पिछले पांच दिनों में पाकिस्तान चारों ओर से घिरता नजर आ रहा है. एक के बाद एक हमलों से त्रस्त है. बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) बेहद ही आक्रामक तरीके से एक के बाद एक हमले कर रही है. बीएलए के इन हमलों का सबसे बड़ा कारण है चीन. बीएलए विद्रोही, चीनी प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं. एक के बाद एक हमलों के बाद चीन अपने प्रोजेक्ट और पाकिस्तान में रह रहे अपने लोगों के लिए बेहद आशंकित है. जिसके बाद माना जा रहा हैं कि चीन बड़ा फैसला करते हुए पाकिस्तान में अपना निवेश रोक सकता है, या पाकिस्तान को इस बात के लिए मजबूर कर सकता है कि चीन की सेना या प्राइवेट सिक्योरिटी पूरी इलाके की सिक्योरिटी अपने हाथों में ले ले.
इस बीच, ट्रेन हाईजैकिंग और सेना के काफिले पर हमले के बाद अब अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर स्थित गरिगल बॉर्डर पोस्ट पर हमला किया गया है. इस आतंकी हमले में फ्रंटियर कोर स्काउट्स के नौ (09) जवान घायल हुए हैं. बताया जा रहा है कि ये हमला तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और हाफिज गुल बहादुर (एचजीबी) ग्रुप द्वारा किया गया.
पाकिस्तान में 24 घंटे में दूसरा बड़ा अटैक, खैबर पख्तूनख्वा में हमला
खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर क्षेत्र में हमला किया गया है. ये हमला अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर स्थित गरिगल बॉर्डर पोस्ट पर हुआ है. जानकारी के मुताबिक इस आतंकी हमले में फ्रंटियर कॉर्प्स बाजौर स्काउट्स के 9 जवान घायल हुए हैं. खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर क्षेत्र में हुए इस हमले के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, और हमलावरों की तलाश की जा रही है.
सेना के काफिले पर अटैक, 90 जवानों की मौत का दावा
खैबर पख्तूनख्वा में हुए हमले से पहले पाकिस्तानी सेना के काफिले को निशाना बनाया गया. क्वेटा से ताफ्तान जा रहे सेना के काफिले पर आतंकी हमला हुआ. विस्फोटक से भरी गाड़ी तेज रफ्तार से आती हुई सैन्य बस से टकराई, जिसके बाद जोरदार धमाका हुआ. इस धमाके से संभलने का मौका मिलता, उससे पहले बीएलए के लड़ाकों ने दूसरे सैन्या वाहनों को घेरकर अंधाधुंध फायरिंग की. बीएलए पाकिस्तान सरकार से अपने लोगों को छोड़ने की मांग कर रहा है, साथ ही चीनी प्रोजेक्ट को बंद कराना चाह रहा है.
पाकिस्तान में हो रहे हमलों से चीन को हो रहा नुकसान, चीन रोकेगा इन्वेस्टमेंट
इन हमलों से पाकिस्तान की तो हालत पतली ही हो रही है साथ ही बलूचिस्तान में हो रहे अटैक से चीन भी प्रभावित हो रहा है, क्योंकि उसके सीपीईसी प्रोजेक्ट में देरी हो रही है, साथ ही पाकिस्तान में रह रहे चीनी नागरिक भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे. पाकिस्तान ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा में शामिल चीनी कर्मियों की सुरक्षा के लिए 15,000 जवानों वाली स्पेशल सिक्योरिटी डिवीजन (एसएसडी) तैनात की है, लेकिन चीन को उसपर भरोसा नहीं है.
चीन ने इशारा भी किया है कि जब तक हिंसा नहीं रोकी जाती, और बीएलए का खतरा कम नहीं होता तब तक अशांत क्षेत्रों में कोई भी नया प्रोजेक्ट या नया इन्वेस्टमेंट नहीं करेगा. चीन के इस फैसले से पाकिस्तान को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा.
पाकिस्तान पर चीन का भारी दबाव, अपने प्रोजेक्ट की सुरक्षा खुद चीनी सेना करेगी?
पाकिस्तान चाहे कितना भी चीन को भरोसा दे, लगातार हो रहे हमलों के कारण चीन आशंकित है और पूरी तरह से भरोसा भी नहीं कर पा रहा है. चीन पिछले साल से ही पाकिस्तान पर दबाव बना रहा है कि उसकी सेना पाकिस्तान में आकर प्रोजेक्ट और चीनी लोगों को सुरक्षा दे, लेकिन इससे पाकिस्तान की बहुत किरकिरी हो सकती है. लिहाजा एक बीच का रास्ता निकाला गया था, जिसके मुताबिक चीनी प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनी जो कि अप्रत्यक्ष तौर पर सेना से जुड़ी हुई है, वो पाकिस्तान में सुरक्षा दे.
बताया जा रहा है कि चीन ने तीन निजी सुरक्षा कंपनियों से समझौता, जो पाकिस्तान में जाकर सीपीईसी प्रोजेक्ट में लगे नागरिकों की आतंकियों से सुरक्षा करेंगी. चीन ने एक निजी सुरक्षा और सैन्य अनुबंध को लेकर समझौता किया था, चीन ने पाकिस्तान में चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए संयुक्त सुरक्षा व्यवस्था के लिए अपनी तीन निजी कंपनियों, डेवे सिक्योरिटी फ्रंटियर सर्विस ग्रुप, चाइना ओवरसीज सिक्योरिटी ग्रुप और हुआक्सिन झोंगशान सिक्योरिटी सर्विस को नियुक्त किया है.
लगातार हो रहे हमलों से पाकिस्तान की हालत अब मरता क्या ना करता जैसी हो गई है, यानि पाकिस्तान अब चाहकर भी चीन को मना नहीं कर पाएगा.