Breaking News Middle East War Weapons

अमेरिका ने निकाला ट्रंप-कार्ड, F-22 की ईरान में कारपेट बॉम्बिंग

जंग के पांचवें दिन अमेरिका ने अपना ट्रंप का पत्ता निकालकर ईरान में जबरदस्त तबाही मचाई है. अमेरिका ने गेम-चेंजर माने जाने वाले एफ-22 रैप्टर लड़ाकू विमान को जंग के मैदान में उतार दिया है. 

सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर दो एयरक्राफ्ट की तस्वीर साझा की. ये दोनों एयरक्राफ्ट, अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी के आसमान पर उड़ते दिखाई दे रहे थे. इनमें से एक पांचवी पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट एफ-22 रैप्टर था और दूसरा बी-2 बॉम्बर. खास बात है कि उसी दौरान, अमेरिका की सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ईरान के अलग अलग प्रांतों और शहरों में एयर स्ट्राइक कर रही थी. ऐसे में साफ हो गया कि अमेरिका ने अपने तुरुप के पत्ते एफ-22 रैप्टर और बॉम्बर को जंग के मैदान में उतार दिया है. 

देखने में चमगादड़, एफ-22 फाइटर जेट के एक्सपोर्ट पर पाबंदी

F-22 रैप्टर, जो दिखने में एक चमगादड़ जैसा लगा है, अमेरिकी वायु सेना का ऐसा 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जो कम दृश्यता वाली तकनीकों औैर आधुनिक एवियोनिक्स से लैस है. टू इन इंजन यानी दो इंजनों का उपयोग करके ये एक ऐसा हवाई श्रेष्ठता वाला लड़ाकू विमान है जिसका मुकाबला कोई अन्य आधुनिक फाइटर जेट नहीं कर सकता.

दुनिया का सबसे खतरनाक फाइटर जेट है एफ-22 रैप्टर, जिसे अमेरिका ने अपने सबसे करीबी देश इजरायल या नाटो देशों तक को नहीं दिया है. क्योंकि अमेरिका के फेडरल कानून में ये एक ऐसा फाइटर जेट है, जिसके एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगा है. जबकि पूरी दुनिया को हथियार सप्लाई करने के लिए अमेरिका जाना जाता है. अमेरिकी की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा मिलिट्री हार्डवेयर से जुड़ा है.

ट्रंप ने क्यों कि एफ-22 और बॉम्बर से बमबारी

ईरान की कुख्यात आईआरजीसी ने पिछले पांच दिनों से होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों वर ताबड़तोड़ हमले किए हैं. इससे अमेरिका भड़क गया है और ईरान के पश्चिमी और दक्षिणी प्रांतों में हमले कर त्राहिमाम मचा दिया है. रविवार और सोमवार को सेंटकॉम ने ईरान के छह प्रांतों पर ताबड़तोड़ हमले किए. इनमें होर्मुगोजन, मरकाजी, अहवाज, बुशहर, खुजेस्तान और बलूचिस्तान-सिस्तान शामिल थे. 

ईरान में इन हमलों को अंजाम देने के लिए ट्रंप को F-22 रैप्टर फाइटर जेट को बाहर निकालना पड़ा. इस फाइटर जेट ने बी-2 बॉम्बर के साथ मिलकर ईरान में तबाही मचा दी.

अमेरिका का जो दूसरा स्टील्थ एफ-35 जरूर इजरायल, ब्रिटेन, जापान समेत दूसरे नाटो देश इस्तेमाल करते हैं, लेकिन रैप्टर सिर्फ अमेरिका ने अपने लिए रखा है. यही वजह है कि सोमवार को जब एफ22 ने ईरान पर कारपेट बॉम्बिंग की तो ईरान को कानो-कान खबर नहीं लगी. ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम एफ-22 फाइटर जेट को पकड़ ही नहीं पाया और  तबाही मचाकर वापस अपने बेस लौट गया. हालांकि, सेंटकॉम ने ये साफ नहीं किया कि सोमवार के हमले में कितने एफ-22 रैप्टर विमानों का इस्तेमाल किया गया था.

लॉकहीड मार्टिन ने बोइंग के साथ मिलकर तैयार किया 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट

एफ-22 रैप्टर को अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन और बोइंग मिलकर बनाती हैं. 5वीं पीढ़ी के इस फाइटर जेट में रडार क्रॉस-सेक्शन बेहद कम है, जिससे यह दुश्मन के रडार पर लगभग गायब रहता है और अपने ऑपरेशन को अंजाम देकर आसानी से निकल जाता है.

अगर F-22 की स्पीड की बात करें तो ये जेट बिना आफ्टरबर्नर यानी एक्स्ट्रा फ्यूल जलाए आवाज की स्पीड से डेढ़ गुना अधिक यानी मैक 1.5 की रफ्तार से लंबी दूरी तक उड़ान भर सकता है. इसमें अत्यधिक ताकतवर आएसा रडार लगा है, जिससे यह दुश्मन को पहले देखता है और फिर सटीक निशाना लगाकर मार गिराता है. अपनी स्टेल्थ क्षमता बनाए रखने के लिए यह मिसाइलों और बमों को बाहर लटकाने की बजाय अपने अंदर छिपाकर रखता है.

एफ-35 के डिटेक्ट होने के बाद एफ-22 बना मजबूरी

अब ये भी बात कर लेते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति को ईरान के खिलाफ ये ट्रंप कार्ड आखिर क्यों निकालना पड़ा. दरअसल, 28 फरवरी के हमले के बाद जो 40 दिन की जंग हुई थी, उस दौरान, सेंटकॉम ने ईरान के खिलाफ एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट का इस्तेमाल किया था. लेकिन ईरान के एयर डिफेंस ने एफ-35 को डिटेक्ट कर उस पर हमला कर दिया था. हमले में एफ-35 को नुकसान भी पहुंचा था. ऐसे में एफ-35 के स्टील्थ फीचर्स को लेकर सवाल खड़े होने लगे थे.  यही वजह है कि इस राउंड की लड़ाई में ट्रंप को रैप्टर को न निकालना पड़ा.

editor
India's premier platform for defence, security, conflict, strategic affairs and geopolitics.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *