सेना में एक बार फिर महिलाओं ने गिलास-सिलिंग तोड़ते हुए आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज (एएफएमएस) में महानिदेशक (डीजी) का पद ग्रहण किया है. नौसेना की सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन को सरकार ने डीजी-एएफएमएस के पद पर तैनात किया है. इस पद पर पहली बार किसी महिला को नियुक्त किया गया है.
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने वाइस एडमिरल सरीन को देशभर के अस्पतालों में (महिला) मेडिकल प्रोफेशनल्स की सुरक्षा को लेकर गठित नेशनल टास्क फोर्स का सदस्य नियुक्त किया था. इस टास्क फोर्स का गठन कोलकाता के आरजी कर हॉस्पिटल में एक महिला डॉक्टर के रेप और हत्या से जुड़े मामले के बाद देशभर में हुए विरोध-प्रदर्शन के बाद किया गया था.
सशस्त्र सेनाओं यानी थलसेना, वायुसेना और नौसेना से जुड़ी सभी मेडिकल नीतियों को लेकर डीजएएफएमएस ही रक्षा मंत्रालय में जिम्मेदारियां निभाता है. वाइस एडमिरल सरीन देश की 46वीं डीजी-एएफएमएस हैं. इससे पहले वे डीजी मेडिकल सर्विस (नेवी और वायुसेना) का पद भी संभाल चुकी हैं.
आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज (एएफएमएस), पुणे से पास-आउट वाइस एडमिरल सरीन रेडियो-डायगोनिस्ट में एमडी हैं. उन्होंने रेडिएशन ओंकोलॉजी मे डिप्लोमा और यूनिवर्सिटी ऑफ पिटसबर्ग से गामा नाइफ सर्जन की ट्रेनिंग भी ली हुई है.
अपने 38 साल के करियर में वाइस एडमिरल सरीन ने राजधानी दिल्ली स्थित आरएंडआर हॉस्पिटल में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट की हेड और प्रोफेसर के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं. इसके अलावा कमांड हॉस्पिटल, पुणे और भारतीय नौसेना के आईएनएचएस अश्विनी मेडिकल बेस की कमांडिंग ऑफिसर भी रह चुकी हैं.
खास बात ये है कि वाइस एडमिरल सरीन सेना के तीनों अंगों में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं. वे थलसेना में लेफ्टिनेंट से कैप्टन रैंक, नौसेना में (सर्जन) लेफ्टिनेंट से वाइस एडमिरल और वायुसेना में एयर मार्शल की रैंक भी ग्रहण कर चुकी हैं. वर्ष 2024 में उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और चीफ ऑफ नेवल कमंडेशन से नवाजा जा चुका है.
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