ईरान से युद्ध लड़ते-लड़ते अमेरिका की आर्थिक हालत खस्ता हो गई है. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने और सैन्य फंड की गुहार लगाते हुए कहा है कि अगर पेंटागन को फंड नहीं मिले तो सेना को गंभीर वित्तीय संकट झेलना पड़ेगा.
अमेरिका-ईरान युद्ध का खर्च बढ़कर 37.5 अरब डॉलर पहुंच गया है. पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) ने अब कांग्रेस से 87 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग मांगी है. युद्ध में अब तक 17 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और 100 से ज्यादा घायल हुए हैं.
आपको बता दें कि 11वें दिन लगातार अमेरिका और ईरान के बीच भीषण जंग जारी है. अमेरिका ने होर्मुज की खाड़ी पर नियंत्रण को लेकर ईरान पर अटैक किया है तो ईरान ने खाड़ी देशों पर बमबारी की है.
पीट हेगसेथ परेशान, युद्ध के लिए मांगा फंड
ईरान से चल रहे युद्ध में जिस तरह से तेहरान ने जवाब दिया, उससे अमेरिका की सुपरपावर वाली छवि को पहले ही दाग लग चुका है, और अब अमेरिकी सेना के लगातार नुकसान से पैसों की भी भारी किल्लत हो गई है.
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को विपक्ष लगातार घेर रहा है. युद्ध को लेकर पीट हेगहेथ को तीखे सवालों और विरोध का सामना करना पड़ा है. पीट हेगसेथ के मुताबिक, इस युद्ध पर अब तक 37.5 अरब डॉलर (3.61 लाख करोड़ रु) खर्च हो चुके हैं.
पीट हेगसेथ ने कहा कि “युद्ध के लिए अतिरिक्त धनराशि एक बहुत जरूरी वित्तीय सहायता है. फंड के बिना गंभीर वित्तीय संकट हो जाएगा.”
दरअसल रिपब्लिकन पार्टी सेना और व्हाइट हाउस की अन्य प्राथमिकताओं के लिए 95 अरब डॉलर का पैकेज तैयार कर रही है. हेगसेथ के मुताबिक ये सहायता, “राष्ट्रपति ट्रंप के प्रस्तावित 1.5 ट्रिलियन डॉलर के डिफेंस बजट के साथ यह सैन्य क्षेत्र में एक पीढ़ीगत निवेश है.”
पेंटागन ने बताया कि युद्ध के पहले हफ्ते में खर्च 11.3 अरब डॉलर बताया गया था. वहीं 12 मई तक यह बढ़कर करीब 29 अरब डॉलर पहुंच गया था. अब यह आंकड़ा 37.5 अरब डॉलर हो गया है.
अतिरिक्त फंडिग पर उठे सवाल, हेगसेथ-सांसदों में तूतू-मैंमैं
रिपब्लिकन पार्टी इस फंडिंग बिल को जल्द पारित कराना चाहती है, लेकिन डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन सांसद इसका विरोध कर रहे हैं. डेमोक्रेट्स का कहना है कि डिफेंस के बजट का पैसा अभी है, फिर क्यों पैसा चाहिए. तो हेगसेथ ने खुलासा किया कि इस पर हेगसेथ ने जवाब दिया कि पहले वाला पैसा सितंबर तक खर्च हो जाएगा.
डेमोक्रेट सांसदों ने ट्रंप प्रशासन की युद्ध नीति पर सवाल उठाए हैं. सीनेटर पैटी मरे ने कहा कि जब ट्रंप बार-बार कह रहे हैं कि ईरान के साथ समझौता करीब है, तो फिर 70 अरब डॉलर से ज्यादा अतिरिक्त पैसे की जरूरत क्यों पड़ रही है. यह युद्ध फिर से एक अंतहीन युद्ध बनता जा रहा है.
सीनेटर जीन शाहीन ने भी सवाल उठाया कि पिछले साल मिले 150 अरब डॉलर के बजट का करीब आधा पैसा अभी तक खर्च नहीं हुआ, फिर नई फंडिंग क्यों मांगी जा रही है.
17 अमेरिकी सैनिकों की मौत से बढ़ा गुस्सा
पेंटागन ने जानकारी दी कि जॉर्डन में हुए ईरानी हमले में हुए 3 अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद आंकड़ा बढ़ गया है. जुलाई की शुरुआत से अब तक मरने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या 17 हो गई है, जबकि 100 से ज्यादा सैनिक घायल हुए हैं.
अमेरिका के सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के मुताबिक, “अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के लिए फिर हमला किया है. अमेरिकी सेना ने इस हमले में ईरान के एयरक्राफ्ट हैंगर और ड्रोन स्टोरेज साइट्स को निशाना बनाया है.”
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा, “21 जुलाई की रात 8:15 बजे ईरान के खिलाफ लगातार 11वीं रात के सैन्य हमले पूरे कर लिए. इन हमलों का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों के लिए पैदा हो रहे ईरानी खतरे को कम करना है. पिछले तीन महीनों में ईरान ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले 30 से अधिक व्यावसायिक जहाजों पर हमले किए हैं. इन अकारण हमलों ने सैकड़ों निर्दोष नाविकों की जान खतरे में डाली है.”
वहीं, ओमान के तट के पास एक तेल टैंकर पर हमला हुआ है. इसके बाद चालक दल को जहाज छोड़ना पड़ा. ईरान के पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ किसी तरह की बातचीत की पहल से इनकार कर दिया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने ओवल ऑफिस में प्रेस से कहा कि “ईरान बातचीत के लिए बेकरार है लेकिन जबतक वो सार्थक तरीके से बातचीत के लिए तैयार नहीं होते, हमें भी बैठक में कोई दिलचस्पी नहीं है. ईरान को भारी नुकसान हो रहा है, इसलिए वो जंग को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं.”

