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हिंद महासागर की सुरक्षा होगी सुदृढ़, IFC में बढ़ेगी इंटरनेशनल ऑफिसर्स की तैनाती

हिंद महासागर की सुरक्षा के लिए जल्द ही चार देशों की नौसेना के अधिकारी भारत में तैनात किए जाएंगे. इन चार देशों में जर्मनी, इंडोनेशिया और कीनिया के इंटरनेशनल लाइजनिंग ऑफिसर (आईएलओ) शामिल हैं, जिन्हें भारतीय नौसेना के इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर (आईएफसी) में तैनात किया जाएगा.

जर्मनी, इंडोनेशिया और केन्या सहित चार देशों के लाइजनिंग ऑफिसर होंगे गुरुग्राम में तैनात

भारतीय नौसेना के उच्चपदस्थ सूत्रों ने टीएफए को बताया कि इस वक्त गुरूग्राम स्थित आईएफसी-इंडियन ओसियन रीजन में 14 मित्र-देशों के आईएलओ तैनात हैं. जल्द ही जर्मनी, इंडोनेशिया और कीनिया सहित चार अन्य देशों की भागीदारी भी इस सेंटर में होने जा रही है. ऐसे में कुल 18 देशों के नेवल ऑफिसर आईएफसी-आईओआर में हर समय मौजूद रहेंगे.

फिलहाल, जिन 14 देशों के आईएलओ आईएफसी में तैनात हैं, उनमें ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, फ्रांस, इटली, जापान, मालदीव, मॉरीशस, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड, इंग्लैंड (यूके) और यूएसए (अमेरिका) शामिल हैं.

हाल के दिनों में भारत का समुद्री-सहयोग, जर्मनी, इंडोनेशिया और कीनिया से काफी बढ़ गया है. भारतीय नौसेना की छह स्टेल्थ पनडुब्बी (एआईपी) से जुड़े प्रोजेक्ट 75 (आई) के लिए जर्मनी की थाइसेनक्रुप कंपनी मुख्य दावेदार के तौर पर उभर कर सामने आई है. साथ ही जर्मनी, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी में है.

इंडोनेशियाई नौसेना भी भारतीय नौसेना के साथ साझा युद्धाभ्यास के अलावा ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है. जनवरी के महीने में इंडोनेशियाई नौसेना के प्रमुख ने खुद आईएफसी सेंटर का दौरा किया था. अगले महीने (13-18 अप्रैल) से जिस ऐकेमी एक्सरसाइज को भारतीय नौसेना, 10 अफ्रीकी देशों के साथ आयोजित करने जा रही है, उसमें केन्या भी शामिल है.

नौसेना के वॉर-रूम की तरह काम करता है आईएफसी-आईओआर

नौसेना का आईएफसी सेंटर, वॉर-रूम की तरह इस्तेमाल किया जाता है. यहां से पूरे हिंद महासागर पर नजर रखी जाती है. इसके लिए भारतीय नौसेना के सभी जंगी जहाज, पनडुब्बियां और समुद्री-तटों पर स्थित रडार स्टेशन जुड़े हुए हैं. साथ ही सैटेलाइट कम्युनिकेशन से भी आईएफसी को जोड़ा गया है.

आईएफसी का ध्येय है सेफ्टी और सिक्योरिटी के लिए साझेदारी. ऐसे में हिंद महासागर में होने वाली पायरेसी, हाईजैकिंग, स्मगलिंग, गैरकानूनी फिशिंग और मानव तस्करी जैसे समुद्री-अपराध पर नकेल कसने के लिए आईएफसी, मित्र-देशों की नौसेनाओं के साथ सहयोग करती है.

इसके लिए एफआईसी दो दर्जन से ज्यादा देशों की नौसेनाओं के साथ सहयोग करती है. साथ ही संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की मैरीटाइम एजेंसियों के साथ-साथ करीब 50 अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भारतीय नौसेना के इस आईएफसी के साथ 24X7 जुड़ी रहती है.

सोमालियाई समुद्री-दस्यु के खिलाफ एंटी पायरेसी ऑपरेशन में निभाई आईएफसी ने अहम भूमिका

ऐसे में जैसे ही हिंद महासागर क्षेत्र में किसी भी बोट या जहाज से एसओएस कॉल मिलती है, भारतीय नौसेना के सबसे करीबी युद्धपोत और नेवल स्टेशन को अलर्ट जारी कर दिया जाता है. पिछले साल अरब सागर में सोमालियाई समुद्री-दस्यु की कई वारदातों को आईएफसी की निगरानी और सहयोग के जरिए ही विफल की गई थी.