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रूसी तेल पर टैरिफ घटा, लेकिन ट्रंप के दावे पर सवाल

भारत पर रूसी तेल खरीद को लगाया गया 25 प्रतिशत टैरिफ भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खत्म कर दिया है. भारत के साथ ट्रेड डील लागू करने के तहत ये अतिरिक्त कदम उठाने की घोषणा की है. राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर से ये दावा किया है कि भारत ने प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रूस से तेल खरीद रोकना का वादा किया है.

वहीं व्हाइट हाउस के बयान के मुताबिक, अमेरिका की ओर से भारतीय सामानों पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ 7 फरवरी, 2026 से हटा दिए गए हैं. भारत ने अगले 10 वर्षों में रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए अमेरिका के साथ एक रूपरेखा पर भी सहमति जताई है.

रूसी तेल पर लगा टैरिफ हटा, ट्रंप ने कार्यकारी आदेश पर किए हस्ताक्षर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए. इस आदेश में लिखा है, “मुझे वरिष्ठ अधिकारियों से सूचना और सिफारिश मिली है कि भारत ने कार्यकारी आदेश 14066 के दिशा में कदम उठाए हैं और खासकर रूस से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से तेल खरीद रोकने का वादा किया है. साथ ही भारत, अमेरिका से तेल खरीद करेगा.”

पिछले साल अगस्त में अमेरिका ने रूसी कच्चे तेल की खरीद पर भारत से आने वाले सामानों पर 25 प्रतिशत पारस्परिक और अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाते हुए कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था. लेकिन अब संबंधों में नरमी आने और भारत की कूटनीति के आगे पस्त होने के बाद अमेरिका ने टैरिफ घटा कर 18 प्रतिशत कर दिया है.

रूसी तेल पर अमेरिका के दावे पर क्या है भारत का जवाब?

अमेरिका बार-बार दावा कर रहा है कि भारत अब रूस से नहीं अमेरिका से तेल खरीदेगा. इस दावे पर भारत की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है. लेकिन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “जहाँ तक भारत की ऊर्जा आपूर्ति का सवाल है, सरकार कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से कह चुकी है कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की पहली प्राथमिकता है. और ये करने के लिए बाज़ार की परिस्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात के मुताबिक ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी रणनीति का आधार है. भारत ने सभी कदम इसी सोच के साथ उठाए हैं और आगे भी उठाते रहेंगे.”

भारत किसी से भी तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र, लेकिन भारत के रुख में नहीं आया बदलाव: रूस

अमेरिका के दावे और भारत के रूस से तेल खरीदने को लेकर मॉस्को ने भी प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाखारोवा ने कहा है कि भारत के रूस के साथ ऊर्जा सहयोग के अपने रुख पर फिर से विचार करने का कोई कारण नहीं है. व्यापार दोनों देशों के लिए लाभकारी है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में योगदान देता है. 

मारिया ने कहा, ”भारत अपना रुख कई मौकों पर स्पष्ट कर चुका है. हम भारत के साथ सहयोग जारी रखेंगे. हम इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि रूसी हाइड्रोकार्बन की खरीद पारस्परिक रूप से लाभकारी है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में योगदान देती है. हम इस क्षेत्र में अपने भारतीय साझेदारों के साथ निकट सहयोग जारी रखने के लिए तैयार हैं.”

रूसी विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि “भारत किसी भी देश से कच्चा तेल खरीद सकता है और इसमें कोई नई बात नहीं है कि भारत अपने तेल सोर्स को डाइवर्सिफाई करना चाहता है.”

मारिया ने वॉशिंगटन पर कटाक्ष करते हुए ये भी कहा कि “अमेरिका के लिए यह नया नहीं है कि वह किसी स्वतंत्र देश पर व्यापार के मामले में दबाव डालना अपना अधिकार समझता है.”

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