गुफाओं में छिपे आतंकी को चुन-चुनकर मारना हो या सीमा पर आतंकियों के लॉन्च पैड तबाह करने हो या फिर ऊंचे पहाड़ों पर दुश्मन-देश के बंकर बर्बाद करने हो, सबका एक इलाज है, अटैक हेलीकॉप्टर. यही वजह है कि रक्षा मंत्रालय ने थलसेना और वायुसेना, दोनों के लिए 156 स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीए) प्रचंड खरीदने का करार किया है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) से 62,700 करोड़ में इसका सौदा किया गया है.
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 156 में से 90 प्रचंड हेलीकॉप्टर थलसेना को सप्लाई किए जाएंगे और बाकी 66 वायुसेना के लिए. 62 हजार करोड़ से भी ज्यादा के इस सौदे में एलसीएच हेलीकॉप्टर के साथ-साथ, पायलट और ग्राउंड स्टाफ की ट्रेनिंग और जरूरी साजो-सामान (मिसाइल और दूसरे हथियार) शामिल हैं.
इन हेलीकॉप्टर की सप्लाई करार होने के तीसरे वर्ष से शुरू होगी. अगले पांच साल में फिर सभी हेलीकॉप्टर की डिलीवरी थलसेना और वायुसेना को होने की संभावना है.
हालांकि, थलसेना और वायुसेना के पास पहले से कुल 15 ऐसे प्रचंड हेलीकॉप्टर हैं. वर्ष 2022 में पहले प्रचंड हेलीकॉप्टर को वायुसेना में शामिल किया गया था.
साल 2006 में मिली थी एलसीएच प्रोजेक्ट को मंजूरी
एलसीएच स्वदेशी अटैक हेलीकॉप्टर को कारगिल युद्ध के बाद से ही भारत ने तैयार करने का मन बना लिया था, क्योंकि उस वक्त भारत के पास ऐसा अटैक हेलीकॉप्टर नहीं था, जो 15-16 हजार फीट की उंचाई पर जाकर दुश्मन के बंकरों को तबाह कर सके. लेकिन इस प्रोजेक्ट को साल 2006 में मंजूरी मिली.
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने किया तैयार
लाइट कॉम्बेट हेलीकॉप्टर, एलसीएच को देशवासियों और दुनिया से परिचय कराने के लिए लेखक ने वर्ष 2019 में बेंगलुरु में एचएएल के फैसिलिटी में टेस्ट पायलट के साथ उड़ान भरी थी. ये कोई साधारण उड़ान नहीं थी. इस मिशन के लिए टेस्ट पायलट को एक खास जिम्मेदारी सौंपी गई थी. (https://x.com/neeraj_rajput/status/1174889609295056897)
जिम्मेदारी थी आसमान से अपने अटैक हेलीकॉप्टर से जमीन पर एक टारगेट को नेस्तनाबूद करना. इसके लिए उन्हें आसमान में सिम्युलेट करना था यानी ट्रायल-टेस्ट करना था. क्योंकि इस अटैक हेलीकॉप्टर को आसमान से आग बरसाकर दुश्मन की सेना के टैंक हो या फिर आतंकियों के ठिकाने उन्हें तबाह करने के लिए ही तैयार किया गया है.
एलसीएच की प्रचंड खूबियां:
- लाइट कॉम्बेट हेलीकॉप्टर यानी एलसीएच हेलीकॉप्टर का वजन करीब 6 टन है, जिसके चलते ये बेहद हल्का है. वजन कम होने के चलते ये सिचायिन और पूर्वी लद्दाख जैसे हाई ऑल्टिट्यूड एरिया (5000 मीटर ऊंचाई) में भी अपनी मिसाइल और दूसरे हथियारों से लैस होकर टेकऑफ़ और लैंडिंग कर सकता है.
- एलसीएच अटैक हेलीकॉप्टर में फ्रांस से खास तौर से ली गईं ‘मिस्ट्रल’ एयर टू एयर यानी हवा से हवा में मार करने वाले मिसाइल और हवा से जमीन पर मार करने वाले मिसाइल लग सकती हैं.
- एलसीएच में 70 एमएम के 12-12 रॉकेट के दो पॉड लगे हुए हैं. इसके अलावा एलसीएच की नोज़ यानी फ्रंट में एक 20 एमएम की गन लगी हुई है जो 110 डिग्री में किसी भी दिशा में घूम सकती है.
- पायलट के हेलमेट पर ही कॉकपिट के सभी फीचर्स डिस्प्ले हो जाते हैं.
- एचएएल के अधिकारियों के मुताबिक, एलसीएच में इस तरह के स्टेल्थ फीचर्स हैं कि ये आसानी से दुश्मन की रडार में पकड़ नहीं आएगा.
- दुश्मन हेलीकॉप्टर या फाइटर जेट ने अगर एलसीएच पर अपनी मिसाइल लॉक की तो ये उसे चकमा भी दे सकता है.
- इसकी बॉडी आरमर्ड है जिससे उसपर फायरिंग का कोई खास असर नहीं होगा. यहां तक की रोटर्स यानी पंखों पर गोली का भी असर नहीं होगा.
- इन स्वदेशी एलसीएच हेलीकॉप्टर का ट्रायल सियाचिन ग्लेशियर से लेकर राजस्थान के रेगिस्तान तक हो चुका है. इस दौरान एलसीएच में पर्याप्त मात्रा में फ्यूल से लेकर उसके हथियार भी लगे हुए थे.
- हेलीकॉप्टर में करीब 65 प्रतिशत तक स्वदेशी उपकरण हैं लगाए जाने का प्रावधान है. एचएएल के इस प्रोजेक्ट में 250 से ज्यादा स्वदेशी कंपनियों (अधिकतर एमएसएमई) शामिल हैं तथा 8500 नौकरियों पैदा की जाएगी.
इस साल दो लाख करोड़ के 193 रक्षा करार
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, एलसीएच प्रचंड के करार के साथ इस साल (2024-25) में कुल करारों की संख्या 193 पहुंच गई है. इन करार की कुल कीमत दो लाख करोड़ से ऊपर पहुंच गई है (2,09,050 करोड़). इनमें से 92 प्रतिशत (177 करार) स्वदेशी इंडस्ट्री को दिए गए हैं, जिनकी कुल कीमत 1.69 लाख करोड़ है (करीब 81 प्रतिशत).