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कोलंबो में मोदी, चीन को पहुंच गया संदेश

हिंद महासागर की सुरक्षा के दृष्टिकोण से श्रीलंका कितना अहम है, इसका अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है, कि पिछले 10 साल में चौथा ऐसा मौका है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोलंबो पहुंचे हैं. अनुरा दिसानायके के सत्ता में आने के बाद पहली बार कोलंबो में पीएम मोदी ने द्विपक्षीय वार्ता की है.

दरअसल श्रीलंका, भारत के लिए सामरिक दृष्टि से बेहद अहम पड़ोसी है, क्योंकि भारत और श्रीलंका एक दूसरे से समुद्री सीमा साझा करते हैं. हिंद महासागर में चीन के बढ़ता प्रभाव भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है. ऐसे में श्रीलंका से मजबूत संबंध भारत के लिए रणनीतिक तौर पर महत्व बढ़ा देते हैं. अनुरा दिसानायके ने पीएम मोदी से एक बार फिर वादा किया है कि भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ श्रीलंका अपनी भूमि का इस्तेमाल नहीं होने देगा.

भारत की सुरक्षा के खिलाफ कोई अनुमति नहीं: दिसानायके

पीएम मोदी और अनुरा दिसानायके के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में कई रक्षा-सुरक्षा के मुद्दों पर सहमति जताई गई है. इस दौरान श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने कहा, “श्रीलंका के अपने क्षेत्र का उपयोग किसी भी ऐसे तरीके से करने की अनुमति नहीं देगा जो भारत की सुरक्षा तथा क्षेत्रीय स्थिरता के लिए प्रतिकूल हो। मैंने विशेष आर्थिक क्षेत्र से अलग महाद्वीपीय शेल्फ की बाहरी सीमाओं की स्थापना के लिए संयुक्त राष्ट्र आयोग के समक्ष श्रीलंका के दावे से संबंधित द्विपक्षीय चर्चाओं को शीघ्र आयोजित करने में प्रधानमंत्री मोदी से हस्तक्षेप का अनुरोध किया.”

दक्षिण एशिया में खड़े होने की क्षमता रखते हैं भारत-श्रीलंका

अनुरा दिसानायके ने पीएम मोदी को उनकी मदद के लिए थैंक्यू देते हुए कहा, “भारत और श्रीलंका दक्षिण एशिया में खड़े होने की क्षमता रखते हैं और इस दिशा में हमारा एक साझा उद्देश्य हैं. हम ऐसे पड़ोसी हैं जिनके बीच लंबे समय से गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं और हमारे  संबंध साझा मूल्यों, आपसी सम्मान और समान हितों पर आधारित हैं.  बौद्ध धर्म भारत से हमें मिला सबसे कीमती उपहार है.”

भारत और श्रीलंका के बीच कौन-कौन से समझौते हुए?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के बीच वार्ता के बाद भारत और श्रीलंका ने रक्षा सहयोग संबंधी महत्वाकांक्षी समझौते पर पहली बार हस्ताक्षर किए. श्रीलंका के पूर्वी क्षेत्र में दिल्ली की बहु-क्षेत्रीय अनुदान सहायता पहुंचाने के लिए एक और समझौता किया गया. प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति दिसानायके ने सामपुर सौर ऊर्जा परियोजना का भी डिजिटल माध्यम से उद्घाटन किया.  समझौतों की जानकारी देते हुए अनुरा दिसानायके ने कहा, “हमें श्रीलंका और भारत के बीच ऊर्जा, रक्षा सहयोग, स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और ऋण पुनर्गठन के क्षेत्रों से संबंधित द्विपक्षीय उपकरणों के आदान-प्रदान से भी खुशी हुई.” (https://x.com/narendramodi/status/1908518910678151598)

श्रीलंका के लिए पीएम मोदी ने की बड़ी घोषणाएं

पीएम मोदी ने ऐलान किया कि “भारत, श्रीलंका के पूर्वी प्रांतों के विकास के लिए लगभग 240 करोड़ श्रीलंकाई रुपए की सहायता देगा. पीएम मोदी ने कहा, इसके अलावा ब्याज दरों में कटौती का निर्णय लिया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत आज भी श्रीलंका के साथ मजबूती से खड़ा है. भारत का सबका साथ, सबका विकास का दृष्टिकोण केवल देश तक सीमित नहीं, बल्कि साझेदार देशों की प्राथमिकताओं को भी उतना ही महत्व देता है. मुझे यह बताते हुए अत्यन्त खुशी है कि 1960 में गुजरात के अरावली में मिले भगवान बुद्ध के अवशेष को श्रीलंका में दर्शन के लिए भेजा जा रहा है. त्रिंकोमाली के थिरुकोनेश्वरम मंदिर के जीर्णोद्धार में भारत सहयोग देगा.”

भारत-श्रीलंका के बीच मछुआरों पर हुई बात

श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने बताया, “मैंने कई परियोजनाओं के लिए प्रधानमंत्री मोदी से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया और मछुआरों के मामले में भी हस्तक्षेप करने की आवश्यकता जताई. मैंने अनुरोध किया कि अवैध, असूचित और अनियमित  मछली पकड़ने पर अंकुश लगाने के लिए उपाय किए जाएं. पड़ोसी पहले भारत की विदेश नीति है और इस नीति के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीलंका की आर्थिक सुधार प्रक्रिया के लिए भारत की पूर्ण प्रतिबद्धता और समर्थन व्यक्त करते हैं.”

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