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आर्मी चीफ जापान रवाना, एशियन-NATO विवाद खत्म होगा

‘एशियन-नाटो’ बनाने को लेकर मचे घमासान के बीच थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी चार दिवसीय जापान यात्रा पर जा रहे हैं. हाल ही में भारत ने जापान के नाटो की तर्ज पर एशिया में मिलिट्री-एलायंस को खारिज किया था तो जापानी मीडिया ने भारत की कूटनीति को ‘मिसगाइडेड’ करार दे दिया था. यही वजह है कि लाओस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी समकक्ष से खास मुलाकात की थी.

भारतीय सेना के मुताबिक, जनरल द्विवेदी जापान की यात्रा पर निकल चुके हैं. सेना के मुताबिक, इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के बीच आपसी संबंध मजबूत होंगे और रक्षा सहयोग बढ़ाने के साथ ही आपसी हितों को लेकर विचारों का आदान-प्रदान होगा.

इसी हफ्ते लाओस में एशिया समिट के इतर प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के नव-निर्वाचित पीएम इशिबा शिगेरु से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की थी.

पीएम मोदी ने इशिबा से सार्थक मुलाकात के बाद अपने एक्स अकाउंट पर जानकारी देते हुए लिखा कि हमारे बातचीत में इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और डिफेंस सहित कई क्षेत्रों में सहयोग पर बात हुई.

पीएम मोदी ने जापान के साथ स्पेशल स्ट्रेटेजिक और ग्लोबल पार्टनरशिप पर भी जोर दिया.

दरअसल, प्रधानमंत्री बनने से पहले इशिबा ने अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देशों (यूरोप) के मिलिट्री-एलायंस की तर्ज पर एशियाई-नाटो बनाने की हिमायती की थी. लेकिन भारत सहित कई एशियाई देशों ने जापान के इस प्रस्ताव को ठुकरा चुके हैं.

एशियन नाटो के प्रस्ताव को खारिज करने के बाद जापान की मीडिया ने भारत की कूटनीति पर कटाक्ष किया था. जापानी मीडिया के मुताबिक, ‘मिसगाइडेड डिप्लोमेसी’ के चलते आज दक्षिण एशिया में भारत का ‘कोई मित्र’ नहीं है.

जापानी मीडिया की ये टिप्पणी ऐसे समय में आई थी जब जापान की नौसेना इनदिनों विशाखापट्टनम में भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाओं के साथ साझा युद्धाभ्यास, ‘मालाबार-2024’ (8-18 अक्टूबर) कर रही थी.  

पीएम मोदी से इशिबा के मुलाकात के बाद जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि “सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बात हुई.” इशिबा ने जापान के दौरे के लिए भी आमंत्रित किया.

भारत और जापान के प्रधानमंत्रियों ने “अंतरराष्ट्रीय समुदाय में शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया.”

दरअसल, जापान का अपने पड़ोसी देश चीन और उत्तर कोरिया से पुराना विवाद चल रहा है. दूसरी तरफ रूस भी चीन के साथ मिलकर जापान के समंदर में साझा युद्धाभ्यास करता रहता है.

चीन, रूस और उत्तर कोरिया की उकसावे की कार्रवाई से परेशान जापान ने अमेरिका को अपने देश में पूरी एक कमांड स्थापित करने की मंजूरी दे दी है. साथ ही नए प्रधानमंत्री इशिबा चाहते हैं कि अमेरिका के न्यूक्लियर हथियारों का संचालन भी जापान के हाथ में हो.

इसी महीने रूस के कजान में ब्रिक्स देशों की अहम बैठक होने जा रही है (22-24 अक्टूबर). प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी इस शिखर सम्मेलन में शिरकत करने जा रहे हैं.

ऐसे में माना जा रहा है कि जापान, भारत से खिन्न है और जापानी मीडिया ने भारत की कूटनीति के बारे में ऊलजलूल खबर छाप दी.

हालांकि, जापान मीडिया ये भूल गया है कि हाल ही में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु ने दिल्ली का दौरा कर अपने सभी गिले-शिकवे दूर कर लिए हैं.

साथ ही बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के चीफ मोहम्मद यूनुस ने भी भारत से संबंधों को लेकर गुहार लगाई है. अगस्त के महीने में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट और हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को लेकर दोनों देशों के संबंधों में तकरार जरूर आई थी.

चिर-परिचित दुश्मन पाकिस्तान और चीन को छोड़कर भारत के पड़ोसी देश भूटान, श्रीलंका और नेपाल से मजबूत संबंध हैं.

पाकिस्तान से संबंध खराब होने के बावजूद विदेश मंत्री जयशंकर अगले हफ्ते पाकिस्तान में होने जा रही एससीओ समिट (15-16 अक्टूबर) में हिस्सा लेने इस्लामाबाद जा रहे हैं. साथ ही कजान में पीएम मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर सकते हैं.

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