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डोनबास से 23 लाख का पलायन, घोस्ट-विलेज में तब्दील रूस के कब्जे वाला यूक्रेन

युद्धविराम की कोशिशों के बीच, रूस ने यूक्रेन के डोनबास प्रांत को पूरी तरह कब्जा करने के लिए अंतिम प्रहार शुरु कर दिया है. माना जा रहा है कि डोनबास के दो शहरों पर कब्जे के बाद लगभग पूरा प्रांत रूस के कब्जे में चला जाएगा. लेकिन पिछले 52 महीनों में दोनेत्स्क और लुहांस्क जैसे शहरों वाले इस प्रांत में जबरदस्त बर्बादी देखने को मिली है. क्योंकि 20 लाख से ज्यादा लोग युद्ध के चलते, डोनबास छोड़ चुके हैं. 

रशियन फेडरेशन की जांच कमेटी ने जारी किए बर्बादी के आंकड़े

रूस की एक जांच कमेटी ने 2014 से लेकर अब तक डोनबास में हुई तबाही के आंकड़े जारी किए हैं. रूस का दावा है कि 2014 से यूक्रेन ने डोनबास प्रांत से सौतेला व्यवहार किया और रूसी भाषा बोलने वाले स्थानीय लोगों पर जुल्मो-सितम ढाए. इसी का नतीजा था कि फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन के खिलाफ जंग (स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन) छेड़कर डोनबास के एक बड़े हिस्सा पर कब्जा कर रशियन फेडरेशन में शामिल कर लिया. 

डोनबास प्रांत, यूक्रेन के कुल क्षेत्रफल का करीब 20 प्रतिशत है. द्वितीय विश्वयुद्ध की तर्ज पर रूस, यूक्रेन के इतने बड़े हिस्से पर कब्जा करने को लेकर जंग में अपनी जीत का दावा करता है.

फरवरी 2022 से रूसी सेना धीरे-धीरे आगे बढ़कर पूरे डोनबास को रशियन फेडरेशन में शामिल करने में जुटी है. इस कार्रवाई में रूसी सेना को जबरदस्त नुकसान भी हुआ है, लेकिन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने डोनबास को यूक्रेन से पूरी तरह आजाद कर अपने देश में शामिल करने की मानो कसम खाई है.

दूसरी तरफ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने भी युद्धविराम के लिए डोनबास को पूरी तरह रूस के कब्जे से आजाद कराने की शर्त रखी है. ऐसे में जंग रूकने का नाम नहीं ले रही है.

डेढ़ लाख इमारतें हुई तबाह

रूस की जांच कमेटी ने जो आंकड़े जारी किए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं. जांच कमेटी के मुताबिक, 2014 से लेकर अब तक करीब 23 लाख लोग डोनबास को छोड़ चुके हैं. इसके अलावा 1.53 लाख सिविलियन इमारतें बर्बाद हो चुकी हैं. इनमें 1.38 लाख रिहायशी इमारत हैं. पिछले 12 सालों में 1565 स्कूल और शिक्षा केंद्र, 847 हॉस्पिटल और मेडिकल सेंटर और 500 से ज्यादा सांस्कृतिक केंद्र और स्टेडियम शामिल हैं. कमेटी के मुताबिक, इस अवधि में 200 से ज्यादा धार्मिक केंद्र भी तबाह हो चुके हैं. इस बर्बादी के लिए रूसी फेडरेशन कमेटी ने यूक्रेन को जिम्मेदार ठहराया है. 

दोनेत्स्क, लुहांस्क और मारियूपोल बने घोस्ट-सिटी

पिछले एक दशक में डोनबास के दोनेत्सक, लुहांस्क और मारियूपोल (पोर्ट-सिटी) शहर, घोस्ट-सिटी में तब्दील हो चुके हैं. गांव के गांव पूरी तरह तबाह हो चुके हैं. जंग का मैदान बनने के चलते लाखों लोग डोनबास छोड़ चुके हैं. बुर्जुग और असहाय लोगों को छोड़कर डोनबास में कम ही लोग दिखाई पड़ते हैं. शहर हो या गांव, रूसी सेना के टैंक और मिलिट्री व्हीकल सड़कों पर दिखाई पड़ते हैं. जगह-जगह सेना और पुलिस की चेक-पोस्ट बनी हैं. (https://www.amazon.in/Operation-Z-Live-Russia-Ukraine-Yuddha/dp/9355217625)

डोनबास के अंतिम 02 शहरों के लिए लड़ रहा रूस

रूस का दावा है कि भले यूक्रेन के ड्रोन अटैक ने मॉस्को से लेकर सेंट पीटर्सबर्ग और वोल्गोग्राड और उफा तक के वीडियो, दुनिया का ध्यान खींच रही हैं. लेकिन रूस ने पूरा ध्यान डोनबास के कब्जे पर लगाया हुआ है. डोनबास के दो शहर–कोंस्तनतिनोवका और क्रैसनी लीमन–पर कब्जा करने के बाद पुतिन का डोनबास पर पूरा कब्जा करने का सपना पूरा हो जाएगा.

युद्धविराम से पहले पुतिन का अंतिम प्रहार

यूक्रेन के रूस को शांति वार्ता का प्रस्ताव और बेलारूस के राष्ट्रपति लुकाशेंको का जेलेंस्की और पुतिन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने से जंग के जल्द समाप्त होने की संभावना दिखाई पड़ रही है. युद्धबंदियों और बंदी बनाए गए आम नागरिकों की रिहाई और अदला-बदली भी रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम की संभावनाएं बढ़ रही हैं. ईरान डील होने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना ध्यान यूक्रेन जंग की तरफ करने का संकेत दिया है. (वार-पलटवार, युद्धबंदी और रूस-यूक्रेन के बीच लुका डिप्लोमेसी)

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