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हमने अमेरिका को बनाया सुपरपावर, यूरोप ने दिखाया ट्रंप को आईना

यूरोपीय यूनियन ने अमेरिका की दादागीरी की हवा निकाल दी है. जर्मनी के म्यूनिख सम्मेलन में ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने अमेरिकी राजदूत और पूर्व एनएसए माइक वाल्ट्ज पर बयानों की बमबारी कर दी. 

काजा कल्लास ने दुनिया के सामने ये कहा है कि अमेरिका इसलिए महाशक्ति है, क्योंकि उसके साथ बहुत सारे यूरोपीय देश हैं. अगर अमेरिका युद्ध में जाता है, तो उसे यूरोप की बहुत सहयोगियों की जरूरत पड़ती है, वहीं रूस युद्ध में अकेला ही लड़ता है. 

माना जा रहा है कि काजा कल्लास का ये बयान ग्रीनलैंड, कनाडा, फ्रांस समेत ईयू और नाटो को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी का जवाब है. 

रूस अकेले युद्ध लड़ता है और अमेरिका को पड़ती है यूरोप की जरूरत: काजा कल्लास

अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज को दिए गए एक तीखे जवाब में, यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने अमेरिका को आड़े हाथ ले लिया. काजा कल्लास ने कहा, “जब रूस युद्ध में जाता है, तो वह अकेला जाता है क्योंकि उसके पास सहयोगी नहीं होते. जब अमेरिका युद्ध में जाता है, तो हममें से बहुत से लोग आपके साथ जाते हैं और हम अपने लोगों को खो देते हैं. आपको (अमेरिका) महाशक्ति बनने के लिए हमारी भी आवश्यकता है.”

ईयू-नाटो को अक्सर कमतर आंकते हैं ट्रंप, कह चुके हैं कि मेरा सरकार से काम करना सीखे ईयू

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल के दिनों में यूरोपीय यूनियन पर टैरिफ बम फोड़ा था. दरअसल अमेरिका और ईयू के बीच ये तकरार उस वक्त शुरु हुई जब ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात कही. ग्रीनलैंड, यूरोपीय देश डेनमार्क का अर्धस्वायत्त क्षेत्र है, डेनमार्क नाटो का सदस्य है.

पिछले महीने जनवरी में दावोस में हुए सम्मेलन में ट्रंप ने ईयू और नाटो का मजाक उड़ाया था. ट्रंप ने  कहा, “नाटो के लिए अमेरिका सबसे ज्यादा योगदान देता है, लेकिन बदले में उसे कुछ नहीं मिलता. अगर अमेरिका नहीं हो तो नाटो कुछ भी नहीं.”

ट्रंप ने कहा, “मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. यूरोप के कुछ हिस्से ऐसे हैं, जो अब पहचान में भी नहीं आते और यह बदलाव किसी अच्छे कारण से नहीं हुआ है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.”

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अमेरिकी राष्ट्रपति के ग्रीनलैंड पर सैन्य एक्शन जैसे शब्दों पर यूरोपीय देश एकजुट हो गए और एक सुर में उन्होंने ट्रंप का विरोध किया था. जिसके बाद अमेरिका ने टैरिफ का ऐलान किया लेकिन ईयू ने भी साफ कर दिया कि ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ वो भी एक्शन लेंगे. यूरोप ने आपात बैठक करके अमेरिका पर 93 अरब यूरो (करीब 107.71 अरब डॉलर) तक के टैरिफ लगाने या फिर अमेरिकी कंपनियों को यूरोपीय बाजार से बाहर करने जैसे कदम उठाने पर विचार किया था.

डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि “अमेरिका कई सालों से यूरोपीय देशों की मदद करता आया है और अब समय आ गया है कि डेनमार्क ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका से समझौता करे.”

ट्रंप पर पलटवार करते हुए ईयू ने जवाब दिया था. यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा, कि “यूरोपीय संघ अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा करेगा और किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि ऐसे टैरिफ अमेरिका और यूरोप के रिश्तों को कमजोर कर सकते हैं.

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