पहली बार देश के किसी स्वदेशी प्राइवेट शिपयार्ड को जंगी जहाज एक्सपोर्ट करने का ऑर्डर मिला है. गुजरात के स्वान डिफेंस एंड हैवी इंडस्ट्रीज लिमिटेड को ओमान की रॉयल नेवी के लिए एक स्टेट ऑफ द आर्ट ट्रेनिंग शिप बनाने का डिफेंस एक्सपोर्ट ऑर्डर मिला है.
स्वान डिफेंस लिमिटेड (पूर्व में रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड को अगले 18 महीनों में इस जहाज को रॉयल ओमान नेवी को बनाकर सौंपना है. ये जहाज, ओमान की नौसेना की ट्रेनिंग और मेरीटाइम ऑपरेशन्स में मदद करेगा.
कंपनी ने बयान जारी कर बताया है कि एक्सपोर्ट किए जाने वाला ये जहाज, 104 मीटर लंबा और 14 मीटर चौड़ा है. इस जहाज का डिस्प्लेसमेंट (वजन) करीब 3500 टन है और इसमें 70 कैडेट-ऑफिसर्स को ट्रेनिंग दी जा सकती है. ये जहाज, मॉर्डन क्लासरूम, ट्रेनिंग ऑफिस और कैडेट के रहने के लिए केबिन से सुस्जित होगा. जहाज में स्टेट ऑफ द आर्ट नेविगेशन सिस्टम, एडवांस कम्युनिकेशन शूट और हेलीकॉप्टर के ऑपरेशन्स करने की क्षमताएं भी शामिल होंगी.
गुजरात के पिपावाव शिपयार्ड में बनेगा ओमान के लिए जहाज
कंपनी के मुताबिक, ओमान के इस लैंडमार्क एक्सपोर्ट ऑर्डर से भारत की स्वदेशी शिपबिल्डिंग क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखाने का मौका है. इस ऑर्डर से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध और मेरीटाइम कॉरपोरेशन भी मजबूत होगा.
स्वान डिफेंस का गुजरात के अमरेली जिले में पिपावाव नाम से शिपयार्ड है. शिपयार्ड में 662मीटर X 65 मीटर का एक ड्राई डॉकयार्ड है, जहां प्रति वर्ष 1.64 लाख टन फैब्रिकेशन हो सकता है.
भारत के सभी जंगी जहाज अब बन रहे हैं स्वदेशी शिपयार्ड में
उल्लेखनीय है कि इस वक्त भारतीय नौसेना का कोई भी जंगी जहाज, विदेश में तैयार नहीं हो रहा है. देश के अलग-अलग शिपयार्ड में नौसेना के 50 से ज्यादा युद्धपोत का निर्माण चल रहा है. इस वर्ष 20 से ज्यादा नए जंगी जहाज, भारतीय नौसेना के जंगी बेड़े में शामिल होने जा रहे हैं. इसके अलावा, भारतीय तटरक्षक बल के छोटे जहाज का भी निर्माण देश में चल रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया के साथ-साथ मेक फॉर द वर्ल्ड की नीति के तहत, रक्षा क्षेत्र की कंपनियां अब मित्र-देशों को भी हथियार और दूसरे सैन्य साजो सामान का निर्यात कर रही हैं.

