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हम युद्ध नहीं डायलॉग के समर्थक: मोदी

रूस के कज़ान में 16 वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में एक मंच पर जुटीं महाशक्तियां. दुनिया में बढ़ रही अशांति के बीच ब्राजील, रूस, इंडिया, चीन और साउथ अफ्रीका ने एक-दूसरे के प्रति प्रतिबद्धता जाहिर की है. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा है कि ब्रिक्स की बैठक ऐसे वक्त में हो रही है, जब दुनिया युद्ध, संघर्ष और आतंकी चुनौतियों से घिरी है.

ब्रिक्स विभाजनकारी नहीं एक जनहित समूह है: पीएम मोदी
ब्रिक्स की बैठक पर अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों की तिरछी नजर है लेकिन पीएम मोदी ने एक बार फिर से ब्रिक्स की बैठक में रूसी राष्ट्रपति पुतिन और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर की बात को आगे बढ़ाया है. पीएम मोदी ने कहा, “मेरा मानना है कि ब्रिक्स एक विविध और समावेशी मंच के रूप में सभी मुद्दों पर सकारात्मक भूमिका निभा सकता है. हमारा दृष्टिकोण जन केंद्रित रहना चाहिए. हमें दुनिया को यह संदेश देना चाहिए कि ब्रिक्स एक विभाजनकारी नहीं बल्कि एक जनहित समूह है.”

ब्रिक्स की ऐसी छवि ना बने कि हम किसी की जगह लेना चाहते हैं: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में युद्ध और संघर्षों का भी जिक्र किया. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने कहा, “हमारी बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया युद्ध, संघर्ष, आर्थिक अनिश्चितता, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद जैसी कई चुनौतियों से घिरी हुई है.” दुनिया में उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम का विभाजन समेत टेक्नोलॉजी के युग में, साइबर सिक्योरिटी, डीप फेक, दुष्प्रचार जैसी नई चुनौतियां सामने आई हैं.”  

पीएम मोदी ने ब्रिक्स को लेकर कहा, “हमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और बहुपक्षीय विकास बैंक, डब्ल्यूटीओ जैसे वैश्विक संस्थानों में सुधार के लिए समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ना चाहिए. ब्रिक्स के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि इस संगठन की छवि ऐसी न हो कि हम वैश्विक संस्थाओं में सुधार नहीं, बल्कि उनकी जगह लेना चाहते हैं.”

पीएम मोदी ने कहा कि “हम युद्ध नहीं, डायलॉग और डिप्लोमेसी का समर्थन करते हैं. और, जिस तरह हमने मिलकर कोविड जैसी चुनौती को परास्त किया, उसी तरह हम भावी पीढ़ी के सुरक्षित, सशक्त और समृद्ध भविष्य के लिए नए अवसर पैदा करने में पूरी तरह सक्षम हैं.” (पुतिन नहीं BRICS ने जुटाए 36 देश, भूल गया West)

आतंक के वित्तपोषण को लेकर  पीएम मोदी के निशाने पर चीन?
ब्रिक्स के पूर्ण-समापन सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद का मुद्दा उठाया. पीएम मोदी ने कहा, “आतंकवाद और टेरर फाइनेंसिंग से निपटने के लिए हम सभी को एकजुट होना होगा.” 
पीएम मोदी ने ब्रिक्स देशों से सहयोग मांगते हुए कहा कि “आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर दोहरे मानकों (डबल स्टैंडर्ड) के लिए कोई जगह नहीं है, हमें अपने देशों के युवाओं में कट्टरपंथ को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाने चाहिए, हमें संयुक्त राष्ट्र में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन के लंबित मुद्दे पर मिलकर काम करना होगा. क्योंकि आतंकवाद समेत कई चुनौतियों से घिरा है विश्व.”

पीएम मोदी ने ब्रिक्स को बताया शांति का मंच

पीएम मोदी ने कहा कि “भारत, ब्रिक्स भागीदार देश के रूप में नए देशों का स्वागत करने के लिए तैयार है. इस संबंध में सभी निर्णय सर्वसम्मति से किए जाने चाहिए और इसके संस्थापक सदस्यों की राय होनी चाहिए. ब्रिक्स का सम्मान किया जाना चाहिए. जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन में हमने जिन मार्गदर्शक सिद्धांतों, मानकों, मानदंडों और प्रक्रियाओं को अपनाया, उनका सभी सदस्य और भागीदार देशों को पालन करना चाहिए.” (ब्रिक्स नहीं है जियोपॉलिटिकल विरोधी: White House)

ब्रिक्स के सामने दुनिया को अशांत छोड़ने या शांति स्थापित करने का विकल्प: जिनपिंग

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स सम्मेलन में अहम मुद्दा उठाया. जिनपिंग ने कहा कि “हमारे सामने दुनिया को अशांत छोड़ने या फिर शांति की ओर वापस ले जाने का विकल्प है. सुरक्षा को बनाए रखने के लिए ब्रिक्स के शांतिपूर्ण एजेंडे को आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण है. हम यूक्रेन पर शांति के समर्थन में अधिक आवाज़ों को एकजुट करना चाहते हैं. गाजा युद्ध के स्थायी समाधान के लिए अधिक प्रयास करना चाहिए. हमें हरित विकास के लिए प्रतिबद्ध ब्रिक्स का निर्माण करना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में बदलती दुनिया को बेहतर ढंग से शामिल किया जाना चाहिए.”

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