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क्रेमलिन में डिप्लोमेसी का Czar, ट्रंप की धमकी बेअसर

अ,गले महीने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नई दिल्ली दौरे और अरुणाचल प्रदेश में हुए ताजा सीमा विवाद के बीच बीजिंग के दौरे पर हैं भारतीय एनएसए अजीत डोवल. चीन में एनएसए डोवल और वांग यी के साथ भारत-चीन विशेष प्रतिनिधि वार्ता में है.

डोवल और वांग यी दोनों ही सीमा वार्ता प्रक्रिया के लिए नियुक्त विशेष प्रतिनिधि(एसआई) हैं. इस प्रक्रिया के तहत दोनों देशों के बीच एलएसी पर कूटनीतिक वार्ता के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश हो रही है.

लेकिन इस बार अजीत डोवल का ये दौरा बेहद खास है, क्योंकि अगले महीने यानि सितंबर में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नई दिल्ली दौरा होने वाला है. ब्रिक्स सम्मेलन में शी जिनपिंग हिस्सा लेंगे, तो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचेंगे. इसी के तहत डोवल चीन और विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने रूस के दौरे पर हैं. हालांकि शी जिनपिंग के दौरे को लेकर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन वैश्विक स्तर पर जिस तरह का माहौल बन रहा है, अमेरिका की मनमानी के खिलाफ ब्रिक्स में राष्ट्राध्यक्षों का एकजुट होना कहीं न कहीं अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संदेश देने वाला होगा.

डोवल और वांग यी के बीच होगी बैठक, सीमा विवाद सुलझाने पर जोर

सुरक्षा सलाहकार मंगलवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा विवाद पर भारत-चीन के विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत के 25वें दौर के लिए बैठक करेंगे. भारत और चीन की ओर से इस बैठक पर बारीकी से नजर रखी जा रहा है.

डोवल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता प्रक्रिया के लिए तय विशेष प्रतिनिधि हैं. यह प्रक्रिया 2003 में भारत-चीन सीमा के 3,488 किलोमीटर लंबे और जटिल सीमा विवाद को पूरी तरह से सुलझाने के लिए शुरू की गई थी.

बैठक में सिर्फ सैनिकों की तैनाती और तनाव कम करने पर ही बातचीत नहीं होगी, बल्कि डोवल, सीमा-पार आतंकवाद से जुड़ी अपनी चिंताएं भी उठा सकते हैं.

बीजिंग में होने वाली वार्ता से पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पड़ोसी से संबंधों पर बड़ा बयान दिया है. एस जयशंकर ने कहा है कि चीन के साथ अच्छे संबंधों के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बेहद जरूरी है.

हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी इलाकों में चीनी सैनिकों और चीन के निर्माण कार्य को देखा गया था. ऐसे में डोवल और वांग यी के बीच इस मुद्दे पर बातचीत और विवाद के कूटनीतिक समाधान पर जोर रहेगा.

11-12 सितंबर को दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन

डोवल की चीन से बातचीत इसलिए भी दुनिया की नजर में है, क्योंकि यह चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग की भारत यात्रा से ठीक पहले हो रही है. संभावना है कि 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए शी जिनपिंग आएंगे, हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.

माना जा रहा है कि अगर शी जिनपिंग नई दिल्ली पहुंचते हैं तो ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ उनकी बैठक भी हो सकती है, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की पहलों पर चर्चा की जाएगी.

इससे पहले दोनों नेता पिछले साल (2025) अगस्त में तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे.

मॉस्को के दौरे पर एस जयशंकर

ब्रिक्स सम्मेलन से पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर मॉस्को पहुंचे हैं. विदेश मंत्रालय (एमईए) ने बताया कि विदेश मंत्री रूसी संघ के प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव के निमंत्रण पर रूस की आधिकारिक यात्रा कर रहे हैं. वे व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (आईआरआईजीसी-टीईसी) के 27वें सत्र की सह-अध्यक्षता करेंगे.

माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नई दिल्ली की संभावित यात्रा पर भी चर्चा होगी. ब्रिक्स सम्मेलन में आने के लिए पुतिन को न्योता भेजा गया है. अगर पुतिन और शी जिनपिंग नई दिल्ली पहुंचते हैं तो ये मंच वेस्ट देशों खासकर अमेरिका के लिए शक्ति प्रदर्शन जैसा होगा.

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समय और उस शिखर सम्मेलन में पुतिन-जिनपिंग का शामिल होना बेहद अहम है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के रवैए से दुनिया त्रस्त है. कभी टैरिफ की धमकी तो कभी वेनेजुएला और ईरान जैसे देशों पर हमला करके माहौल अशांत है. यूरोप में भी हलचल तेज है, अमेरिका और यूरोपीय देशों में संबंध लगातार गिर रहे हैं, तो यूक्रेन की मदद के कारण रूस और यूरोपीय देशों में भी तनातनी है. ऐसे में सामरिक और ग्लोबल दृष्टिकोण से सितंबर के महीने में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन पर पूरे विश्व की नजर है.

आपको बता दें कि ब्रिक्स दुनिया के 11 तेजी से बढ़ते देशों का एक बड़ा समूह है. इसमें भारत भी शामिल है. पहले इसमें केवल 5 देश ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका थे. इन्हीं देशों के पहले अक्षर से ब्रिक्स का निर्माण हुआ. साल 2024 में 4 नए देश जुड़े. इनमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और यूएई शामिल है. साल 2025 में इंडोनेशिया भी इस समूह का हिस्सा बन गया. यह समूह मिलकर दुनिया की लगभग 49.5 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है. दुनिया की कुल कमाई यानी जीडीपी का लगभग 40 फीसदी और वैश्विक व्यापार का 26 फीसदी हिस्सा इन्हीं 11 देशों के पास है.

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