अमेरिका-ईरान के बीच हुए सीजफायर का भारत ने स्वागत किया है. युद्धविराम की घोषणा के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करके कहा है कि उम्मीद करते हैं कि सीजफायर से पश्चिम एशिया में स्थाई शांति स्थापित होगी. 40 दिन के भयंकर युद्ध के बाद चीन, तुर्किए, मिस्र और पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी थी. ये युद्धविराम 02 सप्ताह का हुआ है. 10 अप्रैल को पहली बार अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत की जाएगी.
हम ईरान-अमेरिका के फैसले का स्वागत करते हैं: भारत
विदेश मंत्रालय ने बुधवार (8 अप्रैल, 2026) को अपने आधिकारिक बयान में कहा कि “हम हुए युद्धविराम का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी’. मंत्रालय ने कहा कि भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि किसी भी संघर्ष का समाधान केवल तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है.”
विदेश मंत्रालय ने कहा, कि “लंबे समय से जारी इस संघर्ष ने आम लोगों को भारी दर्द पहुंचाया है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार नेटवर्क को बाधित किया है. हम उम्मीद करते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध नौवहन और वैश्विक व्यापार का प्रवाह जारी रहेगा.”
ईरान की शर्तों पर हुई सीजफायर, मिडिल ईस्ट में शांति
28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य हमले किए थे. इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत सभी बड़े सैन्य शीर्ष नेताओं और अधिकारियों की मौत हो गई थी. उस वक्त अमेरिका-इजरायल को अंदाजा नहीं था कि सुप्रीम लीडर की मौत के बावजूद ईरान युद्ध में पैर जमाकर खड़ा हो जाएगा.
सभी को चौंकाते हुए ईरान ने अमेरिकी हमले का जवाब 11 खाड़ी देशों पर बने अमेरिकी सैन्य बेस पर हमला करके दिया. ईरान युद्ध में अडिग रहा. और अपने प्रॉक्सी की मदद से युद्ध लड़ता रहा.
युद्ध में टर्निंग प्वाइंट तब आया जब ईरानी सेना ने अहम समुद्री मार्ग होर्मुज पर नियंत्रण कर लिया और किसी भी व्यापारिक जहाज को निकलने नहीं दिया. आईआरजीसी ने कहा, कि होर्मुज मार्ग से एक लीटर तेल तक नहीं निकाला जा सकेगा. ईरान की धमकी का ये असर हुआ कि यूरोप के कई देशों में गैस-तेल की किल्लत होने लगी.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की किसी भी धमकी का ईरान पर असर नहीं हुआ. अंत में चीन ने बैकडोर डिप्लोमेसी शुरु की और पाकिस्तान, तुर्किए, मिस्र के माध्यम से ईरान को मनाया गया. जंग के करीब 40 दिन बाद ईरान और अमेरिका दोनों देशों के बीच सीजफायर पर सहमति बनी है.
अमेरिका-ईरान की ओर से कौन-कौन लेगा शांति वार्ता में हिस्सा
अमेरिका और ईरान को शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद आने का न्योता दिया है. यह संभावित बैठक शुक्रवार, 10 अप्रैल को आयोजित की जा सकती है. इस उच्चस्तरीय बैठक में अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, उनके दामाद जेरेड कुशनर और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के शामिल होने की संभावना है.
दरअसल ईरान ने अमेरिकी प्रशासन को संकेत दिया है कि वह स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ बातचीत के पक्ष में नहीं हैं. क्योंकि फरवरी 2026 में जेनेवा में ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता हुई थी, जिसमें स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल थे. इन वार्ता के बीच ही अमेरिका ने ईरान पर अटैक कर दिया था. जिसे तेहरान विश्वासघात की तरह देख रहा है.
इसलिए ईरान चाहता है कि इन दोनों के अलावा अमेरिका के किसी और शीर्ष से बात की जाए. ईरान, जेडी वेंस से बात करने के लिए तैयार है.

