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लीबियाई आर्मी चीफ का प्लेन क्रैश, मुनीर ने विरोधियों से की थी JF-17 डील

By Nalini Tewari

पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग और फाइटर जेट डील करना लीबिया के पश्चिमी आर्मी चीफ के लिए पनौती साबित हुआ. तुर्किए की राजधानी अंकारा के पास लीबिया की मान्यता प्राप्त त्रिपोली सरकार के सैन्य प्रमुख मुहम्मद अली अहमद अल-हद्दाद समेत 8 लोगों की मौत हो गई है. 

हादसे के बाद अंकारा एयरपोर्ट को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया और कई उड़ानों को डायवर्ट किया गया है. क्रैश का कारण विमान में तकनीकी खराबी होना बताया जा रहा है. 

पिछले सप्ताह ही लीबिया के त्रिपोली के विरोधी आर्मी यानी एलएनए के मिलिट्री चीफ जनरल हफ्तार ने पाकिस्तान के फेल्ड (फील्ड) मार्शल असीम मुनीर की अगुवाई की थी. जनरल खलीफा हफ्तार को जनरल अल हद्दाद (हादसे के शिकार जनरल) का प्रतिद्वंदी माना जाता है.

ऐसे में लीबिया की सरकार के विरोधियों की पाकिस्तान के साथ लड़ाकू विमान की डील के फौरन बाद जनरल अल हद्दाद का हादसे में शिकार हो जाना किसी साजिश की ओर इशारा कर रहा है. 

लीबिया को बड़ा झटका, मिलिट्री चीफ समेत 8 की विमान हादसे में मौत

लीबिया में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक विमान हादसे में उन्होंने अपने मिलिट्री चीफ को खो दिया. लीबिया के आर्मी चीफ जनरल मोहम्मद अली अहमद अल-हद्दाद का विमान तुर्की से लौटते समय हादसे का शिकार हो गया. अल-हद्दाद तुर्किए के सफल दौरे के बाद अपने देश लौट रहे थे. तुर्की के अधिकारियों के अनुसार, “प्राइवेट जेट फाल्कन-50 जेट में तकनीकी खराबी के बाद आपात लैंडिंग की कोशिश के दौरान विमान रडार से गायब हो गया.”

तुर्किये के गृह मंत्री अली येरलिकाया ने बताया, “विमान अंकारा के एसेनबोगा एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी. करीब 40 मिनट बाद ही विमान से संपर्क टूट गया था. इसके बाद हादसे की जानकारी मिली. लीबियाई मिलिट्री चीफ और चार अन्य लोगों को ले जा रहे फाल्कन-50 श्रेणी के निजी जेट का मलबा अंकारा के पास बरामद कर लिया गया है.हादसे में आठ लोगों की मौत हुई.”

माना जा रहा है कि मौसम खराब होने की वजह से विमान से संपर्क टूट गया था. इससे पहले विमान ने अंकारा के दक्षिण में स्थित हायमाना जिले के पास इमरजेंसी लैंडिंग का सिग्नल भेजा था. लेकिन विमान से संपर्क टूट गया. इसके कुछ मिनटों बाद हायमाना जिले के आसमानों में तेज रोशनी दिखाई दी. इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आईंं. लेकिन ये तेज रोशनी विमान हादसे की थी.

हादसे में मारे गए चार अन्य अधिकारी अल-फितौरी घ्रैबिल, ब्रिगेडियर जनरल महमूद अल-कतावी, चीफ ऑफ स्टाफ के सलाहकार मोहम्मद अल-असावी दियाब और चीफ ऑफ स्टाफ के कार्यालय में सैन्य फोटोग्राफर मोहम्मद उमर अहमद महजूब थे.

तुर्किए के रक्षा मंत्री से मुलाकात के लिए अंकारा गए थे लीबियाई मिलिट्री चीफ

बताया जा रहा है कि जनरल अल-हद्दाद मंगलवार को तुर्किये के आधिकारिक दौरे पर अंकारा आए थे. अल-हद्दाद ने तुर्किए के रक्षा मंत्री यासर गुलर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी. रक्षा मंत्री के अलावा चीफ ऑफ जनरल स्टाफ सेल्चुक बायरक्तारोग्लू सहित वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की थी. इसके बाद उन्होंने अंकारा से अपने देश के लिए उड़ान भरी थी.

आपको बता दें कि तुर्किए और लीबिया के बीच गहरे संबंध हैं. तुर्किए संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध के बावजूद लीबियो को सैन्य सहायता देता है.

लीबिया में आंतरिक युद्ध के चलते तुर्किए ने अपने सैनिकों की तैनाती की है. हाल ही में तुर्की की संसद ने लीबिया में तुर्की सैनिकों की तैनाती का कार्यकाल दो साल बढ़ाने को मंजूरी दी थी. 

लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अल-हद्दाद और खलीफा हफ्तार हैं सैन्य प्रतिद्वंद्वी

हादसे का शिकार हुए लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अल-हद्दाद त्रिपोली (पश्चिमी लीबिया) में स्थित लीबिया की संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त सरकार के सेना प्रमुख थे. उन्हें पूर्वी लीबिया के विद्रोही सेनापति हफ्तार का प्रतिद्वंद्वी माना जाता था, क्योंकि उनकी सेनाओं ने हफ्तार के सैन्य अभियानों का विरोध किया था, जिसमें त्रिपोली पर कब्जा करने का प्रयास भी शामिल था. 

दरअसल साल 2011 में नाटो की मदद से मुअम्मर अल गद्दाफी की सरकार गिरने  के बाद देश दो हिस्सों में बंट गया है. जिसमें पश्चिमी त्रिपोली में यूएन की मान्यता प्राप्त सरकार है और दूसरा पूर्वी और दक्षिण लीबिया में एलएनए यानि लिबियन नेशनल आर्मी का कब्जा है. एलएनए, यूएन द्वारा मान्यता प्राप्त त्रिपोली सरकार की विरोधी है.

खलीफा हफ्तार पूर्वी लीबिया (बेनगाज़ी) में स्थित लीबियाई राष्ट्रीय सेना (एलएएनए) के प्रमुख फील्ड मार्शल हैं. उनकी सेना संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त सरकार से अलग है, ये लोग यूएन के किसी नियम का पालन नहीं कह सकते हैं. आसानी से समझा जाए तो विद्रोही है. लेकिन एलएनए अपने सैन्य शक्ति के बल पर पूर्वी और दक्षिणी लीबिया के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखता है. 

संयुक्त राष्ट्र और कई देश खलीफ हफ्तार को तानाशाह कहते हैं. क्योंकि इन्होंने लीबिया की मान्यता प्राप्त सरकार (त्रिपोली) को बलपूर्वक चुनौती दी है. 

हालांकि, पाकिस्तान, मिस्र, यूएई और रूस जैसे कई देशों ने समय-समय पर खलीफा हफ्तार समर्थन किया है, और उन्हें विद्रोही नहीं मानते हैं.

असीम मुनीर ने की थी खलीफा हफ्तार से मुलाकात, चीनी विमान को अपना बताकर की डील

हाल ही में लीबिया के दौरे पर गए पाकिस्तानी डिफेंस फोर्सेज चीफ असीम मुनीर ने जनरल खलीफा हफ्तार से मुलाकात की थी. पाकिस्तान ने उनके साथ जेएफ-17 फाइटर जेट की एक बड़ी डील की है. पाकिस्तान ने लड़ाकू विमानों की ये डील एलएनए से की है.इस सौदे की कुल कीमत 4 बिलियन डॉलर यानी करीब एक लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये बताई जा रही है. हालांकि इस डील के बारे में पाकिस्तान या फिर लीबिया ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है. कि पाकिस्तान कम से कम 16 जेएफ-17 जेट बेचे जाएंगे. 

एलएनए के टॉप मिलिट्री कमांडरों के साथ मुलाकात में मुनीर ने इस जेएफ-17 को अपना बताया था. साथ ही ये भी कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत से युद्ध में जेएफ-17 लड़ाकू विमानों ने रफाल, सुखोई, मिग-29 और मिराज को मार गिराया था.

जबकि भारत के साथ-साथ फ्रांस भी कह चुका है कि ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी फाइटर जेट्स मार गिराए गए थे. पाकिस्तान के पास कोई भी सबूत नहीं है, दावे सिर्फ हवा हवाई है.

जनरल हद्दाद की मौत के बाद छिड़ी बहस, लोग हादसे को बता रहे साजिश

एलएनए यानि विद्रोहियों के साथ पाकिस्तान की डिफेंस डील के कुछ ही दिनों में त्रिपोली की मान्यता प्राप्त सरकार के मिलिट्री चीफ का विमान हादसा संयोग नहीं माना जा रहा है. सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस छिड़ी हुई है. कुछ लोगों का मानना है कि विमान हादसा कोई संयोग नहीं बल्कि साजिश है. तुर्किए और त्रिपोली सरकार ने मामले की जांच शुरु कर दी है लेकिन जनरल मुहम्मद अली अहमद अल-हद्दाद का मारा जाना एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है. क्योंकि इनकी संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में चल रहे लीबिया की बंटी हुई सेना को एकजुट करने के प्रयासों में अहम भूमिका मानी जाती थी.

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