Breaking News India-Pakistan Terrorism

पीओके छिटकने के लिए तैयार, शहबाज को आई कश्मीर की याद

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हो रही दमनकारी नीतियों को छोड़कर पाकिस्तान ने फिर कश्मीर का रोना रोया है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जम्मू-कश्मीर को लेकर एक बार फिर जहर उगला है. 27 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर ब्लैक डे बताते हुए शहबाज के दफ्तर ने भारतीय कश्मीरियों को भड़काने की कोशिश की है.

लेकिन पाकिस्तान ये भूल चुका है कि जिस जम्मू-कश्मीर के ख्वाब वो देख रहा है वो हिंदुस्तान का अभिन्न अंग था, है और रहेगा. उल्टा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर अवैध कब्जे के बाद वहां के लोग भी भारत के गुणगान करने लगे हैं.

सितंबर के महीने में भी संयुक्त राष्ट्र के मंच से शहबाज शरीफ कश्मीर को लेकर गिड़गिड़ाते दिखे थे, लेकिन भारत के जवाब के आगे पाकिस्तान पस्त पड़ गया था.

कश्मीर के समाधान के बिना साउथ एशिया में शांति नहीं: शहबाज शरीफ

पाकिस्तानी पीएमओ ने शहबाज शरीफ का संदेश सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है. शहबाज शरीफ ने लिखा, “जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान का रुख स्पष्ट, सुसंगत और सिद्धांतों पर आधारित है. दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता तब तक नहीं आ सकती जब तक कि जम्मू-कश्मीर विवाद का एक न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण समाधान न निकल आए. यह समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए.”

शहबाज शरीफ को हर जगह तो दुत्कार मिलती है. यूएन में इन्हीं के देश में पाले-पोसे और ट्रेनिंग ले रहे आतंकियों की घोषणा की जाती है. संयुक्त राष्ट्र भी मानता है कि पाकिस्तान, आतंकवाद पर लगाम लगाने में नाकाम है. और अब जब जम्मू-कश्मीर में आतंकियों का खात्मा हो रहा है कि तो यही पाकिस्तान बिलबिला रहा है. कश्मीरियों की बात कर रहा है, उन कश्मीरियों को जो अब विकास की राह पर चल चुके हैं, जो बंदूक को छोड़कर बैलेट को चुनते हैं. उन्हीं कश्मीरियों को पाकिस्तान भड़काने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ये साजिश विफल रहेगी.

कश्मीरी आत्मनिर्णय के अधिकार से वंचित हैं: शहबाज शरीफ

शहबाज के बयान में लिखा गया है “79 साल पहले भारतीय सेना श्रीनगर पहुंची थी. इसने जम्मू-कश्मीर के इतिहास में एक दुखद अध्याय की शुरुआत की जिसकी गहरी छाया आज भी इस क्षेत्र पर बनी हुई है. तब से जम्मू-कश्मीर के लोगों को उनके आत्मनिर्णय के अधिकार से दूर रखा गया है. एक ऐसा अधिकार जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों में भी मान्यता दी गई है.”

शहबाज शरीफ ने कहा, “जम्मू-कश्मीर  के लोगों ने भारी कठिनाइयों, पीड़ा और दमन का सामना किया है. फिर भी अपने मौलिक अधिकारों को हासिल करने के लिए उनका साहस, धैर्य और अटूट संकल्प आज भी कायम है. कई पीढ़ियों द्वारा दिए गए बलिदान, आजादी, सम्मान और न्याय के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता का एक सशक्त प्रमाण हैं.”

“भारत ने कश्मीरी लोगों की आवाजों को दबाने की कोशिशें जारी रखी हैं. कश्मीरी राजनीतिक नेताओं, कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार रक्षकों को लंबे समय तक जेल में रखना बेहद चिंताजनक है. बुनियादी स्वतंत्रताओं का सम्मान किया जाए और जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का अधिक ध्यान जाए.”

पीओके में शहबाज-मुनीर के खिलाफ जनता की हुंकार

दरअसल शहबाज शरीफ कश्मीर पर बयान देकर दुनिया का ध्यान पीओके से हटाना चाहते हैं. पीओके जहां शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर के खिलाफ लोगों ने अपनी आवाजें बुलंद की हुई हैं.

सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने पर पाकिस्तानी सेना ने खुलेआम लोगों को गोलियों से भून डाला था, जिसके वीडियो सामने आने के बाद शहबाज सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा था.

पीओके के प्रदर्शनकारियों ने भारत में मिलने की मांग की है, क्योंकि उनका आरोप है कि पाकिस्तान में उन लोगों को सारी सुविधाओं से वंचित रखा गया है.

हाल ही में भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कटाक्ष करते हुए नसीहत दी थी की, उसे जम्मू-कश्मीर का जिक्र करने के बजाय पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले इलाकों पर ध्यान देना चाहिए. खासतौर से रावलकोट के बारे में सच्चाई उजागर करते हुए कहा, “वहां लोगों की हत्याएं, हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने की घटनाएं साफ दिखाई देती हैं. इस तरह की जानबूझकर की गई अनदेखी सिर्फ कट्टरता और असहिष्णुता को दर्शाती है.”

editor
India's premier platform for defence, security, conflict, strategic affairs and geopolitics.

Leave feedback about this

  • Rating

Choose Your Premium Plan

Unlock exclusive defence reports, geopolitical analysis and premium articles.