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होर्मुज संकट टला नहीं, अब Red Sea पर मंडराया खतरा

ईरान ने होर्मुज के बाद दुनिया के एक और मुख्य जलमार्ग को बंद करने की धमकी दे दी है. ईरान ने बाब अल मंदेव (लाल सागर के मुहाने पर अहम स्ट्रेट) को भी ब्लॉक करने का ऐलान किया है. बाल अल मंदेव से सटे यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का जबरदस्त कब्जा है.

ऐसे में इजरायल की ओर से हिजबुल्लाह पर हमले तेज होने और दक्षिणी लेबनान के ऐतिहासिक किले पर इजरायली झंडा लहराने के बाद ईरान ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है. ईरान ने अमेरिका के साथ सभी अप्रत्यक्ष वार्ताएं रोक दी हैं, साथ ही पूरी दुनिया को डराने के लिए अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाद बाब अल मंदेब को रोकने का बात कही है.

ईरान ने साफ-साफ कहा है कि अगर इजरायल ने लेबनान पर हमले बंद नहीं किए और अमेरिका ने फिर अटैक किया. हूती के जरिए लाल सागर पर नाकेबंदी लगाई जा सकती है.

आपको बता दें कि साल 2024 में हूती ऐसा कर चुके हैं जब इजरायल-हमास का युद्ध चल रहा था.

ईरान ने बाब अल मंदेव मार्ग बंद करने की दी धमकी

ईरान ने लेबनान में हुए ताजा हमलों के बाद बाब अल मंदेव बंद करने की धमकी दे डाली है, जिसके बाद यूरोप से लेकर एशिया तक खलबली मच गई है, क्योंकि होर्मुज के बाद बाब अल मंदेव एक प्रमुख जलमार्ग है, जिसपर दुनियाभर के देशों का व्यापार निर्भर करता है. बाब अल मंदेव लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और स्वेज नहर के रास्ते यूरोप-एशिया व्यापार का दरवाजा है.

होर्मुज बंद होने के बाद खाड़ी देशों के तेल व्यापार का यही रास्ता इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन अगर ईरान-हूती विद्रोहियों के साथ मिलकर ये मार्ग बंद करने में कामयाब हो जाता है तो दुनियाभर में हाहाकार मच जाएगा. यहां समुद्री यातायात रुकता है तो तकरीबन पूरी दुनिया में भीषण उर्जा संकट आना तय है.

बाब अल मंदेव को कैसे रोकेगा ईरान, जानिए

बाब अल-मंदेब यमन और जिबूती के बीच स्थित है. 20 मील चौड़े और 70 मील लंबे बाब अल-मंदेव नाम का यह समुद्री जलडमरूमध्य हॉर्न ऑफ अफ्रीका को अरब प्रायद्वीप से अलग करता है. इसकी भौगोलिक स्थिति इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों में से एक बनाती है.

यह एक संकरा मार्ग, बेहद अहमियत रखता है, ये स्वेज नहर की ओर लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है, जो हिंद महासागर में खुलती है. यह स्वेज नहर के रास्ते यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया के बीच यात्रा करने वाले जहाजों के लिए एक प्रवेश द्वार का काम करता है.

यमन के बड़े हिस्से पर काबिज हूती विद्रोही ईरान के सबसे बड़े सहयोगी हैं. ऐसे में ईरान के इशारे पर हूती विद्रोही बाब अल-मंदेव से होकर गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को निशाना बना सकते हैं और शिपिंग में बाधा डाल सकते हैं.

हूतियों के पास अत्याधुनिक हथियारों और मिसाइलों का जखीरा मौजूद हैं और मिसाइलें भी हैं, जो उन्हें ईरान ने ही दी हैं. जब हमास के खिलाफ इजरायल ने अपना बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरु किया था तो रेड सी में इन्हीं मिसाइलों और हथियार के जरिए हूती विद्रोही, इजरायली जहाजों को टारगेट कर रहे थे. नवंबर 2023 से हूतियों ने रेड सी मार्ग में 100 से ज्यादा हमले किए हैं, जिनसे 60 से अधिक देशों के जहाज प्रभावित हुए थे. साल 2024 के अंत तक बाब अल-मंदेब से गुजरने वाला तेल 50 प्रतिशत से ज्यादा कम हो गया था और हूतियों के डर के कारण एलएनजी टैंकरों की आवाजाही लगभग बंद हो गई थी.

एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस से बात कर रहा ईरान

लेबनान पर इजरायली हमलों से बौखलाए ईरान और एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस में शामिल उसके सहयोगी समूहों ने इजराली हमलों का जवाब देने और अतिरिक्त मोर्चे खोलने पर विचार करने का फैसला किया है.

एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस ईरान के नेतृत्व में मध्य पूर्व में सक्रिय एक अनौपचारिक सैन्य और राजनीतिक गठबंधन है. इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल के प्रभाव का मुकाबला करना और फिलिस्तीनी समूहों का समर्थन करना है. इस गठबंधन में कई राज्य और गैर-राज्य सशस्त्र समूह शामिल हैं, जिन्हें ईरान द्वारा हथियार, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. इस ग्रुप में हिजबुल्लाह, हमास, हूती और इराक की मिलिशिया शिया समूह शामिल हैं.

आईआरजीसी के कुद्स फोर्स के कमांडर इस्माइल कानी ने कहा है कि “विचाराधीन उपायों में होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से बंद करना और इजरायल तथा उसके समर्थकों पर दबाव बनाने के साधन के रूप में बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य सहित अन्य मोर्चों को सक्रिय करना शामिल है.”

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