अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम की धज्जियां उड़ चुकी है. अमेरिका, ईरान पर हमले करके समझौता करने का दबाव बनाने की कोशिश में है, तो वहीं ईरान ने अमेरिका को तगड़ा जवाब देते हुए बदला लेने में पूरी ताकत झोंक दी है. ईरान ने अमेरिकी सेना के एफ-35, एफ-15 और एफ-16 लड़ाकू विमानों के ठिकानों को पूरी तरह तबाह करने का दावा किया है.
वहीं होर्मुज की खाड़ी जंग का मैदान बन गई है. ईरानी नेवी ने होर्मुज को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया है और धमकाया है कि अगर कोई भी जहाज निकला तो उसे उड़ा दिया जाएगा.
खाड़ी देश दहशत में हैं क्योंकि अमेरिका से बदला लेने के लिए कुवैत,बहरीन और जॉर्डन में मिसाइलों की बौछार कर दी है, जिसके बाद कुवैत और बहरीन में एयर सायरन बजाए जा रहे हैं और ईरानी मिसाइलों से मुकाबला किया जा रहा है.
होर्मुज पार कर रहे दो जहाजों पर हमले का दावा
ईरान की सैन्य कमान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का ऐलान करते हुए किसी भी जहाज को निशाना बनाने की चेतावनी दी है. आईआरजीसी ने कहा है कि अब तेल टैंकर्स और कारोबारी जहाजों समेत कोई भी पोत इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने की कोशिश करेगा तो उस पर हमला किया जाएगा.
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है.
ईरानी नौसेना के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहे दो “नियमों का उल्लंघन करने वाले” जहाजों को निशाना बनाया गया है.
हालांकि, ईरान के दावे के कुछ ही देर बाद अमेरिकी सेना ने इसका खंडन किया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं हुआ है और किसी भी जहाज को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है.
अमेरिका के एयरबेस और कंट्रोल सेंटर पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला: आईआरजीसी
ईरान का कहना है कि अमेरिका के ताजा हमलों के बाद उसने जॉर्डन के अल-अजराक एयर बेस और उसके कंट्रोल सेंटर पर 12 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं. आईआरजीसी के मुताबिक, इस मिसाइल हमले में वहां मौजूद अमेरिकी सेना के एफ-35, एफ-15 और एफ-16 लड़ाकू विमानों के ठिकानों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिए गए हैं और भारी संख्या में अमेरिकी फाइटर जेट्स को नुकसान पहुंचा है. ईरानी सेना ने इन हमलों को अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के कारज, नजर आबाद और पिशवा इलाकों के पास किए गए हमलों का जवाब बताया है.
आईआरजीसी ने कहा, “जब तक दुश्मन अपनी आक्रामक हरकतें जारी रखेगा, हमारा ऑपरेशन जारी रहेगा.”
अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट पर ईरान का अटैक, बहरीन में बजे सायरन
ईरान की सेना ने दावा किया है कि उसने बहरीन में तैनात अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े को निशाना बनाकर ड्रोन हमले किए हैं. ईरान के मुताबिक, इस ऑपरेशन के दौरान कई विनाशकारी ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया. इन हमलों में विशेष रूप से अमेरिकी पांचवें बेड़े से जुड़े संचार एंटेना (कम्युनिकेशन एंटेना) और पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम के रडार ठिकानों को नुकसान पहुंचा है.
आईआरजीसी की एयरोस्पेस फोर्स और नेवी ने दो चरणों में ऑपरेशन चलाए और अल-सलेम एयर बेस, अहमद अल-जाबेर एयर बेस और शेख ईसा एयर बेस पर मौजूद अमेरिका के 18 अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर नष्ट करने का दावा किया है.
बहरीन के गृह मंत्रालय ने बताया कि “देश के कई इलाकों में सायरन बज रहे हैं. नागरिकों से शांत रहने और पास के सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की गई है.
कुवैत में एयरस्पेस बंद किया गया, दहशत में लोग
कुवैत सिविल एविएशन अथॉरिटी ने ईरानी हमलों के कारण अपने एयरस्पेस को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुवैत आने-जाने वाली सभी उड़ानों के रूट बदल दिए गए हैं और उन्हें दूसरे सुरक्षित रास्तों पर डायवर्ट किया जा रहा है. अथ़ॉरिटी ने बताया है कि जैसे ही हवाई खतरे पूरी तरह खत्म हो जाएंगे, वैसे ही देश के एयरस्पेस को दोबारा खोल दिया जाएगा.
कुवैत की सेना के मुताबिक, उनके एयर डिफेंस सिस्टम आसमान में ईरानी मिसाइलों का मुकाबला कर रहे हैं. और हमले को नाकाम करने की कोशिश कर रहे हैं.
कुवैत की सेना के जनरल स्टाफ ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए, “देश के सभी नागरिकों और लोगों से अपील की है कि वो सुरक्षा और बचाव के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से जारी किए गए दिशा-निर्देशों का पालन करें. किसी भी अफवाह से बचने और सिर्फ स्वीकृत आधिकारिक स्रोतों से ही सही जानकारी हासिल करने की अपील की है.”
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने शांति की अपील की
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मिडिल-ईस्ट जंग पर प्रतिक्रिया दी है. गुटेरेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मिडिल ईस्ट को संकट में और गहराई तक खींचा जा रहा है और इसके नतीजे इस इलाके से कहीं आगे तक जा रहे हैं. इस हफ्ते बड़े हमले हुए हैं और हालात और बिगड़े हैं, जहां सीजफायर कमजोर होता जा रहा है. हमें कमजोर होने के खतरों को कम नहीं आंकना चाहिए. सभी पक्षों को एक डिप्लोमैटिक समझौते की दिशा में काम करना चाहिए. अब और हमले नहीं, अब और बहाने नहीं.”

