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पड़ोसी देशों की उथल-पुथल पर नजर रखे सेना: राजनाथ

साइबर, सूचना, संचार, व्यापार और वित्त सभी भविष्य के संघर्षों का अभिन्न अंग बन गए हैं. ऐसे में यह आवश्यक है कि सशस्त्र बलों को योजना बनाते और रणनीति बनाते समय इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखना होगा.

—-आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान में चल रही उथल-पुथल के बीच देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के टॉप कमांडरों से पड़ोस में चल रहे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखने का आह्वान किया है. रक्षा मंत्री ने हाइब्रिड युद्ध को लेकर भी सेना से कमर कसकर रखने का निर्देश दिया है.

राजधानी दिल्ली में चल रहे आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस (एसीसी) को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने “वर्तमान जियोपॉलिटिकल (भू-रणनीतिक) अनिश्चितताओं और जटिल वैश्विक स्थिति” का उल्लेख किया. रक्षा मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि “वर्तमान विश्व एक दूसरे से जुड़ा हुआ है और ऐसी घटनाएं चाहे हमारे पड़ोस में हो या दूर के देशों में, सभी को प्रभावित करेंगी.”

रक्षा मंत्री ने कहा कि “हाइब्रिड युद्ध सहित अपरंपरागत और असममित युद्ध, भविष्य के पारंपरिक युद्धों का हिस्सा होंगे. साइबर, सूचना, संचार, व्यापार और वित्त सभी भविष्य के संघर्षों का अभिन्न अंग बन गए हैं. ऐसे में यह आवश्यक है कि सशस्त्र बलों को योजना बनाते और रणनीति बनाते समय इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखना होगा.”

साउथ ब्लॉक में चल रहा है आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस (1-4 अप्रैल)

वर्ष में दो बार थलसेनाध्यक्ष की अगुवाई में इंडियन आर्मी के सभी टॉप कमांडर्स देश की रक्षा-सुरक्षा की समीक्षा करते हैं. साथ ही देश के समक्ष ऑपरेशन्ल चुनौतियों पर विचार-विमर्श करते हैं. चीन और पाकिस्तान से सटी सीमाओं की स्थिति, जम्मू कश्मीर के हालात और आंतरिक सुरक्षा, इस सम्मेलन का मुख्य चार्टर है. आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस (एसीसी), सभी वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को ऐसा ही मंच प्रदान करता है. वर्ष 2025 का ये पहला सम्मेलन है. सम्मेलन को रक्षा मंत्री भी संबोधित करते हैं.

गुरूवार को एसीसी में बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि “वर्तमान गतिशील भू-रणनीतिक परिवर्तनों और अनिश्चितताओं के साथ चल रहे वैश्विक सुरक्षा परिदृश्यों को ध्यान में रखते हुए सशस्त्र बलों को दीर्घकालिक और अल्पकालिक दोनों चुनौतियों का समाधान करते हुए गतिशील योजना तैयार करनी चाहिए.”

राजनाथ सिंह ने मिलिट्री इंटेलिजेंस में आधुनिक तकनीक को शामिल करने पर भी जोर दिया.

चीन-पाकिस्तान की सीमाओं को लेकर क्या कहा राजनाथ ने

उत्तरी सीमाओं पर मौजूदा स्थिति को लेकर रक्षा मंत्री ने सैनिकों पर पूरा भरोसा जताया और सशस्त्र बलों की दृढ़ता और सतर्कता की सराहना की। रक्षा मंत्री ने बीआरओ के प्रयासों की सराहना की जिसके कारण कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए पश्चिमी और उत्तरी दोनों सीमाओं पर सड़क संपर्क सुविधाओं में भारी सुधार हुआ है.

पश्चिमी सीमाओं की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारतीय सेना के कड़े रुख की सराहना की. रक्षा मंत्री ने कहा, “मैं जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खतरे से निपटने में सीएपीएफ/पुलिस बलों और सेना के बीच बेहतर तालमेल की सराहना करता हूं. ऐसे समन्वित अभियान जम्मू-कश्मीर में क्षेत्र में स्थिरता बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं और आगे भी यह जारी रहना चाहिए.”

विदेशी सेनाओं के साथ सहयोग बनकर राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाएं

रक्षा मंत्री ने विदेशी सेनाओं के साथ स्थायी सहयोगात्मक संबंध बनाकर राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाने के लिए सैन्य कूटनीति में सेना द्वारा किए गए महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की और इसमें डिफेंस अटैचे (डीए) की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी बल दिया. उन्होंने कहा कि हमें संगठनात्मक उद्देश्य के अनुरूप डीए की भूमिका के पुनर्निर्देशन पर विचार-विमर्श करना चाहिए.

अंत में उन्होंने कहा कि रक्षा कूटनीति, स्वदेशीकरण, सूचना युद्ध, रक्षा ढांचा और सेना के आधुनिकीकरण से संबंधित मुद्दों पर हमेशा ऐसे मंच पर विचार-विमर्श किया जाना चाहिए. सशस्त्र बलों को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए जब भी आवश्यक हो, सैद्धांतिक परिवर्तन किए जाने चाहिए. (https://x.com/rajnathsingh/status/1907716942175359271)