पाकिस्तान में पाले-पोसे जा रहे लश्कर ए तैयबा के प्रॉक्सी द रेजिस्टेंस फ्रंट यानि टीआरएफ ने यूरोपीय फाउंडेशन के निदेशक और आतंकवाद विरोधी मामलों के कश्मीरी विशेषज्ञ जुनैद कुरैशी को जान से मारने की धमकी दी है.
ये वही टीआरएफ है जिसके आतंकियों ने पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम नरसंहार को अंजाम दिया था. पिछले साल अमेरिका ने टीआरएफ को आतंकी संगठन घोषित करके शिकंजा कसा था.
5 फरवरी को पाकिस्तान तथाकथित ‘कश्मीर सॉलिडैरिटी डे’ के रूप में अपना सालाना प्रोपेगेंडा अभियान करने वाला है. इस बीच खुलासा हुआ है लश्कर के छद्म टीआरएफ ने कश्मीरी बुद्धिजीवियों की हत्या की धमकियां दी है. सूत्रों के मुताबिक, ये वो बुद्धिजीवी हैं, जो लगातार पाकिस्तान की आतंकी मंशा और पाकिस्तान में फंडेड आतंकी ग्रुप्स को बेबाकी से बेनकाब कर रहे हैं.
टीआरएफ ने दी जाने-माने कश्मीरी एक्सपर्ट को जान से मारने की धमकी
लश्कर-ए-तैयबा ने अपने प्रॉक्सी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट'(टीआरएफ) के तहत यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज (ईएफएसएएस) के निदेशक और आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ जुनैद कुरैशी को जान से मारने की धमकी दी है. यह धमकी टीआरएफ की ब्रांडिंग वाले एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से भेजी गई.
मैसेज में कुरैशी को ‘गद्दार’ कहा गया है. मैसेज में टीआरएफ के आतंकी ये कह रहे हैं कि संगठन को उनकी हत्या करने में ‘कोई हिचक’ नहीं होगी.
आपको बता दें कि पिछले छह महीनों में जुनैद कुरैशी को ये दूसरी बार धमकी मिली है. दरअसल जुनैद कुरैशी उन लोगों में से हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के आतंक और झूठे नैरेटिव के बारे में सही और बेबाक राय देते हैं.
जुनैद कुरैशी ने आईएसआई पर लगाया धमकी का आरोप
जुनैद कुरैशी ने सीधे तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) पर धमकियां देने का आरोप लगाया.
जुनैद के मुताबिक, “यह धमकियां आईएसआई द्वारा भेजी जाती हैं. लश्कर-ए-तैयबा तथा उसका कमांडर शेख सज्जाद गुल इन्हें आगे पहुंचाता है.”
जुनैद ने बताया कि “भेजे हए धमकी भरे पत्र में प्रस्तावित कश्मीरी बुद्धिजीवी थिंक टैंक से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों का भी जिक्र था. ये जानकारियां सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं और केवल सीमित लोगों को ही पता हैं. जिससे सीधे तौर पर पूरे मामले में आईएसआई की भूमिका का संकेत मिलता है.”
जुनैद कुरैशी के मुख्यधारा में लौटने से भड़के आतंकी, अंतर्राष्ट्रीय मंच पर करते हैं पाकिस्तान को बेनकाब
दरअसल जुनैद कुरैशी 1971 में एयर इंडिया की फ्लाइट आईसी-405 के अपहरणकर्ताओं में शामिल हाशिम कुरैशी के पुत्र हैं. हालांकि, उन्होंने अपने पिता की विचारधारा को हमेशा सार्वजनिक रूप से खारिज किया है और स्पष्ट कहा है कि यह अपहरण उनके जन्म से पहले हुआ एक आतंकी कृत्य था.
यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज के माध्यम से कुरैशी ने लगातार पाकिस्तान के ‘कश्मीर में आजादी की लड़ाई’ वाले दावे को बेनकाब किया है. उन्होंने सबूतों के साथ यह दिखाया है कि वास्तव में यह आईएसआई के निर्देश पर लश्कर-ए-तैयबा, हिज्बुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद द्वारा चलाया जा रहा राज्य-प्रायोजित आतंकी अभियान है.
