पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी पर डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही गुरुवार को दीपावली के मौके पर भारत और चीन के सैनिक मिठाइयों का आदान-प्रदान करने जा रहे हैं. फील्ड कमांडर्स की मीटिंग के बाद डेप्सांग (डेप्संग) प्लेन और डेमचोक में जल्द पैट्रोलिंग भी शुरू होने जा रही है.
भारतीय सेना के विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, डेप्सांग प्लेन और डेमचोक में 23 अक्टूबर से शुरू हुई डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है. डिसएंगेजमेंट पूरा होने के बाद अब दोनों देशों की सेनाएं वेरिफिकेशन कर रही हैं. यानी इस बात की तस्दीक की जा रही है कि क्या वाकई दोनों देशों की सेनाएं समझौते के तहत पीछे हट गई हैं और कितना पीछे हटी हैं.
वेरिफिकेशन प्रक्रिया में फील्ड कमांडर्स खुद जाकर तस्दीक कर रहे हैं और साथ ही ड्रोन के जरिए भी आसमान से सुनिश्चित किया जा रहा है कि सेनाएं पीछे हट गए हैं.
सूत्रों के मुताबिक, वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद डेप्सांग प्लेन और डेमचोक में दोनों देशों के सैनिक पैट्रोलिंग शुरू कर देंगे, जो पिछले कई सालों से बंद पड़ी है.
पैट्रोलिंग की रूपरेखा के लिए दोनों देशों की सेनाओं के फील्ड कमांडर्स (ब्रिगेडियर और उससे निचले स्तर के सैन्य अफसर) फ्लैग-मीटिंग कर रहे हैं. ऐसे में माना जा सकता है कि अगले हफ्ते तक पैट्रोलिंग शुरू हो जाएगी.
इसी महीने की 21 तारीख को भारत और चीन के बीच डिसएंगेजमेंट करार हुआ था. समझौते के तहत दोनों देशों की सेनाएं वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए पीछे हटने के लिए तैयार हो गई थी.
डिसएंगेजमेंट करार के बाद ही रूस के कजान में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्विपक्षीय मुलाकात के लिए तैयार हुए थे.
दरअसल, अप्रैल 2020 के दौरान जब पूरी दुनिया कोरोना की महामारी से जूझ रही थी, चीन की पीएलए सेना ने गुपचुप तरीके से युद्धाभ्यास के नाम पर पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी पर बड़ी संख्या में सैनिकों का जमावड़ा कर लिया था. ऐसे में भारत ने भी रातो-रात 50 हजार सैनिक, टैंक, तोप, मिलिट्री व्हीकल, फाइटर जेट और मिसाइलों का बेड़ा तैनात कर दिया था.
अप्रैल 2020 से ही दोनों देशों के 50-50 हजार सैनिक एलएसी पर ‘आई बॉल टू आई बॉल’ मौजूद है और जबरदस्त तनाव बना हुआ है. जून 2020 में गलवान घाटी की झड़प के बाद हालात युद्ध जैसे बन गए थे.
साढ़े चार साल बाद हुए डिसएंगेजमेंट करार के चलते दोनों देशों के सैनिक अपनी अपनी पोजिशन से पीछे हट जाएंगे ताकि तनाव को कम किया जा सके. (मोदी Xi की पांच साल बाद मुलाकात, वैश्विक शांति में मिलेगी मदद)