और चुनाव से पहले तकरीबन 17 साल का वनवास खत्म करके ढाका लौटे थे. 

साल 2024 अगस्त में प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से बांग्लादेश की सत्ता अंतरिम मुखिया मोहम्मद यूनुस के हाथ में थी. लेकिन अब चुनाव में बीएनपी को छप्परफाड़ सीट मिली है, वहीं बांग्लादेश के कट्टरपंथी जमात को लोगों ने खारिज कर दिया है.

तारिक रहमान के हाथों बांग्लादेश के आने के बाद भारत संग रिश्तों में सुधार देखा जा सकता है. क्योंकि भले ही बीएनपी की करीबी पाकिस्तान से हो, लेकिन बीएनपी ने कभी भी भारत विरोधी बयान न देकर पाकिस्तान-भारत के बीच संतुलन बैठाने की कोशिश की है.

पीएम मोदी ने दी बधाई, कहा, भारत-बांग्लादेश विकास के साझा लक्ष्य पर साथ बढ़ेंगे

पीएम मोदी ने तारिक रहमान को बधाई देते हुए एक्स पर लिखा, “मैं श्री तारिक रहमान को बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में बीएनपी को निर्णायक जीत दिलाने के लिए अपनी हार्दिक बधाई देता हूं. यह जीत बांग्लादेश के लोगों द्वारा आपके नेतृत्व में रखे गए गहन विश्वास को दर्शाती है.”

“भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में निरंतर खड़ा रहेगा. मैं आपके साथ मिलकर हमारी बहुआयामी संबंधों को मजबूत करने और हमारे साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए काम करने का इंतजार कर रहा हूं.”

नई सरकार के साथ द्विपक्षीय संबंधों को प्राथमिकता देगा भारत

भारत हमेशा से पड़ोसी प्रथम की नीति को प्राथमिकता देता रहा है. बांग्लादेश और भारत के संबंध में अतीत में बेहद मजबूत रहे हैं, लेकिन पिछले डेढ़ वर्षों में जब से ढाका की कमान अतंरिम सरकार के हाथ आई तो कट्टरपंथियों ने भारत के खिलाफ अनाप-शनाप बोलना और करना शुरु कर दिया था, जिसके बाद भारत ने भी सख्ती दिखाई थी.

लेकिन अब बांग्लादेश में दिवंगत खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान को बहुमत मिला है, लिहाजा भारत के कूटनीतिक नजरिए से ये सत्ता परिवर्तन अहम हो जाता है.

दरअसल साल 2024 में जब शेख हसीना को ढाका से जान बचाकर भागना पड़ा था. जिसके बाद से बांग्लादेश में जमात जैसी कट्टरपंथी पार्टी पूरी तैयारी में थी  कि वो इस चुनाव में बाजी मार ले और बांग्लादेश में अपनी सरकार बना ले. 

लेकिन ट्विस्ट ये आ गया कि जमात-ए-इस्लामी को टक्कर देने के लिए खालिदा जिया के बेटे तारिक वापस आ गए. 

जमात-ए-इस्लामी अगर सत्ता में आती तो भारत में क्षेत्रीय असुरक्षा बढ़ जाती. ऐसे में भारत के लिए जमात से बेहतर विकल्प बीएनपी का ही था. पहले भारत और बीएनपी के रिश्ते अच्छे नहीं थे, लेकिन हाल के वर्षों में बीएनपी के भारत विरोधी तेवर में कमी आई है. हाल के दिनों में बीएनपी के किसी नेता चाहे वो तारिक हों या फिर कोई और, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या फिर भारत के विरोध में ऐसा कुछ नहीं कहा है. उल्टा बीएनपी ने यूनुस सरकार के नीतियों पर जरूर चोट की है.

बीएनपी ये जानती है कि भारत विरोध करके बांग्लादेश की सत्ता में टिके रहना मुश्किल है. ऐसे में में बीएनपी ये दिखाने की कोशिश में है कि वो तटस्थ है. भारत-पाकिस्तान के देशों से न्यूट्रल रिश्ते बनाने में विश्वास रखता है.

वहीं जिस वक्त खालिदा जिया गंभीर हालत में भर्ती थीं तो भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका हाल चाल पूछकर और मदद की पेशकश करके हर किसी को चौंका दिया था. ये कदम भारत- बीएनपी के साथ रिश्ते सही करने की कोशिश का था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबके सामने खालिदा जिया के स्वास्थ्य की चिंता जताई थी और हर मदद देने का आश्वासन दिया था. वहीं बीएनपी ने भी प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी को दिल से शुक्रिया कहा था और भारत का आभार जताया था. 

तारिक रहमान से मिले थे एस जयशंकर, खालिदा जिया के निधन पर जताया था शोक

पिछले साल दिसंबर के महीने में बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी चीफ बेगम खालिदा जिया के निधन पर शोक जताने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर ढाका पहुंचे थे. एस जयशंकर ने खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान से मुलाकात करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शोक संदेश दिया. 

जयशंकर ने बांग्लादेश के लोगों को इस दुख की घड़ी में भारत की संवेदनाएं पहुंचाईं और खालिदा जिया के लोकतंत्र में योगदान को याद किया.

एस जयशंकर का ढाका पहुंचना कूटनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा था क्योंकि शेख हसीना के सत्ता परिवर्तन और बांग्लादेश के साथ तल्खी के बीच ये भारत की ओर ये पहला उच्चस्तरीय दौरा था. जिसे संबंधों के सुधार के तौर पर भी देखा गया था.

17 साल बाद तारिक ने की थी वापसी, ढाका ने पहनाया ताज

शेख हसीना के कार्यकाल के वक्त तारिक पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे. साल 2007 में उन्हें जेल भी जाना पड़ा था. तारिक तकरीबन 18 महीने जेल में रहे थे. जेल से बाहर आने के बाद और दोबारा गिरफ्तारी से बचने के लिए साल 2008 में लंदन चले गए थे. करीब 17 सालों से तारिक लंदन में ही अपने परिवार के साथ रह रहे थे. इस बीच पिछले साल दिसंबर के महीने में खालिदा जिया की जब तबीयत नाजुक थी तो 25 दिसंबर को बांग्लादेश पहुंचे थे. उसी वक्त से माना जा रहा था कि इस बाद बांग्लादेश में तारिक पीएम बनेंगे. वहीं चुनाव में बांग्लादेश की जनता ने पूरी तरह से तारिक पर भरोसा जताया है.

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