पिछले एक दशक में भारतीय तटरक्षक बल ने देश की समुद्री सीमा में अवैध रूप से प्रवेश करने वाली कुल 179 नौकाओं को जब्त किया एवं 1683 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया. ये नौकाएं अवैध शिकार, मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध आप्रवासन इत्यादि में संलिप्त थीं. ये जानकारी रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने संसद में एक लिखित सवाल के जवाब में दी है.
40-45 जहाज और एक दर्जन टोही विमान हमेशा रहते हैं समुद्री-तटों की सुरक्षा में तैनात
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, तटीय सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए इंडियन कोस्टगार्ड (आईसीजी) के 18-10 जहाज, 30-35 बोट्स एवं 10-12 टोही विमान हमेशा तैनात रहते हैं.
तटीय सुरक्षा सुदृढ़ करने के साथ-साथ समुद्र पर नियम आधारित व्यवस्था बनाए रखने के लिए समुद्री कानून प्रवर्तन सुनिश्चित करना भी इंडियन कोस्ट गार्ड की ड्यूटी का अहम हिस्सा है.
कोस्टगार्ड की सर्विलांस, ऑफशोर डेवलपमेंट एरिया (ओडीए) एवं समुद्र से लगे हुए द्वीप समूहों (अंडमान एवं निकोबार एवं लक्षद्वीप) पर भी केंद्रित होती है. तटीय क्षेत्रों की निगरानी, कोस्टल सर्विलांस नेटवर्क और जांच रिमोट ऑपरेटिंग स्टेशन (आरओएस) एवं रिमोट ऑपरेटिंग स्टेशन (आरओएस) एवं रिमोट ऑपरेटिंग सेंटर्स (आरओसी) द्वारा की जाती है.
एक दशक में तीन लाख से ज्यादा बोर्डिंग ऑपरेशन
विगत 10 वर्षों के दौरान, आईसीजी ने प्रतिरोध एवं कार्मिकों की पहचान स्थापित करने हेतु तीन लाख (3,00,296) से ज्यादा बोर्डिंग ऑपरेशन, 153 तटीय सुरक्षा अभ्यास, 451 तटीय सुरक्षा ऑपरेशन, 458 सुरक्षा ड्रिल एवं 3645 संयुक्त तटीय गश्त उड़ान भरी हैं.
तटीय सुरक्षा (अखिल भारतीय) के लिए आईसीजी द्वारा पोतों एवं विमानों के 12,201 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं. सीएसएन के लिए अखिल भारतीय उपयोग की गई निधियां 1583.8 करोड़ रुपए है.
तटीय राज्यों के लिए कोस्टल सुरक्षा मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को लागू किया गया है. ये एसओपी संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही, ऑपरेशनों का संचालन एवं विभिन्न तटीय सुरक्षा राज्यों के लिए कार्रवाई प्रबंधन को रेखांकित करती हैं.
मछुआरों के लिए टोल फ्री नंबर
आईसीजी विचार-विमर्श, समुद्री सुरक्षा एवं संरक्षा पर केंद्रित होता है. आईसीजी नियमित रूप से सामुदायिक विचार-विमर्श कार्यक्रमों (सीआईपी) का आयोजन करती है जिसमें मछुआरों के समुदाय शामिल होते हैं. विचार-विमर्श के दौरान विभिन्न समुद्री सुरक्षा एवं संरक्षा संबंधी पहलुओं पर चर्चा की जाती है.
समुद्र में किसी भी आपात स्थिति की सूचना प्रदान करने हेतु एक टोल फ्री नम्बर 1554 भी मुहैया कराया गया है. इसके अलावा, राज्यों द्वारा तट पर किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना के लिए मछुवारा निगरानी समूहों का भी सृजन भी किया गया है.