कुरैशी ने कहा कि, “लेटर में कश्मीर पर पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा को ध्वस्त करने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दस्तावेजी सबूत पेश करने के उनके प्रयासों का विशेष रूप से जिक्र किया गया है. पाकिस्तान का सुरक्षा प्रतिष्ठान उन्हें अपने लिए सीधा खतरा मानता है.”
धमकी के लिए इस्तेमाल एन्क्रिप्टेड अकाउंट रावलपिंडी से संचालित: खुफिया सूत्र
खुफिया सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि धमकी देने के लिए इस्तेमाल किया गया एन्क्रिप्टेड अकाउंट रावलपिंडी से संचालित हो रहा है और सीधे तौर पर लश्कर कमांडर शेख सज्जाद गुल के कंट्रोल में है.
यह अकाउंट 24 अगस्त 2025 को एक फर्जी नाम से बनाया गया था और नियमित रूप से टीआरएफ का प्रोपेगेंडा, ऑपरेशनल अपडेट्स और तस्वीरें साझा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. इस धमकी से पाकिस्तान आधारित कमांड और कंट्रोल की भूमिका और स्पष्ट होती है.
साल 1989-2000 तक 5000 से ज्यादा बुद्धिजीवी, पत्रकारों, नेताओं, कश्मीरी नागरिकों की हत्या
आंकड़ों की बात की जाए तो साल 1989 से 2020 के बीच पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों ने आतंकवाद का विरोध करने या भारत का समर्थन करने के कारण 5,000 से अधिक कश्मीरी नागरिकों, पत्रकारों, राजनेताओं और बुद्धिजीवियों की हत्या की है.
- जून 2018 में ‘राइजिंग कश्मीर’ के संपादक शुजात बुखारी की हत्या हुई थी. उन्हें कई महीनों से हिज्बुल मुजाहिदीन की ओर से धमकियां मिल रही थीं.
- अप्रैल 2025 में कुपवाड़ा में सामाजिक कार्यकर्ता गुलाम रसूल माग्रे की भी संदिग्ध आतंकियों द्वारा हत्या कर दी गई थी.
पाकिस्तान की आतंकी मानसिकता उजागर
जुनैद कुरैशी को धमकी दिया जाना एक बार फिर पाकिस्तान के कश्मीर नैरेटिव के दोहरेपन को उजागर कर रहा है. पाकिस्तान 5 फरवरी को कश्मीरियों के साथ एकजुटता का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर उसकी खुफिया एजेंसी आतंकी संगठनों के जरिये उन कश्मीरी आवाजों को डराने, चुप कराने और खत्म करने की कोशिश में है. अंतर्राष्ट्रीय मंच पर जिस तरह से पाकिस्तान, कश्मीर को रोना लेकर बैठ जाता है, इस तरह की धमकी से उसके चेहरे से नकाब उतर चुका है.
दरअसल पाकिस्तान इसलिए बौखलाहट में है, क्योंकि पिछले 10-15 वर्षों में जैश-लश्कर जैसे आतंकी संगठनों की कमर टूट चुकी है. सारे टॉप कमांडर्स मारे जा चुके हैं. साथ ही कश्मीर की जनता भी बुलेट से ज्यादा बैलेट पर भरोसा करने लगी है. पाकिस्तान के आतंकी संगठन अब कश्मीर के युवाओं को बरगला नहीं पा रहे हैं, ब्रेनवॉश नहीं कर पा रहे हैं. क्योंकि कश्मीर के लोगों को ये समझ में आने लगा है कि विकास कितना जरूरी है. युवा अब गन की जगह कलम हाथ में रख रहे हैं. पुलिस-आर्म्ड फोर्सेज में भर्ती हो रहे हैं. इसलिए पाकिस्तानी एजेंसी अब उन बुद्धिजीवियों को धमकाने लगी है, जो पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा का पर्दाफाश करते हैं.

