दो साल के इंतजार के बाद आखिरकार अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस ने स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस के मार्क-1ए वर्जन के लिए पहले एविएशन इंजन (एफ 404-आईएन 20) की डिलीवरी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को कर दी है. खुद जीई कंपनी ने इस बात की घोषणा की है.
एचएएल ने वर्ष 2021 में जीई कंपनी से 99 एफ-404 इंजन का करार किया था. इस सौदे की कीमत 5375 करोड़ थी. 2023 से कंपनी को इंजन की सप्लाई करनी थी. लेकिन रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास युद्ध के चलते ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित होने और फिर खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कोशिश की साजिश के चलते भारत-अमेरिका संबंधों में आई खटास के चलते, इंजन की सप्लाई में देरी हो गई थी.
ट्रंप प्रशासन के आने से एविएशन इंजन की सप्लाई में आई तेजी
जनवरी के महीने में अमेरिकी प्रशासन में आए बदलाव और डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से, भारत और अमेरिका के संबंध एक बार फिर पटरी पर आते दिखाई पड़ रहे हैं. ऐसे में ट्रंप के कमान संभालने के महज दो महीने के भीतर ही जीई कंपनी ने जी-404 इंजन की सप्लाई शुरू कर दी है.
माना जा रहा है कि जीई कंपनी, हर साल 11 इंजन की सप्लाई करने के लिए तैयार है. ऐसे में एचएएल, इस साल (2025) के आखिर तक भारतीय वायुसेना को एलसीए-मार्क-1ए फाइटर जेट की सप्लाई शुरु कर सकता है.
जीई कंपनी हालांकि, वर्ष 2004 से ही एलसीए तेजस फाइटर जेट के लिए एफ-404 इंजन की सप्लाई कर रही है, लेकिन मार्क-1ए के लिए इंजन (एफ 404-आईएन 20) बेहद उन्नत किस्म का है.
मार्क-1ए है एलसीए तेजस से एडवांस एयरक्राफ्ट
कंपनी के मुताबिक, एफ 404-आईएन 20 का थ्रस्ट सबसे ज्यादा और इसमें सिंगल-क्रिस्टल टरबाइन ब्लेड और हायर-फ्लो फैन है. इस इंजन के साथ लड़ाकू विमान ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी मैक 1.1 की रफ्तार से उड़ान भर सकता है.
एविएशन इंजन की सप्लाई में हो रही देरी से मार्क-1ए की डिलीवरी न होने के चलते वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने अपनी नाराजगी सार्वजनिक तौर से जाहिर की थी.
वायुसेना के लिए 83 एलसीए मार्क-1ए का सौदा
वर्ष 2021 में रक्षा मंत्रालय ने एचएएल से 83 एलसीए मार्क-1ए लड़ाकू विमानों का सौदा किया था. इस सौदे की कुल कीमत 48 हजार करोड़ थी. इनमें से 10 मार्क 1ए ट्रेनर एयरक्राफ्ट हैं. एचएएल का दावा था कि 2027-28 तक वायुसेना को सभी मार्क 1ए एयरक्राफ्ट मिल जाएंगे.
मार्क 1ए फाइटर जेट, एलसीए तेजस से उन्नत किस्म का है. बीवीआर यानी बियोंड विजुअल रेंज मिसाइल, एयर टू एयर रिफ्यूलिंग, आइसा रडार, इलेक्ट्रोनिक वारफेयर सूट सहित अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम के चलते मार्क-1ए, एलसीए तेजस से ज्यादा घातक है.
पहली स्क्वाड्रन होगी नाल में तैनात
पाकिस्तान सीमा से सटे राजस्थान के नाल एयरबेस (बीकानेर) पर मार्क 1ए की पहली स्क्वाड्रन तैनात की जाएगी जिसे कोबरा के नाम से जाना जाएगा. शुरुआत में मार्क 1ए की तीन स्क्वाड्रन को खड़ा किया जाएगा. ये तीनों ही स्क्वाड्रन वेस्टर्न बॉर्डर यानी पाकिस्तानी से सटी सीमा के फॉरवर्ड लोकेशन एयरबेस पर तैनात की जाएगी. माना जा रहा है कि दूसरी स्क्वाड्रन गुजरात के कच्छ में नलिया एयर बेस पर तैनात की जाएगी.
वायुसेना के पास एलसीए तेजस (मार्क-1) की फिलहाल दो स्क्वाड्रन हैं जो तमिलनाडु के सुलूर एयरबेस पर तैनात रहती हैं. वायुसेना की एक स्क्वाड्रन में 16-18 लड़ाकू विमान होते हैं और दो ट्रेनर एयरक्राफ्ट होते हैं.
एलसीए की समय से डिलीवरी के लिए एचएएल ने नासिक और बेंगलुरु में दो अतिरिक्त फैसिलिटी शुरू की हैं ताकि हर साल 16 तेजस फाइटर जेट का निर्माण किया जा सके. लेकिन आने वाले सालों में ये संख्या बढ़ सकती है.