अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने के बाद इजरायल और लेबनान के बीच भी शुरुआती एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की उपस्थिति में लेबनान-इजरायल के बीच शांति पर मुहर लगाई गई है.
हालांकि बेरूत में इस एग्रीमेंट को लेकर जबर्दस्त हंगामा मचा हुआ है. क्योंकि इस एग्रीमेंट से हिजबुल्लाह को दूर रखा गया है. जैसे ही ये खबर हिजबुल्लाह के समर्थकों तक पहुंची लेबनान की सड़कों पर खूनी संग्राम शुरु हो गया, उग्र प्रदर्शन किया गया है और कई जगह आगजनी हुई है.
इस समझौते के बाद हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने इजरायल को धमकाया है और कहा है कि इजरायल को लेबनान से ‘अपमानित, पराजित’ होकर जाना होगा.
लेबनान और इजरायल के बीच सहमति के बाद हिजबुल्लाह और उनके समर्थकों में उबाल है वहीं इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने इस सहमति को ईरान के लिए बड़ा झटका बताया है.
लेबनान-इजरायल के राजदूतों ने किए हस्ताक्षर, ईरान-हिजबुल्लाह को झटका
वॉशिंगटन डीसी में विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इजरायल और लेबनान के राजदूतों के साथ एक समझौते की घोषणा की. इजरायल के राजदूत येचिएल लीटर और अमेरिका में लेबनान की राजदूत नादा हमदेह ने साइन किए. हालांकि इस समझौते की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन 14 सूत्रों पर बातचीत करने पर लेबनान और इजरायल ने सहमति जताई है.
लेबनान की राजदूत नादा हमादेह ने कहा कि “यह फ्रेमवर्क लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बहाल करने की दिशा में पहला कदम है. इसका मकसद लड़ाई को पूरी तरह और स्थायी रूप से रोकना है, ताकि लोग अपने घर लौट सकें और देश में शांति, सुरक्षा और समृद्धि स्थापित हो सके.”
इजरायल के राजदूत येखिएल लीटर ने कहा कि “इस समझौते का अंतिम लक्ष्य दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करना है. यह एक वास्तविक शांति होगी, जिसमें दोनों देश सुरक्षित रहेंगे. एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान किया जाएगा. इस त्रिपक्षीय समझौते में ईरान और हिजबुल्लाह को अलग रखा गया है और अब शांति की दिशा में रास्ता आगे बढ़ रहा है.”
हिजबुल्लाह के खात्मे तक दक्षिण लेबनान में रहेगी हमारी सेना: नेतन्याहू
इस शुरुआती समझौते को इजरायली पीएम नेतन्याहू ने अच्छा कदम बताते हुए कहा है कि “अमेरिका, इजरायल और लेबनान के बीच हुआ यह शुरुआती समझौता ईरान के प्रभाव को कमजोर करता है.”
इजरायली सेना ने भी अपना बयान सोशल मीडिया पर शेयर किया है. आईडीएफ की ओर से कहा गया है कि “जब तक लेबनान हिजबुल्लाह को निरस्त्र नहीं करता, तब तक इजराइल की सेना दक्षिणी लेबनान में बनी रहेगी.”
हिजबुल्लाह ने खारिज किया समझौता, बेरूत में उग्र प्रदर्शन
बेरूत में हिजबुल्लाह के समर्थकों ने इस डील का विरोध किया है. हिजबुल्लाह समर्थकों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया है. प्रदर्शनकारियों ने समझौते को ‘सरेंडर डील’ (आत्मसमर्पण) करार दिया और इजरायली सैनिकों की दक्षिणी लेबनान से बिना शर्त वापसी की मांग की. बेरूत में गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने रोड ब्लॉक कर दीं. कई प्रमुख सड़कों और हवाई अड्डे के मार्गों पर टायर जलाकर रास्ते जाम कर दिए. सैकड़ों हिजबुल्लाह समर्थकों ने हाथों में लेबनान और ईरान के झंडे लेकर बेरूत के मध्य क्षेत्र और संसद के आसपास मोटरसाइकिलों पर रैलियां निकालीं. और एग्रीमेंट का विरोध किया.
कई जगह जब प्रदर्शनकारी हिंसक हुए तो लेबनानी सेना के साथ उग्र झड़प की भी तस्वीरें देखने को मिलीं. लेबनानी सेना ने प्रदर्शनकारियों पर एक्शन लेते हुए आंसू गैस के गोले छोड़े और बलपूर्वक रास्तों को खाली करवाया गया.
ईरान हमारा इस्तेमाल कर रहा: लेबनानी राष्ट्रपति
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने इसी महीने बड़ा बयान देते हुए कहा था कि ईरान सिर्फ उनके देश का फायदा उठा रहा है और लेबनान का नाम अमेरिका-इजरायल के साथ सौदेबाजी के लिए कर रहा.
राष्ट्रपति आउन ने इजरायल के साथ सीधी बातचीत का समर्थन करते हुए कहा था कि लेबनान के लोग इस युद्ध से तंग आ चुके हैं और हर दिन खौफ के साए में जी रहे हैं. ये युद्ध रुक जाना चाहिए.
राष्ट्रपति जोसेफ आउन का ताल्लुक सेना से है और वो पहले पूर्व सेनाध्यक्ष रह चुके हैं. इसलिए कहते हैं कि मैं जानता हूं कि युद्ध किसी भी देश के लिए कितना नुकसानदेह हो सकता है.
आउन ने कहा, “मेरा मानना है कि लेबनान और इजरायल के पास दशकों पुरानी दुश्मनी खत्म करने का बड़ा मौका है. दोनों देशों के लोग 1948 से संघर्ष झेल रहे हैं और अब उन्हें युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति का रास्ता चुनना चाहिए.”
राष्ट्रपति आउन ने कहा, “मैं खुद युद्ध की पीड़ा झेल चुका हूं और आज भी शरीर में युद्ध के दौरान लगे छर्रे मौजूद हैं. इसके बावजूद मैं मानता हूं कि किसी भी समस्या का सबसे अच्छा समाधान युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति है.”
बिना शर्त इजरायल को हारकर वापस जाना होगा: हिजबुल्लाह
दरअसल इस फ्रेमवर्क समझौते में हिजबुल्लाह शामिल नहीं है, जिसके बाद हिजबुल्लाह ने समझौते को दृढ़ता से खारिज किया है. हिजबुल्लाह के महासचिव ने कहा कि इजराइल को लेबनानी क्षेत्र के हर इंच से बिना शर्त पीछे हटना होगा, पराजित और अपमानित होकर.
आपको बता दें कि 28 फरवरी को जब अमेरिका-इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य संघर्ष शुरु किया तो ईरान के समर्थन में हिजबुल्लाह ने इजरायल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. हिजबुल्लाह ने इजरायल पर कई रॉकेट दागे थे. जिसके बाद इजरायली सेना ने आक्रामक होते हुए दक्षिणी लेबनान में स्थित ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट किले और उससे जुड़ी रणनीतिक पहाड़ी पर अपना झंडा फहरा दिया था.
आईडीएफ का कहना था कि ब्यूफोर्ट किले से ही हिजबुल्लाह, इजरायल पर रॉकेट दाग रहा था. इस किले पर कब्जे के बाद हिजबुल्लाह-इजरायल के बीच संघर्ष बढ़ गया था.

