पूर्वी लद्दाख में चीन से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के करीब से एक बेहद ही चौंकाने वाली खबर सामने आई है. खबर ये कि आईटीबीपी ने पूर्वी लद्दाख के नर्बुला टॉप से 108 किलो सोना जब्त किया है. इस मामले में आईटीबीपी ने दो संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के साथ जांच शुरु कर दी है. लेकिन अभी तक ये साफ नहीं है कि इन 108 सोने की बिस्किट का मकसद तस्करी है या कुछ और.
इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) ने अपने एक्स अकाउंट पर जब्त किए गए सोने के बिस्किट के बारे में बताया कि “लद्दाख में एक लंबी दूरी की पेट्रोलिंग के दौरान नर्बुला टॉप के पास 108 किग्रा सोना जब्त किया। दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया और अन्य एजेंसियों के साथ आगे की जांच जारी है.” जानकारी के मुताबिक, आईटीबीपी की 21 बटालियन ने डिप्टी कमांडेंट दीपक भट्ट के नेतृत्व में पूर्वी लद्दाख में हेनले के करीह सिरीगैपले इलाके से ये खेप जब्त की.
ये सोने की बिस्कुट खाड़ी देशों में बनी हैं क्योंकि उन पर गल्फ गोल्ड रिफाइनरी लिखा है. इतनी बड़ी मात्रा में सोने की बरामदगी से आईटीबीपी और सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं. क्योंकि पिछले एक दशक से भी ज्यादा से पूर्वी लद्दाख में इतनी बड़ी सोने की बरामदी नहीं हुई है.
पिछले चार सालों से एलएसी पर भारी संख्या में सैनिक तैनात हैं. ये सैनिक भारत की तरफ भी हैं और चीन के भी. ऐसे में भारी सैनिकों की तैनाती के बीच सोने की तस्करी क्यों की जा रही थी बेहद चौंकाने वाली घटना है.
1962 के युद्ध से पहले पूर्वी लद्दाख के जरिए चीन (तिब्बत) स्थित कैलाश मानसरोवर के लिए भारतीय तीर्थयात्री जरूर जाते थे. ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या इस पारंपरिक रूट के जरिए भारत और तिब्बत (चीन) के बीच सोने के बिस्किट की तस्करी हो रही है.
अभी तक बांग्लादेश बॉर्डर पर आए दिन सोने की तस्करी की खबरी सुनने को मिलती हैं. तो क्या तस्कर, भारत और चीन के बीच बॉर्डर को भी तस्करी के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं.
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