By Nalini Tewari
अमेरिका और ईरान के बीच चौधरी बनने की कोशिश में लगे पाकिस्तान की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिट्टी पलीद कर दी है. ईरान के साथ अमेरिका की एक बार फिर से बातचीत शुरु होने के बीच ट्रंप ने पाकिस्तान को दूध में मक्खी की तरह निकाल फेंका है.
ट्रंप ने अपने ताजा बयान में कहा है कि ईरान के साथ बातचीत की पहल में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर की अहम भूमिका है. लेकिन ट्रंप ने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया.
हालांकि ट्रंप इस दौरान ईरान को धमकाना नहीं भूले, ट्रंप ने कहा, ईरान के साथ प्रस्तावित नई बातचीत तेहरान के लिए समझौता करने और अमेरिका के हमलों से बचने का ‘आखिरी मौका’ है.
सऊदी, यूएई, कतर की तारीफ, पाकिस्तान का नहीं लिया नाम
ट्रंप ने ओवल ऑफिस में कहा कि “उम्मीद है कि अगले एक-दो दिन में बातचीत शुरू होगी, जिसके तहत होर्मुज स्ट्रेट दोबारा खोला जाएगा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की चिंताओं का समाधान निकालने का रास्ता तैयार होगा.”
ट्रंप ने कहा कि “सऊदी अरब, यूएई और कतर ने अमेरिका को ईरान पर बड़े सैन्य हमले से पीछे हटने और बातचीत का रास्ता अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया.”
ट्रंप बोले, “पहला चरण होर्मुज स्ट्रेट को खोलने का है. दूसरा चरण परमाणु निरस्त्रीकरण का है. इसमें थोड़ा समय लगेगा. लेकिन अमेरिका ने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे सहयोगी खाड़ी देशों के आग्रह पर ईरान पर नए और बड़े हमले का आदेश देने का फैसला फिलहाल टाल दिया है.”
ट्रंप ने दोहराया कि “ईरान को लेकर सब्र खत्म हो रहा है, और ईरान को तबाही से बचाने के लिए बातचीत और एक अच्छे समझौते पर हस्ताक्षर करने का यह आखिरी मौका है.”
पाकिस्तान की मध्यस्थता पर अमेरिका में उठ रहे सवाल
आगे की बातचीत में पाकिस्तान मध्यस्थ बना रहेगा या नहीं, ये ट्रंप के बयान से साफ नहीं है, लेकिन जिस तरह से पाकिस्तान का नाम नहीं लिया गया है, उससे शंका उठ रही है, इस्लामाबाद से अमेरिका ने दूरी बना ली है.
दरअसल एक्सपर्ट लगातार पाकिस्तान की मध्यस्थता पर सवाल उठा रहे थे. पाकिस्तान की मध्यस्थता को डबल गेम बता रहे थे. हाल ही में रिटायर्ड अमेरिकी जनरल और रक्षा विश्लेषक जैक कीन ने कहा था कि पाकिस्तान और कतर की रूख ईरान की ओर झुका हुआ है. वाशिंगटन के बजाए, पाकिस्तान ईरान के पक्ष में है.
इजरायल भी अमेरिका को इस बारे में चेता चुका है, कि पाकिस्तान न्यूट्रल नहीं है और आतंकियों को पालने वाला इस्लामाबाद अच्छा मध्यस्थ नहीं है.
ईरानी विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने ट्रंप के ‘अप्रत्यक्ष वार्ता’ को लेकर किए दावे को खारिज कर दिया है. बघाई ने कहा, “किसी प्रतिनिधि का स्वागत करने या फिर किसी को बातचीत के लिए भेजने की हमारी कोई योजना नहीं है. फिलहाल हमारी अमेरिका से कोई बातचीत नहीं चल रही है.”

