सत्ता संभालने के 24 घंटे के भीतर रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने का दंभ भरने वाले अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर युद्ध को खत्म करने को लेकर दिया है बड़ा बयान. बयान ये कि उनका प्रशासन इस युद्ध को समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित करेगा. ट्रंप ने साथ ही ये भी कहा कि उनका प्रशासन मिडिल ईस्ट में शांति लाने के लिए भी काम करेगा.
ट्रंप ने साफ तौर से कहा कि यूक्रेन जंग में अमेरिका संसाधनों की बर्बादी हुई है और राष्ट्रपति पर बैठने के बाद इस बात को सुनिश्चित किया जाएगा कि ये बर्बादी न हो.
‘अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी इंस्टीट्यूट’ के लिए अपने आवास में आयोजित एक समारोह में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘‘हम पश्चिम एशिया के लिए काम कर रहे हैं और हम रूस और यूक्रेन पर बहुत मेहनत करेंगे. जो कुछ भी हो रहा है, इसे हमें रोकना होगा.’’
अमेरिकी संसाधनों की बर्बादी और युद्ध रोकना प्राथमिकता
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान और जीत के बाद से रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ ही मिडिल ईस्ट के तनाव रोकने की बात कही है. एक बार फिर से गुरुवार को ट्रंप ने युद्ध रोकने की पैरवी की. अपने आवास मारे-लागो एस्टेट में एक कार्यक्रम संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा है कि हम लोग मिडिल ईस्ट और रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए मेहनत करेंगे. साथ ही ट्रंप इस बात को भी कई बार कह चुके हैं कि उनकी प्राथमिकता युद्ध को समाप्त करना, यूक्रेन को दी जा रही सैन्य सहायता के रूप में हो रही अमेरिकी संसाधनों की बर्बादी को रोकना है.
पुतिन को लेकर सकारात्मक हैं ट्रंप
ट्रंप के पिछले कार्यकाल में उप सहायक के रूप में कार्य कर चुकीं लिसा कर्टिस ने कहा कि यूक्रेन में युद्ध को इस तरह से समाप्त करने की आवश्यकता है जिससे अन्य देशों को अपने पड़ोसियों पर अवैध रूप से आक्रमण करने के लिए प्रोत्साहन ना मिले. कर्टिस ने कहा, ‘‘ट्रंप ने अमेरिका के अन्य पूर्व राष्ट्रपतियों की तुलना में राष्ट्रपति पुतिन के बारे में अधिक सकारात्मक बातें की हैं. उन्होंने रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को समाप्त करने की कोशिश करने की भी बात की है पर हमें ये नहीं पता है कि वह ऐसा किस तरह करेंगे.
लीजा कर्टिस साल 2017 से 2021 के बीच डोनाल्ड ट्रंप की सलाहकार और दक्षिण एवं मध्य एशिया की सुरक्षा परिषद की निदेशक रह चुकी हैं।
भारत के संबंधों को महत्व देंगे ट्रंप
लीजा कर्टिस ने भारत के संबंधों को लेकर भी बड़ा बयान दिया है. लिसा ने कहा है कि, मुझे लगता है कि नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप भारत के साथ वहीं से शुरुआत करेंगे, जहां उन्होंने छोड़ा था. भारत के प्रति उनकी अच्छी भावनाएं और सद्भावना हैं. पीएम मोदी को ट्रंप बहुत मानते हैं, दोनों के व्यक्तिगत संबंध भी हैं. लिसा ने बताया कि ट्रंप के पहले कार्यकाल (2017-2021) के दौरान भारत की अहमियत और चीन की चुनौतियों से निपटने में इसकी भूमिका के कारण अमेरिका-भारत संबंधों में सुधार हुआ था. चीन को लेकर भारत और अमेरिका दोनों की बीच चिंताएं हैं ऐसे में भारत और अमेरिका मिलकर चलेगा.