किर्गिस्तान में एससीओ की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सामने बैठे पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को खूब भिगो भिगोकर मारा है. पहलगाम नरसंहार और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने बिना नाम लिए पाकिस्तान को जमकर खरी खोटी सुनाई. हिंदी में राजनाथ सिंह के बोले गए एक-एक शब्द ख्वाजा आसिफ पर भारी पड़ रहे थे. तो वहीं पाकिस्तान के मददगार चीन पर भी राजनाथ सिंह तंज कसते रहे.
बैठक में पाकिस्तान के सामने भारत ने सख्त संदेश दिया कि आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस है. आतंकवाद पर डबल स्टैंडर्ड वाला गेम नहीं चलेगा. आतंकवाद पर दोहरे मानदंडों के लिए कोई जगह नहीं है.
आतंकवादियों के शरणार्थियों पर कार्रवाई से संकोच न करे एससीओ: राजनाथ सिंह
राजनाथ सिंह ने जब एससीओ के रक्षा मंत्रियों के सामने दहाड़ना शुरु किया, तो पाकिस्तानी रक्षा मंत्री बगलें झांकने को मजबूर हो गए. राजनाथ सिंह ने कहा, हमें स्टेट स्पॉन्सर क्रॉस बॉर्डर आतंकवाद को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए जो किसी राष्ट्र राज्य की संप्रभुता पर ही हमला करता है, किसी भी दोहरे मापदंड के लिए कोई जगह नहीं है और एससीओ को उन लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने में संकोच नहीं करना चाहिए जो आतंकवादियों की मदद करते हैं, उन्हें शरण देते हैं और सुरक्षित पनाहगाह प्रदान करते हैं.
आतंकवाद का कोई धर्म और राष्ट्रीयता नहीं होती: राजनाथ सिंह
राजनाथ सिंह ने किर्गिस्तान में पहलगाम नरसंहार का जिक्र किया, जिसमें 26 पर्यटकों को आतंकियों ने धर्म पूछ-पूछकर मारा था. इस घटना ने पूरी मानवता को झकझोर दिया. जिसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान को सबक सिखाया था. भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए यह दिखाया है कि आतंकवाद के ठिकानों को अब बख्शा नहीं जाएगा.
ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बोलते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, “हमारा ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद और उसके अपराधियों के प्रति हमारे जीरो-टॉलरेंस दृष्टिकोण का प्रमाण था, जिसका इस प्रतिष्ठित मंच (एससीओ) ने समर्थन किया था. लेकिन हमारी सामूहिक विश्वसनीयता की असली परीक्षा निरंतरता में ही है. हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता नहीं होती और न ही कोई धर्म होता है. कोई भी शिकायत, वास्तविक हो या काल्पनिक, आतंकवाद और मानवीय क्षति का बहाना नहीं बन सकती.”
विश्व के लिए सबसे बड़ा खतरा है आतंकवाद: राजनाथ सिंह
राजनाथ सिंह ने कहा, “हम उग्रवाद, कट्टरपंथ और आतंकवाद के रूप में एक बढ़ती चुनौती का भी सामना कर रहे हैं. आतंकवाद उभरती वैश्विक व्यवस्था के लिए सबसे गंभीर खतरा बन गया है. इसी पृष्ठभूमि में हमारे साझा मूल्यों के आधार पर एससीओ एक संगठन के रूप में उभरा. एससीओ ने आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई में ऐसे कृत्यों और विचारधाराओं की निंदा की है. इसलिए आतंकवाद-रोधी प्रयास इस संगठन का एक मूलभूत सिद्धांत है.”

