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यूक्रेन का प्रस्ताव पुतिन को नामंजूर, डोनबास तक सीमित नहीं रहेगी जंग

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसमें युद्ध को डोनबास और आसपास के इलाकों तक सीमित करने के लिए कहा गया था. पुतिन के मुताबिक, युद्ध को सीमित करने से यूक्रेन को दूसरे इलाकों में अपनी सेना को मजबूत करने का मौका मिल जाएगा. 

रशियन फेडरेशन की एक अहम बैठक को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि यूक्रेन ने युद्ध को दोनेत्स्क, लुहांस्क (या लुगांस्क), खेरसोन और जपोरिजिया इलाकों तक सीमित करने का नया प्रस्ताव दिया है. दोनेत्स्क और लुहांस्क, डोनबास प्रांत का हिस्सा हैं. जबकि खेरसोन और जपोरेजिया, डोनबास से सटे हुए हैं और यूक्रेन के पूर्वी छोर पर हैं. डोनबास प्रांत भी पूर्वी यूक्रेन का हिस्सा है और दक्षिणी रूस के रोस्तोव प्रांत से सटा है.

फरवरी 2022 तक यूक्रेन का हिस्सा थे दोनेत्स्क और लुहांस्क

फरवरी 2022 से पहले, डोनबास प्रांत (दोनेत्स्क और लुहांस्क), पूरी तरह से यूक्रेन का हिस्सा था. लेकिन स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन (जंग) के शुरु होने के बाद से रूस ने इस पूरे प्रांत को रशियन फेडरेशन में शामिल कर लिया है. 

डोनबास का करीब 90 प्रतिशत क्षेत्रफल अब रशियन फेडरेशन का हिस्सा है. यहां तक की 2024 के आम चुनावों में दोनेत्स्क और लुहांस्क में भी चुनाव कराए थे. लेकिन यहां के दो अहम शहर, कोंस्तनतिनोव और क्रैसनी लिमन पर रूसी कब्जा होना बाकी है. ऐसे में यहां पिछले कुछ हफ्तों से घमासान लड़ाई चल रही है. (डोनबास से 23 लाख का पलायन, घोस्ट-विलेज में तब्दील रूस के कब्जे वाला यूक्रेन)

रूस ने क्यों किया डोनबास पर कब्जा

रूस का दावा है कि 2014 के बाद से यूक्रेन ने डोनबास के साथ सौतेला व्यवहार किया. क्योंकि यहां के रहने वाले लोग, बहुतायत रूसी भाषा बोलते हैं. ऐसे में दोनेत्स्क और लुहांस्क में रूस की मदद से विद्रोह शुरु हो गया था. स्थानीय मिलिशिया ने यूक्रेन से अलग होने के लिए हथियार उठाए और फरवरी 2022 में पुतिन ने यूक्रेन पर आक्रमण करने की घोषणा के साथ दोनेस्त्क और लुहांस्क, दोनों को अलग-अलग आजाद राष्ट्र घोषित कर दिया.  लेकिन कुछ महीने बाद, रूस ने दोनों प्रांतों में जनमत संग्रह के जरिए रशियन फेडरेशन में शामिल कर लिया. (https://www.prabhatbooks.com/operation-z-live-russia-ukraine-yuddha.htm)

खेरसोन और जपोरेजिया को भी कब्जा करने के फिराक में रूसी सेना

रूस ने डोनबास के अलावा खेरसोन और जपोरेजिया को भी पूरी तरह रशियन फेडरेशन में शामिल करने के लिए जंग छेड़ रखी है. अगर ये दोनों इलाके भी रूस के हाथ लग तब यूक्रेन का करीब एक चौथाई क्षेत्रफल रशिया का हिस्सा बन जाएगा. डोनबास के अलावा, रूस की सेना यूक्रेन के दो उत्तरी प्रांत, सुमी और खारकीव में भी आगे बढ़ रही है. पुतिन का दावा है कि रूसी सेना, सुमी से महज 10.5 किलोमीटर दूर है. द्वितीय विश्वयुद्ध की शैली में पुतिन की सेना धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए यूक्रेन की जमीन पर रशियन झंडा लहरा रही है. 

सुमी और खारकीव में भी चल रही लड़ाई

अगस्त 2023 में यूक्रे ने रूस के कुर्स्क इलाके में करीब 13 हजार वर्ग किलोमीटर के इलाके पर कब्जा कर लिया था. बाद में उत्तर कोरिया की सेना की मदद से रूस ने इस इलाके से यूक्रेनी सेना को खदेड़ कर वापस रशिया में मिला लिया था. लेकिन रूसी सेना वहां रुकी नहीं और फिर कुर्स्क से सटे सुमी की तरफ बढ़ने लगी. इसी तरह से रूस के बेलग्रोड इलाके में यूक्रेनी सेना के ड्रोन अटैक के बाद, रूसी सेना ने बॉर्डर पार कर निकटवर्ती (यूक्रेनी) प्रांत खारकीव में कूच कर दिया. 

तेल डिपो पर ड्रोन अटैक के बावजूद पुतिन आश्वस्त

ऐसे में भले, ड्रोन अटैक कर यूक्रेन ने रूस की तेल रिफाइनरी और ऑयल डिपो पर जबरदस्त हमले किए हैं, लेकिन पुतिन को विश्वास है कि ग्राउंड पर रूसी सेना की स्थिति बेहद मजबूत है. यही वजह है कि पुतिन ने यूक्रेन के ताजा प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. साथ में ये भी कह दिया है कि यूक्रेन की राजधानी कीव में मौजूदा (जेलेंस्की) सरकार को बनाए रखना रूस के प्लान में नहीं है.

माना जा रहा है कि यूक्रेन ने अपना ताजा प्रस्ताव, बेलारूस के राष्ट्रपति लुकाशेंको के जरिए पुतिन तक पहुंचाया था. क्योंकि, लुकाशेंको ने दो-तीन दिन पहले रूस पहुंचकर पुतिन से मुलाकात की थी. (वार-पलटवार, युद्धबंदी और रूस-यूक्रेन के बीच लुका डिप्लोमेसी)

पुतिन ने दावा किया कि यूक्रेन से जीते इलाकों में भले यूक्रेनी सेना घुसपैठ कर आतंकी हमले करे, लेकिन उन्हें तुरंत खत्म कर दिया जाएगा. 

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