कोरियाई प्रायद्वीप पर मंडरा रहे युद्ध के बादलों के बीच, यूएस आर्मी ने एक ऐसी बैटलफील्ड रिहर्सल शुरु कर दी है, जिससे पूरी दुनिया की भौहें तन गई हैं. वैसे तो अमूमन बैटलफील्ड रिहर्सल में हथियारों के साथ प्रशिक्षण किया जाता है या फिर टेक्टिकल ट्रेनिंग. लेकिन यूएस आर्मी ने इस ड्रिल के दौरान सैनिकों की कब्र खोदने की अभ्यास किया है.
खुद यूएस आर्मी ने अपने सैनिकों के कब्र खोदने की ड्रिल के बारे में आधिकारिक जानकारी साझा की है.
यूएस आर्मी के मुताबिक, कोरियाई युद्ध (1950-53) के बाद पहली बार ग्रेवडिगिंग का परीक्षण किया गया है. अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में इन अस्थाई ग्रेव्स खोदने की ड्रिल की गई है. इस दौरान, अमेरिका सैनिकों के साथ-साथ मिलिट्री इंजीनियर्स, मेडिकल टीम और चैपलिन (सेना के धार्मिक गुरु) मौजूद थे.
जानिए, क्यों होती है ग्रेवडिगिंग
जानकारों के मुताबिक, ग्रेवडिगिंग उन परिस्थितियों में की जाती है जब सैनिकों के शवों को जंग के मैदान से बाहर उनके घरों तक ले जाना मुश्किल हो. जंग के मैदान में इन अस्थायी कब्र में सैनिकों के पार्थिव-शरीर को दफना दिया जाता है. युद्ध खत्म होने के बाद सैनिकों के पार्थिव शरीरों को उनके घर या फिर स्वदेश भेज दिया जाता है. युद्ध के दौरान सीबीआरएन यानी केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल एंड न्यूक्लियर अटैक के दौरान भी सैनिकों के शवों को रणभूमि में दफनाने की सैन्य परंपरा रही है. लेकिन यूएस आर्मी की इस ड्रिल की टाइमिंग बेहद अहम है.
उत्तर कोरिया के हमलों के खिलाफ दक्षिण कोरिया को मिली है अमेरिकी सुरक्षा
पिछले कुछ दिनों से कोरियाई प्रायद्वीप में जबरदस्त टेंशन है. क्योंकि उत्तर कोरिया ने बॉर्डर पर तोप तैनात कर दी हैं, जिनकी जद में दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल है. अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच सुरक्षा समझौता है, जिसके तहत, उत्तर कोरिया के हमले से बचाने की जिम्मेदारी यूएस आर्मी है. यही वजह है कि दक्षिण कोरिया में यूएस आर्मी की एक पूरी कमांड तैनात रहती है, जिसमें 30 हजार सैनिक हैं.
किम जोंग की हालत को लेकर अफवाहों के बीच डीएमजेड पर मंडराए युद्ध के बादल
उत्तर कोरिया के सनकी तानाशाह किम जोंग उन के बीमार होने और मौत की अफवाहों के बीच, उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया से सटे बॉर्डर (डीएमजेड) पर बड़ी संख्या में तोपों की तैनाती कर दी है. इन तोपों की रेंज करीब 60 किलोमीटर है. दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल की दूरी डी-मिलिट्राइज जोन (डीएमजेड) से महज 40 किलोमीटर है. ऐसे में पूरे सियोल की सांसें इस वक्त थमी हुई हैं.
हाल में यूक्रेन ने उत्तर कोरिया के 02 युद्धबंदियों को दक्षिण कोरिया भेजने की जानकारी सार्वजनिक कर दी थी. डीएमजेड पर भी कुछ ऐसी लैंड माइंस फटने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे कोरियाई प्रायद्वीप में युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं. इन घटनाओं पर किम जोंग की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. लेकिन डीएमजेड पर उत्तर कोरिया की सेना की गतिविधियों से दक्षिण कोरिया में खौफ का माहौल है.
अगले महीने संभव है किम जोंग-ट्रंप समिट
कोरियाई प्रायद्वीप में युद्ध के बादलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगले महीने एशिया के दौरे के दौरान उत्तर कोरिया के तानाशाह से मुलाकात के संकेत दिए थे. 18-19 नवम्बर को चीन के शेनझेन में होने वाली एपीईसी (एशिया पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन)की बैठक के लिए एशियाई दौरा है. ऐसे में माना जा रहा है कि उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग या फिर चीनी बॉर्डर पर ये मुलाकात संभव है. लेकिन उत्तर कोरिया की तरफ से ट्रंप और किम जोंग की मुलाकात पर कोई बयान सामने नहीं आया है.


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